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Saturday, April 3, 2021

Bihar: AG की रिपोर्ट में खुलासा, मेडिकल कॉलेज के दाखिले में बडे़ पैमाने पर हुई धांधली

Bihar: AG की रिपोर्ट में खुलासा, मेडिकल कॉलेज के दाखिले में बडे़ पैमाने पर हुई धांधली

Patna: बिहार महालेखाकार के ऑडिट रिपोर्ट ने सियासी बवाल मचा दिया है. महालेखाकार (Auditor General) के ऑडिट रिपोर्ट ने राज्य के मेडिकल शिक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ी है. रिपोर्ट आने के बाद मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता कठघरे में आ खडी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज पीएमसीएच (PMCH) में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है. महालेखाकार के अनुसार पीएमसीएच (PMCH) में बड़े पैमाने पर जाली अंक पत्र से नामांकन हुए हैं. साथ ही स्वीकृत सीटों से परे अनियमित नामांकन हुए हैं.

जाली अंक पत्र के अलावा स्वीकृत सीटों से परे अनियमित नामांकन हुए.
राज्य के महालेखाकार ने बिहार के मेडिकल शिक्षा की रिपोर्ट जब ऑडिट की तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात सामने आयी है.

साल 2018-19 की ऑडिट रिपोर्ट में महालेखाकार ने साफ लिखा है, 'स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकल संस्थानों की अधूरी निगरानी और पर्यवेक्षण के परिणामस्वरुप अनियमित प्रवेश, जाली अंक पत्रों पर प्रवेश, गलत तरीकों से प्रवेश, पटना मेडिकल कॉलेज और राजकीय आयुर्वेद कॉलेज बेगूसराय में स्वीकृत सीटों से परे अनियमित नामांकन किया गया.' यानी पीएमसीएच और राजकीय आयुर्वेद कॉलेज बेगुसराय में एडमिशन न केवल गलत हुए बल्कि स्वीकृत सीटों से ज्यादा भी हो गए. ये रिपोर्ट जारी होने के अब पीएमसीएच (PMCH) पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.

इधर, ऑडिट रिपोर्ट होने के बाद कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं. MLC प्रेमचन्द्र मिश्रा ने कहा है कि 'सरकार आखिर किस तरह के डॉक्टरों की टीम तैयार कर रही है. ये सरकार को बताना चाहिए कि आखिरी में गड़बड़ी क्यों हो रही है. सरकार में नैतिकता बची है तो गड़बड़ी करने वालों को चिन्हित कर कार्रवाई करे.

मेडिकल की सीटों को बढ़ाने के लिए प्रयास नहीं हुए.
जानकारी के अनुसार, एजी (AG) ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि 'बिहार में एक लाख की आबादी पर फिजिशियन, आयुष, चिकित्सक, दंत चिकित्सा और नर्सों की 92 फीसदी पदें खाली हैं.' वहीं, सरकार की लापरवाही को दिखाते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2006-07 से 2016-17 के बीच 12 मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य शुरु किया गया, लेकिन लापारवाही के कारण साल 2018 तक केवल दो मेडिकल कॉलेज कार्यरत किए जा सके. साथ में 61 नर्सिंग संस्थान खोलने का लक्ष्य था लेकिन 2018 तक सिर्फ दो नर्सिंग संस्थानों का निर्माण किया जा सका. बिहार सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेजों की सीटों को बढ़ाने के लिए प्रभावी प्रयत्न नहीं किए गए. यही हाल मेडिकल शिक्षा के सभी शाखाओं में शिक्षण और गैर शिक्षण कर्मचारियों की कमी 6 से 56 फीसदी और 8 से 70 फीसदी तक रही है.

MCI के नियमों का हो रहा उल्लंघन
इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में होने वाली पढ़ाई की गंभीरता पर भी महालेखाकार ने सवाल खड़े किए हैं. बिहार के पांच मेडिकल कॉलेजों का ऑडिट करने के बाद एजी (AG) ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, 'पांच मेडिकल कॉलेजों में वास्तविक शिक्षण घंटे में एमसीआई की शर्तों के विरुद्ध 14 से 52 प्रतिशत के बीच कमी थी.' रिपोर्ट के अनुसार, पढ़ाई के घंटे में कमी की वजह संकायों का आभाव था. साथ ही, संस्थाओं के मानदंडों की तुलना में आधारभूत संरचना में उल्लेखनीय कमियां पायी गयी हैं, जिसके कारण कॉलेज के अंदर अनुकूल वातावरण नहीं तैयार हो पाया.

इधर, जांच के बाद एजी (AG) के अनुसार, 'पांच मेडिकल कॉलेजों में 20 नमूना जांचित विभागों में मेडिकल उपकरणों की कमी 38 से 92 फीसदी के बीच रही है. मशीनों को चलाने के लिए लैब टेक्निशियन की कमी पायी गयी. वहीं, लापरवाही के कारण मशीनों के मरम्मत के लिए कदम तक नहीं उठाए गए, जिसके कारण कई मशीन 1 से लेकर 9 सालों से बेकार पड़े हैं.

अब इस मामले पर RJD ने भी मामले पर सरकार को घेरा है. RJD के दिग्गज नेता अब्दुलबारी सिद्दिकी की मानें तो सरकार के सुशासन की पोल महालेखाकार ने ही खोल कर रख दी है. सरकार को अब PAC की रिपोर्ट भी जारी करना चाहिए, पता तो चले गड़बड़ी क्यों और किस स्तर पर हुई है.

5 वर्षों में 75 फीसदी राशि का हुआ व्यय
महालेखाकार ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में पाया कि मेडिकल कॉलेजों के साथ ही साथ सभी नर्सिंग संस्थानों के छात्रों को मानदंडों के अनुसार, साल 2013-18 के दौरान ग्रामीण इंटर्नशिप से पर्याप्त रुप से अवगत नहीं कराया गया. रिपोर्ट के अनुसार, योजनामद के अंतर्गत 2013 से 2018 के बीच के दौरान केवल 75 फीसदी ही राशि व्यय किया गया. महालेखाकार ने अपने रिपोर्ट में पाया कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत शुरु किए गए निर्माण कार्यों की खराब प्रगति के कारण ऐसा हुआ है.

सुरक्षा-सफाई के नाम पर ज्यादा भुगतान किया गया
रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल कॉलेज में भारी धांधली पाई गई है. महालेखाकार की रिपोर्ट के अनुसार, वर्धमान इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल साईंस, पावापुरी और मधेपुरा मेडिकल कॉलेज के निर्माण और अक्टूबर 2012 से मार्च 2017 के दौरान बेतिया और पटना के चार नमूना जांचित कॉलेजों में सुरक्षा सफाई और गृह व्यवस्था उद्देश्यों के लिए कर्मचारियों की आपूर्ति के नाम पर 78.47 करोड रुपए का आधिक भुगतान या अस्वीकार्य भुगतान किया गया. परामर्शियों को 7.35 करोड़ रुपए का नियम के अनुकूल भुगतान नहीं किया गया.

वहीं, रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने महालेखाकार की रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है. उन्होंने कहा है कि महालेखाकार ने जिन गड़बड़ियों की ओर सरकार को ध्यान दिलाया है, उसे विभाग अपने स्तर से गंभीरतापूर्वक विचार करेगा.

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Shivesh Mishra

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