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Saturday, April 16, 2022

बिहार के सुपौल में तीन महीने के लिए लगा चिकेन बेचने पर प्रतिबंध, लोगों से अपील- कुछ दिन करें परहेज


सुपौल: सुपौल सदर प्रखंड की बसबिट्टी पंचायत अंतर्गत छपकाही गांव में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद तकरीबन 300 मुर्गियों का निष्पादन किया गया। संक्रमित क्षेत्र में केमिकल का छिड़काव और फागिंग जारी है। फिलहाल, कहीं से किसी पक्षी के मरने की सूचना नहीं आई है। वहीं, पशुपालन विभाग की टीम डाक्टरों के नेतृत्व में कैंप कर रही है। इस बीच जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में तीन महीने के लिए मुर्गापालन और इसके बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है। लोगों से अपील की गई है कि कुछ दिन चिकेन खाने से परहेज करें।

विभाग के कान तब खड़े हुए जब 31 मार्च को छपकाही गांव के वार्ड एक से लेकर 11 तक में कुछ मुर्गे-मुर्गियों और बत्तख की अचानक छटपटा कर मौत होने लगी। इस दौरान कई कौए भी मरे हुए पाए गए थे। जानकारी मिलने के बाद पशुपालन विभाग की टीम ने गांव जाकर जांच की। इसके बाद पटना से टीम बुलाकर पक्षियों का सैंपल लिया गया। जब इसकी जांच हुई तो बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई।

 

मामले की पुष्टि होने के बाद निदेशक पशुपालन पटना के निर्देश के बाद डीएम कौशल कुमार और एसपी डी अमरकेश के संयुक्त आदेश से रैपिड रेस्पांस टीम का गठन कर पक्षियों को मारने का काम शुरू किया गया। बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद एक से नौ किलोमीटर तक के सभी गांवों को चिह्नित करने के लिए टीम का गठन किया गया है जो इस दायरे में पक्षियों की गतिविधि पर नजर रखेगी और आवश्यकता पड़ने पर एहतियाती कदम उठाएगी। इससे पहले छपकाही गांव को केंद्र मानते हुए इसके एक किलोमीटर के दायरे में सभी गांवों के मुर्गे-मुर्गियों को नष्ट करने के लिए पशुपालन विभाग ने चार टीम का गठन किया था।
प्रत्येक टीम में चार-चार सदस्य थे। इस बाबत जिला पशुपालन पदाधिकारी डा. रामशंकर झा बताते हैं कि पक्षियों के मरने की सूचना की जानकारी मिलने के बाद मरे एवं जीवित पक्षी का नमूना लिया गया जिसकी जांच के बाद बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई। इसके बाद रैपिड रिस्पांस टीम का गठन कर पक्षियों को मारने का काम शुरू किया गया। टीम ने गांव के एक किलोमीटर के दायरे से मुर्गे-मुर्गियों का निष्पादन किया गया। अब कहीं से संदेहास्पद बात सामने नहीं आ रही है। 

जिला पशुपालन पदाधिकारी डा. रामशंकर झा ने कहा कि मुर्गे-मुर्गियों का निष्पादन किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र में फागिंग कराई गई है, ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव कराया गया है, जो अभी चलता रहेगा। डाक्टरों की टीम प्रभावित इलाके सहित आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों की गतिविधि पर नजर रख रही है। कहीं से असामान्य जानकारी प्राप्त नहीं हुई है और ना ही पक्षियों के मरने की बात सामने आई है।

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