
सुपौल से पंकज भारतीय/२२ नवंबर २०११मानवीय संवेदना के तार-तार हो जाने के इस घटना को कोई भी संवेदनशील आदमी जायज नहीं ठहरा सकता.सुपौल जिले के पिपरा थानान्तर्गत महेशपुर और कटिंग चौक के बीच आज सुबह जब एक डीजल से भारी टैंक लोरी अचानक टायर फटने के बाद संतुलन खोने से पलट गयी तो इसकी चपेट में एक मोटरसायकिल सवार भी आ गया तथा एक अन्य व्यक्ति भी दब गया.मोटरसाइकिल सवार आनंद भगत की जहाँ मौत हो गयी वहीं एक अन्य व्यक्ति सत्यदेव कुमार टैंक लोरी के नीचे बहुत देर तक दबा रहा और बुरी तरह जख्मी हो गया.
पर इस पूरे घटनाक्रम में जो सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आयी वो थी मानवीय संवेदना का बड़ा ह्रास.जब एक बड़े आवाज के साथ टैंक लोरी पलटी तो कुछ ही देर में वाहन सैंकडों लोगों की भीड़ जमा हो गयी.पर ये क्या? लोग घायलों को छोड़ बह रहे डीजल को लूटने में लग गए.किसी को इस बात की जरा भी फ़िक्र नहीं रही कि सत्यदेव वहां अंदर दबा पड़ा जिंदगी की भीख मांग रहा है.आनंद भगत भी वहां जिंदगी की अंतिम साँसे गिन रहा है.वहां होड़ सी मची थी डीजल लूटने की.बड़े-बड़े बर्तन लाकर लोग अधिक से अधिक डीजल अपने घर ले जाना चाहते थे,मानो लूट की प्रतियोगिता सी हो रही हो.आज की महिलायें किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है,ये बात यहाँ भी देखने को मिली. महिलाओं ने भी जम कर डीजल लूटने में उत्साह दिखाया और अपने सम्बंधित मर्दों का उत्साहवर्धन भी किया.अंत में तो लोगों ने कीचड़ में से भी डीजल छानना शुरू कर दिया.हाय री बेशर्मी?अगर इनमे से कोई आनंद को सही समय पर अस्पताल ले जाने का प्रयास करता तो शायद उसकी जान बच जाती और सत्यदेव को भी अधिक घायल होने से बचाया जा सकता था.
सार्वजनिक रूप से लोग भले ही भ्रष्टाचार के खात्मे की बड़ी-बड़ी बातें करते हों,पर व्यक्तिगत जीवन में अधिकाँश लोग लूट के छोटे मौके को भी गंवाना नहीं चाहते हैं.महेशपुर की इस घटना ने मानवता को एक बार फिर से शर्मशार किया है.
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Damn Shamefull:(