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Saturday, November 13, 2021

BIHAR/फर्जी दारोगा मामले में थानाध्यक्ष निलंबित:खगड़िया के मानसी थाना में डेढ़ माह तक करता रहा काम, वरीय अधिकारियों को नहीं थी कोई खबर


खगड़िया जिले के मानसी थाना में फर्जी दारोगा को ड्यूटी पर रखने वाले थानाध्यक्ष दीपक कुमार आखिरकर निलंबित कर दिया गया। एसपी अमितेश कुमार ने चुनाव आयोग से मिली स्वीकृति के बाद उक्त कार्रवाई की है। इस मामले में फर्जी दारोगा विक्रम कुमार को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वहीं, एसपी ने निलंबित थानाध्यक्ष के विरुद्ध विभागी कार्रवाई के लिए वरीय अधिकारी को अनुशंशा भी कर दिया है।

इधर थानाध्यक्ष के निलंबन के बाद जिले में तरह-तरह की चर्चाएं की जा रही है। लोग इसे कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति बता रहे हैं। जबकि फर्जी दारोगा किसके सहारे मानसी थाना में पहुंचा अभी भी पुलिस उस गैंग के आका के पास नहीं पहुंच चुकी है। कोई भी पुलिस पदाधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं। शनिवार को इस मामले में एसपी अमितेश कुमार से भी बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया है।

खगड़िया SPDO के साथ भी छापेमारी में हुआ था शामिल

बेगूसराय जिले के लखनपुर निवासी रामचन्द्र सहनी का फर्जी दारोगा पुत्र ने जिला पुलिस की आंखो में डेढ़ माह तक धूल झोंका था। वह खगड़िया एसडीपीओ अमितेश कुमार के साथ भी पूर्व की एक छापेमारी दस्ते में शामिल हुआ था। जबकि मामले का उद्भेदन होने पर एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ ने ही जांच में उक्त आरोपी विक्रम को फर्जी करार दिया था।

एसडीपीओ के साथ फर्जी दरोगा विक्रम।
एसडीपीओ के साथ फर्जी दरोगा विक्रम।

इस मामले में पहले फर्जी दारोगा की गिरफ्तारी और बाद में मानसी थानाध्यक्ष के निलंबन के मामले ने पुलिस पर सवालिया निशान ला दिया है। फर्जी दारोगा विक्रम मानसी थानाध्यक्ष के कमरे में उनके साथ रहा करता था। जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या थानाध्यक्ष के कहने पर उसे अवैध वसूली में लगाया गया था। हालांकि इस मामले में लोगों का कहना है कि थानाध्यक्ष दीपक कुमार फर्जी दारोगा के जरिए कई अवैध कार्यों में वसूली का काम किया करते थे।

मुख्य षडयंत्रकर्ता की डायरी कैसे हुई गायब

पुलिस के अनुसार इस मामले में मुख्य षडयंत्रकर्ता मुंगेर जिले के बरियापुर निवासी रवि है। उसने फर्जी दारोगा के मानसी थाना में योगदान में अहम भूमिका निभाई थी। यह मामला और भी पेचिदा तब हो गया जब निलंबन से पहले थानाध्यक्ष दीपक को इस मामले के उद्भेदन में छापेमारी दस्ते में शामिल किया गया था। जानकार बताते हैं कि कांड में थानाध्क्ष की भूमिका संगीन होने पर उनको इस जांच में शामिल नहीं करना था। लेकिन निलंबित थानाध्यक्ष ने इस मामले में छापेमारी कर कई कागजात हासिल कर लिये। जिसमें आरोपी रवि का वह डायरी भी शामिल है जिससे इस मामले के बड़े आकाओं तक पहुंचा जा सकता था।

आरटीआई एक्टिविस्ट ने किया फर्जीवाड़ा का खुलासा

मानसी थानाध्यक्ष की मिलीभगत से फर्जी दारोगा के काम करने का खुलासा जिले के आरटीआई एक्टिविस्ट मनोज कुमार मिश्र ने किया था। इस मामले में उन्होंने पहले एसपी, फिर मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र भेज जांच की मांग की थी। इस मामले से जुड़े कई ऑडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे। मनोज कुमार मिश्र की माने तो यह मामला सिर्फ थानाध्यक्ष के निलंबन से समाप्त नहीं होने वाला है। इसमें जिले से लेकर पटना तक कई वरीय अधिकारियों की भी मिलीभगत है। उन्होंने कहा कि जब तक इस मामले में पूर्णत: उद्भेदन नहीं होता है। तब तक वे इससे पीछे नहीं हटेंगे।

एसपी क्यों कर रहे हैं मामले में खुद को दूर

यह मामला सिर्फ खगड़िया से जुड़ा नहीं है। खगड़िया के अलावा कई जिलों में इस गिरोह ने पुलिस के अलावा कई अन्य विभागों में फर्जी तरीके से लोगों को ज्वाइन कराता था। इस बात का खुलासा खुद फर्जी दारोगा विक्रम के एक BDO संदेश से पूर्व में हो चुका है। अब सवाल है कि इतना संवेदनशील मामले में एसपी न तो मीडिया बात करना चाहते हैं न ही फोन रिसव कर रहे हैं। ऐसे एक सवाल यह भी है कि वे खुद को इस मामले से क्यों दूर रखना चाह रहे हैं।

साक्ष्य को क्यों किया जा रहा है नष्ट

मामले के उद्भेकर्ता आरटीआई एक्टिविस्ट मनोज कुमार मिश्र की माने तो पुलिस इस मामले में साक्ष्य को मिटाने में जुटी है। उन्होंने बताया कि मानसी के कई बैंक में पुलिस गस्ती के दौरान डायरी लेखन को फाड़ दिया गया है। जबकि उनके उसके भी साक्ष्य मौजूद हैं। अब सवाल उठना एकबार फिर लाजमी होता है कि पुलिस साक्ष्य क्यों मिटाना चाह रही है। हालांकि एसपी अगर इस मामले में बयान देते हैं तो उनकी बातों को भी रखा जाएगा।

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