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Friday, March 19, 2021

NEWS DESK/जब खत्म हो जाएगी पृथ्वी तो चांद की मदद से बसेगी दुनिया! वैज्ञानिकों ने की ये जबरदस्त प्लानिंग


बाइबिल में नोआह विभिन्न प्रजाति कि जानवरों को अपने बॉक्स में भरकर जल प्रलय से बचाते हैं. अब वैज्ञानिक भी कुछ ऐसी ही करने की सोच रहे हैं. वे चाहते हैं कि 67 लाख बीज, स्पर्म, अंडे और DNA को चांद की सतह से नीचे एक सुरक्षित बक्से में स्टोर किया जाए. यूनिवर्सिटी आफ एरिज़ोना के कुछ वैज्ञानिक ने पिछले सप्ताह ही इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स एयरोस्पेस कॉरपोरेशन के सामने यह प्लान रखा है.

रिसर्च पेपर के लेखक और मेकेनिकल इंजीनियर जेकर ​थंगा का कहना है कि प्राकृतिक रूप से पृथ्वी का पर्यावरण लगातार बदलता रहता है. ज्वालामुखी या परमाणु बम जैसे किसी बड़ी आपदा से पृथ्वी पर जीवन ही खत्म हो सकती है.

ऐसी स्थिति में धरती पर न तो पौधे बचेंगे और न ही कोई जीव. ऐसे में चांदी की सतह से नीचे रखे बक्से की मदद से एक बार ​फिर जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है.

थंगा और उनकी टीम ने इस प्लान के बारे में पूरी जानकारी भी दी. "Lunar Pits and Lava Tubes for a Modern Ark" नाम से एक रिसर्च पेपर में उन्होंने बताया कि चांद की सतह से नीचे वे एक बॉक्स बनाएंगे. चांद की सतह से यह करीब 80 से 100 मीटर नीचे ‘लुनर पिट्स’ में रखा जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि चांद पर धूमकेतु के टकराने के खतरे के अलावा तापमान में बड़े उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए इसे सतह से नीचे रखने की योजना है. सतह से बॉक्स तक की दूरी तय करने के लिए विशेष रूप से जगह भी बनाई जाएगी.

बेहद कम तापमान पर रखे जाएंगे सैम्पल्स

इस वॉल्ट के अंदर लाखों जीवित प्रजातियों के सैम्पल्स को बेहद कम तापमान पर रखा जाएगा. बीज को -292°F तापमान पर रखने की योजना है. इसी प्रकार स्टेम सेल्स के लिए -320°F तापमान मेंटेन करना जरूरी होगा. इस वॉल्ट तक पावर पहुंचाने के लिए 2,055 स्क्वैयर फीट के सोलर पैनल को लगाया जाएगा.

इस प्लानिंग को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है​ कि आखिर कैसे इन बीज, स्पर्म, अंडे और DNA के 67 लाख सैम्पल्स को जुटाकर चांद तक पहुंचाया जाएगा. लेकिन आपको इसकी भी चिंता करने की जरूरत नहीं है. इन वैज्ञानिकों के पास इसके लिए भी प्लान है.

कैसे चांद तक पहुंचाए जाएंगे ये सैम्पल्स

थंगा ने कहा कि चांद तक इसे कम खर्च में पहुंचाया जा सकता है. इसके लिए 250 रॉकेट लॉन्च की जरूरत होगी. इस बारे में समझने के लिए आपको बता दें कि स्पेस में स्थित इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) को तैयार करने के लिए 40 रॉकेट लॉन्च की जरूरत पड़ी थी. उनका कहना है कि यह कोई बड़ी बात नहीं है. हम खुद इससे हैरान हैं.

यह आइडिया भले ही बहुत बड़ा न हो, लेकिन थंगा का मानना है कि उन्होंने जो प्लानिंग की है, मानवता के लिए यह प्लानिंग वरीयता होनी चाहिए. एक रिपोर्ट में बताया गया है कि आज से करीब 75,000 साल पहले टोबा सुपरवोलकैनो आया था. इसे ठंडा होने में ही करीब 1,000 साल लगे थे. पृथ्वी पर इंसानों का फुटप्रिंट सबसे ज्यादा है. ऐसे में अगर इंसानों की प्रजाति खत्म हो जाती है तो इसक बेहद बुरा असर देखने को मिलेगा.

क्या विशालकाय आपदा की ओर बढ़ रही पृथ्वी

​थंगा का मानना है कि पृथ्वी किसी बहुत विशालकाय आपदा की ओर बढ़ रही है. उन्होंने इसके पीछे मानव गतिविधियों समेत कई अन्य वजहें बताई हैं. इनमें से बहुत सी गति​विधियों के बारे में खुद इंसानों में भी समझ नहीं है. पिछले दशक में ही न जाने किनी प्रजातियों की संख्या में भारी गिरावट आई और वे अब विलुप्त होने के कगार पर हैं.

धरती पर पहले से ही मौजूद है जीन बैंक

आपको जानकर हैरानी होगी कि इंसानों ने पहले ही धरती पर एक ‘जीन बैंक’ तैयार कर लिया है. नॉर्वे द्वीप के स्पिट्सबर्गेन में स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट बनाया गया है. यह क्षेत्र आर्कटिक सर्किल के दायरे में आता है. इसमें 9,92,000 यूनिक सैम्पल रखे गए हैं. हर एक सैम्पल में पौधों के करीब 500 बीज रखे गए हैं. लेकिन, माना जाता है कि किसी वैश्विक आपदा के बाद की स्थिति के लिए यह पर्याप्त नहीं होगा.

इसका एक कारण यह भी है कि स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट तापमान और समुद्र तल बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित नहीं रहेगा. 2017 में ही एक बर्फ पिघलने की वजह से वॉल्ट के पास बाढ़ जैसी स्थिति हो गई थी. इसके अलावा, स्वालबार्ड की राजधानी लॉन्गयरबेन में तापमान धरती पर किसी अन्य जगह की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है.

थंगा और उनकी टीम जिन कारणों से चांद पर जीवन सुरक्षित करना चाह रहे है, उसे जानकर हैरानी होती है. उनकी चिंता है कि सामाजिक पतन, पर्यावरणीय आपदा जैसी स्थिति की वजह से पृथ्वी ही खत्म हो सकती है. हालांकि, थंगा की टीम के ही कुछ लोग इसे मानवता के लिए एक उम्मीद के रूप में देख रहे हैं.

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