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Friday, June 18, 2021

OMG/देश का सबसे बड़ा ठग, ख्वाब दिखाकर लोगों से हड़प लिए 60 हजार करोड़, दर्ज हैं हजारों मुकदमे


राशिद नसीम ने लोगों को आशियाने का ख्वाब दिखाया और करीब 60 हजार करोड़ रुपए की ठगी की. ठगे गए लोगों ने एफआईआर कराई तो पुलिस सक्रिय हुई. हालांकि, तब तक महाठग राशिद नसीम भारत छोड़कर दुबई भाग चुका था.

लखनऊ: देश की जनता का अरबों रुपया हड़पकर भागे बिजनेस टायकून विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी पर सरकार की नजरें टेढ़ी हैं. लेकिन, इनसे भी बड़ा महाठग राशिद नसीम देश के कानून को ठेंगे पर रखकर लगातार सबको चुनौती दे रहा है. सपनों के सौदागर राशिद नसीम ने शाइन सिटी नाम से रियल स्टेट कंपनी खोलकर लोगों के सपनों को लूट लिया. शातिर राशिद नसीम ने मध्यम वर्गीय लोगों को निशाना बनाया और उन्हें आशियाने का ख्वाब दिखाकर प्लॉट और मकान के नाम पर करीब 60,000 करोड़ रुपए की ठगी की.

ठगे गए लोगों ने एफआईआर कराई तो पुलिस सक्रिय हुई. हालांकि, तब तक महाठग राशिद नसीम भारत छोड़कर दुबई भाग चुका था.


4000 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं
अब तक शाइन सिटी कंपनी और उसके एमडी राशिद नसीम, उसके भाई आसिफ नसीम के साथ ही कंपनी के 40 से अधिक अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों साथ ही दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुवाहाटी जैसे राज्यों में धोखाधड़ी के हजारों मामले दर्ज हो चुके हैं. देश में शाइन सिटी कम्पनी की ठगी के शिकार लोगों की संख्या 10 लाख से भी अधिक है. महाठग राशिद नसीम और उसके भाई आसिफ नसीम पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 4000 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं. सिर्फ लखनऊ के गोमतीनगर थाने में ही 238 केस दर्ज हैं.


पुलिस ने घोषित कर रखा है इनाम
लखनऊ पुलिस ने दोनों भाइयों पर पर 50-50 हजार और वाराणसी पुलिस ने 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है. इसके अलावा ईडी ने भी दोनों महाठग भाइयों समेत शाइन सिटी कंपनी के छह अफसरों के खिलाफ मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है. तो चलिए हम आपको बताते हैं महाठग राशिद नसीम की पूरी कहानी.


प्रयागराज का रहने वाला है राशिद नसीम
राशिद नसीम मूलरूप से प्रयागराज करेली के जीटीबी नगर का रहने वाला है. बताते हैं कि करीब 20 साल पहले वो मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी स्पीक एशिया का एक मामूली एजेंट था. कंपनी की ठगी की योजनाएं समझने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी और लखनऊ आ गया. यहां उसने हजरतगंज के डालीबाग इलाके में स्थित ग्रैंड न्यू अपार्टमेंट में एक पेंट हाउस खरीदा. जनवरी 2013 में उसने शाइन सिटी इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से रियल स्टेट कंपनी शुरू की. कम्पनी का ऑफिस गोमतीनगर के आर स्क्वायर मॉल में बनाया. सस्ते दाम में प्लाट का झांसा देकर उसने ठगी का मायाजाल फैलाना शुरू किया. महाठग राशिद नसीम के पास एक इंच भी जमीन नहीं थी लेकिन उसने राजधानी लखनऊ की सीमा से सटे इलाकों में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का प्रचार प्रसार शुरू किया. शातिर राशिद ने किसानों से उनके खेत में अपनी कंपनी के प्रोजेक्ट के होर्डिंग लगाने के लिए संपर्क किया. वो किसानों को एक होर्डिंग लगाने के एवज में हर महीने 20 से 25 हजार रुपये किराया देता था. सिर्फ एक होर्डिंग लगाने के इतने रुपए मिलने पर किसान आसानी से राजी हो जाते थे. इस तरह उसने जगह-जगह खेतों में अपनी हाउसिंग स्कीमों के होर्डिंग लगाकर लोगों को अपनी प्रेजेक्ट साइट बताकर विजिट करा कर रुपया जुटाना शुरु कर दिया. राशिद ने पूरे प्रदेश और फिर देश के कई राज्यों में नेटवर्क फैलाया. आकर्षक कमीशन का लालच देकर उसने छोटे-छोटे जिलों और शहरों में अपने एजेंट तैयार किए. इन एजेंट के जरिए उसने लोगों से निवेश में मुनाफा, प्लॉट और मकान देने के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपया इकट्ठा किया.


भाग गया दुबई
राशिद ने रियल स्टेट और निवेश की जो स्कीमें शुरू की थीं, उनमें सालभर के बाद निवेशकों को लाभ मिलने थे. शुरुआत में स्कीमों की अवधि पूरी होने पर राशिद ने अपने निवेशकों को लाभांश दिया. लेकिन, निवेशकों को मुनाफा देने का उसका ये फैसला ठगी की बड़ी साजिश का हिस्सा था. राशिद ने जब निवेशकों को मुनाफा दिया तो लोगों का उसकी कंपनी पर भरोसा बढ़ने लगा. लोगों ने अलग-अलग नामों से और अपने परिवार के सदस्यों के नामों से उसकी कंपनी में लाखों रुपए निवेश करने शुरू कर दिए. 2 साल बाद ही राशिद नसीम ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया. उसने धीरे धीरे निवेशकों को मुनाफा देना बंद कर दिया. निवेशक उससे संपर्क करते या दफ्तरों के चक्कर काटते तो वो उन्हें जल्द पैसा देने का वादा करके टरका देता. निवेशकों के पैसे फंसे तो उन्होंने दबाव बनाना शुरू कर दिया, उसके कार्यालय का घेराव किया. धरना-प्रदर्शन किया गया. पुलिस से शिकायतें शुरू की. कंपनी के एजेंटों पर दबाव बनाया. कंपनी के एजेंट और कर्मचारियों पर भी जालसाजी के आरोप लगने लगे तो उन्होंने भी नौकरियां छोड़नी शुरू कर दीं. इस बीच राशिद नसीम और उसके भाई आसिफ नसीम ने दफ्तर आना बंद कर दिया. करीब 3 साल पहले राशिद ने शाइन सिटी कंपनी का ऑफिस बंद कर दिया और दुबई भाग गया. ठगे गए लोगों ने कई बार कंपनी के कार्यालय में धरना प्रदर्शन करने के साथ ही तोड़फोड़ भी की.


कम्पनियों की भरमार
उधर, राशिद नसीम ने दुबई से ही कई नई कम्पनियां शुरू कीं. उसने शाइन सिटी इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड, शाइन सिटी बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी इरेक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी डवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी कॉलोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी चैरटीयर्स ऑफ रिलायबल सर्विसेजज प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी फूड्स एंड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, शाइन जॉइन ज्वेलरी ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड, क्लिक फॉर लाइफ यात्रा प्राइवेट लिमिटेड, शाइन ऐमार इंश्योरेंस मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड, शाइन केम्फलो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, गीत ज्वेलरी प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी अकेडमी ऑफ एविएशन एंड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, अराइज इंफ्रा प्रॉपर्टीज मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के अलावा इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंसेस, इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस, पर्सनल केयर उत्पादों की कम्पनियां और वर्चुअल करेंसी एसवीसी का धंधा भी शुरू किया.


टारगेट पूरा करने पर टीम को देता था लग्जरी कारें
राशिद अपनी टीम के लोगों और निवेशकों से संपर्क कर लगातार उनकी रकम वापस देने का भरोसा दिलाता रहा. साथ ही और निवेश के लिए प्रोत्साहित करता रहा. टीम के सदस्यों के लिए उसने आकर्षक स्कीमें भी लांच की. कम्पनी के वाइस प्रेसिडेंट और अन्य अफसरों के लिए 75 लाख का टारगेट पूरा करने पर एक एसयूवी और दुबई में दो रातों और तीन दिन का पैकेज देता था. इसी तरह 50 लाख के टारगेट पर लग्जरी कार, 25 लाख के टारगेट पर सामान्य कार और फॉरेन टूर के अलावा 15 लाख रुपये के टारगेट पर सिर्फ फॉरेन टूर देता था.


दुबई जाकर कई देशों में शुरू किया गोरखधंधा
महाठग राशिद नसीम ने दुबई जाकर खुद को ग्लोबल ब्रांड घोषित कर दिया. साल 2018 में उसने यूएसए, लंडन, न्यूजीलैंड, कनाडा, डेनमार्क, स्वीडन, आयरलैंड, हांगकांग, सिंगापुर, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड, फिनलैंड, मलेशिया, जॉर्जिया देशों में अपनी कम्पनियां शुरू करने का एलान किया. महाठग राशिद नसीम ने रियल एस्टेट में ग्रुप हाउसिंग, फ्लैट, कामर्शियल प्रॉपर्टी, आवासीय और व्यावसायिक प्लॉट, रो हाउसिंग के प्रोजेक्ट बनाए. इलेक्ट्रॉनिक्स में उसने एलईडी टीवी, रेफ्रिजरेटर, माइक्रोवेव ओवन, मिक्सर-ग्राइंडर, पंखे समेत अन्य घरेलू उत्पाद लांच किए.


देशभर में चलाईं थीं ये हाउसिंग स्कीमें
लखनऊ में सीतापुर रोड पर पैराडाइज गार्डन, मोहनलालगंज में नगराम रोड पर शाइन वैली, न्यू जेल किसान पथ पर सॉलिटेयर सिटी, न्यू जेल रोड पर ही जेवियर सिटी, नगराम रोड पर समृद्धि गुल्लक, किसान पथ पर नेचर वैली, निगोहा में रायबरेली रोड पर रॉयल रेजिडेंसी, बिजनौर रोड पर वेलवेट सिटी, रायबरेली रोड पर टोल प्लाजा के पास वैदिक विहार और रॉयल रेजिडेंसी, वाराणसी में काशियाना फेज वन, काशियाना फेज 2, काशियाना फेज थ्री, कुटुंब काशियाना, चंदौली इंडस्ट्रियल एरिया में चंद्रलोक काशियाना और चंद्रलोक काशियाना फेस 2, रोहनिया में अराइज वेलवेट के अलावा एलीट काशियाना, मिर्जापुर में माउंट हैवन, विंध्यांचल में विंध्य आंगन, गोरखपुर में शुभालय 1, शुभालय 2, शुभालय 3, रायबरेली में शाइन रामनीया, प्रतापगढ़ में करंट अर्बन, सुल्तानपुर में सॉलिटेयर, कानपुर के चौबेपुर में गैलेक्सी 1 गैलेक्सी 2, पोल स्टार सिटी 1, पोल स्टार सिटी 2, पोल स्टार 3, समृद्धि गुल्लक, प्रयागराज में गौहनिया चौराहा पर जायर स्पार्कले, समृद्धि गुल्लक फेस 1, झांसी में सारस, बिहार के पटना में ताशी, ओमना, सिवान में बहुलिया सिवान, राजगीर में निसर्ग, सासाराम में रिवर माउंट, गया में स्वर्ग भूमि, रायपुर में दक्ष, दुर्ग में नक्श, कोलकाता में टाटा कैंसर अस्पताल के पास शाइन ग्रीन पैराडाइज, धनबाद में समृद्धि निवास और दरसी, हजारीबाग में मंधन, गोवाहटी में शाइन वैली.


आशियाने का ख़्वाब दिखाकर ठगे करोड़ों रुपये
शातिर राशिद ने लोगों को घर बनाने का झांसा देकर मोटी रकम जुटाई. उसने 200 रूपये प्रति स्क्वायर फुट से 1000 रुपये प्रति स्क्वायर फुट के प्लाट दो लाख से 10 लाख रुपये में बेचने की स्कीमें लांच की. अलग-अलग साइज के प्लाट के लिए 20 हजार से एक लाख रुपये तक बुकिंग अमाउंट वसूला और 3000 से 2 लाख रुपये तक की न्यूनतम मासिक किस्त में तय कर दीं. ये किस्तें मामूली होती थीं इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोग उससे जुड़ते गए. उसने लोगों को लुभाने के लिए प्लॉट की बाउंड्री वाल के निर्माण पर 50 प्रतिशत और निर्माण कार्य पर 20 प्रतिशत छूट का ऑफर भी दिया था.


पीआईपी यानि प्रोजेक्ट इन्वेस्टमेंट प्लान
इस प्लान में 2 लाख रुपये का न्यूनतम निवेश करने पर 12 महीने बाद मूलधन यानि दो लाख रुपये की वापसी और 15 महीने बाद 30 हज़ार रुपये का लाभ और साथ में 800 स्क्वायर फीट का प्लॉट देने की बात कही गई थी. 15 महीने बाद प्लॉट खुद या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से रजिस्ट्री करा सकते हैं या अपनी मनचाही कीमत पर किसी अन्य को बेच सकते थे. 15 महीने के बाद कंपनी को ही दो लाख रुपये में प्लाट बेच सकते थे. यानि कंपनी 15 महीने बाद निवेशकों को दो लाख रुपये मूलधन के साथ 30 हज़ार रुपये का लाभांश और दो लाख का प्लाट या उसकी कीमत अर्थात कुल लाभ 4,30,000 रुपया कमाने का लालच देती थी.


गीत ज्वैलरी कम्पनी खोलकर शुरू किया हीरों का कारोबार
राशिद ने गुजरात के एक कारोबारी के साथ मिलकर साल 2017 में हीरों का कारोबार शुरू किया. उसने गीत ज्वैलरी का नाम से कम्पनी शुरू की. उसके ज्यादातर क्लाइंट कम्पनी के ही अधिकारी-कर्मचारी और एजेंट थे. राशिद सबको उनकी परफार्मेंस के आधार पर प्वाइंट्स देता था और फिर ज्वैलरी खरीदने पर प्वाइंट्स रिडीम कराता था. इससे जहां लोगों को ज्वैलरी काफी कम दामों में मिल जाती थी. वहीं, राशिद को खूब बिजनेस मिलता था.


50 प्रतिशत रेट पर लग्जरी कारों की स्कीम
राशिद ने कम्पनी से जुड़े लोगों के लिए 50 परसेंट रेट पर लग्जरी कारों की स्कीम शुरू की थी. उसकी ये स्कीम भी नेटवर्क मार्केटिंग का हिस्सा थी. कम्पनी के अधिकारियों-कर्मचारियों को इन्वेस्टमेंट के टारगेट पूरे करने पर उन्हें प्वाइंट्स मिलते थे. लग्जरी कार लेने वालों को वो प्वाइंट्स रिडीम करने पर कार की कीमत में 50 परसेंट छूट देता था. आधे दाम पर लग्जरी कार पाने के लिए कम्पनी के लोगों ने उसे खूब बिजनेस दिलाया.


अल्कलाइन वाटर बनाने वाली केम्फलो कम्पनी लांच की
राशिद नसीम ने बढ़ती उम्र को रोकने के लिए जल क्रांति के स्लोगन के साथ अल्कलाइन वाटर कम्पनी केम्फलो भी लांच की. शाइन केम्फलो नाम की ये कम्पनी अल्कलाइन वाटर प्योरिफायर सिस्टम और मशीन के अलावा अल्कलाइन वाटर पॉट्स, अल्कलाइन वाटर जग, बॉटल, स्टिक बनाती थी. काफी महंगी मशीन वो सिर्फ 1650 रुपये में बेचता था. ये ऑफर सिर्फ बिजनेस टारगेट के साथ ही मिलता था.


बिटकॉइन की तरह अपनी वर्चुअल करेंसी शाइन वी कॉइन (एसवीसी) शुरू की
शातिर राशिद नसीम ने वर्चुअल करेंसी की तेजी से बढ़ती दुनिया में भी कदम रखा. उसने अपनी वर्चुअल करेंसी एसवीसी शुरू की. चूंकि, राशिद के पास 10 लाख से ज्यादा कंज्यूमर पॉवर थी इसलिए उसने एसवीसी से खूब मोटी कमाई की. अपनी वर्चुअल करेंसी एसवीसी की शुरुआत उसने ढाई से तीन रुपये से की थी. कुछ ही हफ्तों में उसका रेट 125 से 130 तक पहुंच गया. उसने कम्पनी के अधिकारियों-कर्मचारियों को टारगेट पूरा करने पर प्वाइंट्स के बदले एसवीसी देना शुरू किया. बाद में वही लोग एसवीसी में रुपया लगाने लगे जिससे इस वर्चुअल करेंसी का रेट बढ़ने लगा.


अफसरों की काली कमाई के निवेश और पुलिस से सेटिंग करके फलता-फूलता रहा महाठग
राशिद नसीम पर पुलिस महकमे की खासी मेहरबानी रही. उसने कई आईएएस और आईपीएस अफसरों की काली कमाई भी अपने प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रखी थी. इसके अलावा उसने कुछ नेताओं से भी नजदीकियां बना ली थीं. यही वजह है कि ठगी के आरोपों में घिरने के बाद भी काफी समय तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. गोमतीनगर पुलिस और एसआरएस मॉल चौकी की पुलिस तो जैसे उसके इशारों पर काम करती थी. शाइन सिटी कम्पनी की ठगी के शिकार लोगों को पुलिस थाना-चौकी से ही टरका देती थी. पुलिस की राशिद और उसके गुर्गों से सांठगांठ थी. कम्पनी के खिलाफ कोई भी शिकायत लेकर आता तो उसकी सूचना तत्काल राशिद तक पहुंच जाती थी. राशिद शिकायतकर्ता को मैनेज कर लेता था। इसके बदले राशिद हर महीने पुलिस को मोटी रकम देता था. राशिद के कई ऑडियो वायरल हुए जिसमें उसने अपने खास पुलिसकर्मियों के नाम लिए हैं. ऐसे कुछ पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी.


जॉर्जिया की नागरिकता लेने की कर रहा कोशिश
राशिद के फिलवक्त दुबई में होने की जानकारी मिल रही है. देश से भागने के बाद वो किसी अन्य देश की नागरिकता लेने की कोशिश कर रहा है. दुबई नागरिकता नहीं देता इसलिए राशिद ने इसके लिए जॉर्जिया में आवेदन किया है.


शाइन की डायरेक्ट मार्केटिंग टीम के अध्यक्ष उपाध्यक्ष बीडीएम एसोसिएट और एजेंट के नाम
डॉ अमिताभ श्रीवास्तव सिंघम टीम, रवि तिवारी विक्रांत टीम, ज्ञान प्रकाश उपाध्याय, मनीष जयसवाल, ओमकार, विवेक किंग ऑफ स्पाइडर, दिनेश कुमार मौर्य टाइम चैंपियन का प्रेसिडेंट, विनीत पांडे वाइस प्रेसिडेंट, नवीन पांडे बीडीएम स्पार्टा टीम, नूरुल वाराणसी, अभिषेक ठाकुर पैंथर टीम, नितिन ,आशीष सिंह, संजय वर्मा जगुआर टीम, नितिन जयसवाल और रोहित शर्मा टीम अटल, अजीत यादव टीम शाइन, मोहम्मद जावेद, शोभनाथ शर्मा डोमिनेटर टीम, अभिषेक अवस्थी और संदीप पांडे कोहिनूर टीम, मोहम्मद तारिक शाइन विक्टर टीम, संदीप राठौर राइजिंग स्टार टीम, अभिनव दीप यूथ इंडियन टीम का रिया शेख और नाजिम शेख, शाइन अमन टीम का संजीव श्रीवास्तव जैसे सैकड़ों लोग राशिद की टीम का हिस्सा थे.


अमिताभ श्रीवास्तव शाइन सिटी का खास आदमी था. वो सिंघम टीम का अध्यक्ष था जो इस समय जेल में है. उसे वाराणसी पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था. वाराणसी में वो अपनी कम्पनी किंग्सटन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड चलाता था. मूलरूप से बिहार के सिवान का रहने वाला अमिताभ यहां वाराणसी में दशाश्वमेध घाट रोड पर एक अपार्टमेंट में रह रहा था. वो शाइन केमफ्लो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, वर्धमान बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, शाइन जॉइन ज्वेलरी ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड, क्लिक फॉर लाइफ यात्रा प्राइवेट लिमिटेड, शाइन ऐमर इंश्योरेंस मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड, माइलस्टोन रियलकॉन लिमिटेड, शाइन सिटी इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, शाइन जॉइन प्राइवेट लिमिटेड, क्विक डील ऑनलाइन ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, ऑलमाइटी कैरियर एंड कंसलटेंसी प्राइवेट लिमिटेड, गीत ज्वैलरी प्राइवेट लिमिटेड, शाइन सिटी अकैडमी आफ एवियशन एंड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा था.


चालाक राशिद ने खुद को बचाया, सिर्फ मोहरे गिरफ्तार
राशिद नसीम जानता था कि ठगी के बाद उसे देश छोड़कर भागना है इसलिए किसी कानूनी पचड़े में नहीं फंसना चाहता था. इसके लिए उसने ऐसी चाल चली कि कोई समझ ही नहीं पाया. शातिर राशिद ने अच्छा बिजनेस लाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को कम्पनी के वाइस प्रेसिडेंट और मैनेजर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठाना शुरू किया. प्लॉट की रजिस्ट्री पर इन्हीं अफसरों के दस्तखत होते थे. बाद में प्लॉट नहीं मिलता तो एफआईआर में दस्तखत करने वाले ही फंसते थे. राशिद ने अपने सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को मोहरा बनाया और अरबों रुपया डकारकर दुबई भाग गया. यहां पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो राशिद के तैयार किए मोहरे फंसते गए. पुलिस अब तक कम्पनी के वाइजस प्रेजिडेंट अमिताभ श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश के अलावा उत्तमा अग्रवाल, दीपक भारती, वशिष्ठ कुमार, विनय चौधरी समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है.


नेपाल में गिरफ्तार हुआ था, छूटने के बाद से है अंडरग्राउंड
महाठग राशिद नसीम बीते साल नेपाल में गिरफ्तार हुआ था. पुलिस सूत्र बताते हैं कि राशिद ने नेपाल में मल्टी लेवल मार्केटिंग नेटवर्क से जुड़ी स्कीमों को लेकर एक आयोजन किया था. नेपाल में इस तरह की स्कीमों को अवैध घोषित किया गया है इसलिए वहां की पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. बताते हैं कि राशिद 43 दिन नेपाल की जेल में रहा. वहां से जमानत पर छूटने के बाद से वो अंडरग्राउंड है. लखनऊ समेत देश के कई राज्यों की पुलिस उसे तलाश कर रही है. लखनऊ पुलिस ने उसके दुबई में होने की आशंका पर विदेश मंत्रालय से संपर्क भी किया है. इस सिलसिले में लखनऊ पुलिस लगातार विदेश मंत्रालय से पत्राचार कर रही है. राशिद और उसके भाई आसिफ के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी है. इसी साल जनवरी में ईडी ने राशिद और आसिफ समेत शाइन कम्पनी के छह लोगों पर अवैध तरीके से 36.54 करोड़ रुपये देश से बाहर भेजने के आरोप में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है.


कम्पनी के चक्कर में कई ने दी जान तो कुछ की संदिग्ध हालात में हुई मौत
शाइन सिटी कम्पनी के चक्कर में कई लोगों ने खुदकुशी कर ली तो कुछ की संदिग्ध हालात में मौत हो गई. उन्नाव में रहने वाले 27 साल के मनीष निषाद ने बतौर एजेंट कम्पनी में काफी लोगों की रकम निवेश कराई थी. निवेश की निर्धारित अवधि बीतने के बाद जब लोगों को रुपये वापस नहीं मिले तो उन्होंने मनीष से संपर्क किया. मनीष ने राशिद और कम्पनी के अन्य अफसरों से सम्पर्क साधा लेकिन सब उसे टरकाते रहे. उधर, निवेशकों ने मनीष पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. परेशान मनीष ने 20 जून 2020 को राशिद नसीम को व्हाट्सअप पर मैसेज भेजकर लोगों की रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई. राशिद ने उस पर ध्यान नहीं दिया अंत में भारी दबाव के चलते 22 जून 2020 को मनीष ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली.


उन्नाव के ही सहायक शिक्षक प्रदीप कुमार शुक्ला निवेशकों के दबाव से इतने तनाव ग्रस्त हो गए कि बेहोश होकर आग में गिर पड़े. उनका चेहरा झुलस गया और एक आंख खराब हो गई. लखनऊ के गुडम्बा कुर्सी रोड निवासी शाहिद हुदा को तनाव के कारण ब्रेन स्ट्रोक आ गया, उनकी याददाश्त खो चुकी है.


महिला ने की खुदकुशी
इसी तरह बिहार के रहने वाले कुंदन की संदिग्ध हालात में मौत हो गई. कुंदन के भाई किशन ने बताया कि उसे 21 सितंबर 2020 को कई गाड़ियों ने टक्कर मारी थी जिसमें उसकी मौत हो गई. किशन के मुताबिक उसका भाई शाइन सिटी कम्पनी में था और लोगों का रुपया कम्पनी में लगवाया था. कम्पनी रुपया वापस नहीं कर रही थी जिस पर वो दबाव बना रहा था. इसी दौरान उसके भाई की रहस्यमय हालात में मौत हो गई.


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