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Sunday, March 28, 2021

Holi 2021 : आज सभी चौक-चौराहों पर जलेगी होलिका, इन 14 स्थानों पर भव्य होगा आयोजन, जानिए शुभ मुहूर्त

Holi 2021 : आज सभी चौक-चौराहों पर जलेगी होलिका, इन 14 स्थानों पर भव्य होगा आयोजन, जानिए शुभ मुहूर्त

भागलपुर। इस बार होलिका दहन के दिन की शब-ए-बरात भी है। इसको लेकर रविवार की रात 12 के पूर्व होलिका दहन किया जाएगा। शांति समिति के सदस्य रात दस बजे तक ही होलिका दहन कराने की तैयारी कर रही है। शहर के सभी चौक-चौराहों पर इस बार भी होलिका दहन की तैयारी चल रही है। शहर के खंजरपुर, दीपनगर, बूढ़ानाथ चौक, सराय, नयाबाजार, मंदरोजा, रामसर, स्टेशन चौक, आनंद चिकित्सालय रोड, खलीफाबाग, चुनिहारी टोला मोड़, कोतवाली चौक, परवत्ती, नरगा चौक, चंपानगर में भव्य होलिका दहन का आयोजन होता है। समाजसेवी प्रकाश चंद्र गुप्ता का कहना है कि मंदरोजा, आनंद चिकित्सालय रोड, खलीफाबाग, चुनिहारी टोला मोड़ पर भारी संख्या में महिलाएं पूजा के लिए जुटती है। लकड़ी, गोयठा व नए अनाज की होलिका जलती है। महिलाएं पारंपरिक ढंग से पूजा करती हैं।


 
50 स्थानों पर होता है आयोजन

शहर के 50 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन का आयोजन होता है। एक स्थान पर पांच से दस क्विंटल तक लकड़ी की खपत होती है। शहर में चार सौ से पांच सौ क्विंटल के करीब लकड़ी होलिका दहन में जलाई जाती है। पर्यावरणविद् की मानें तो एक पेड़ से आठ से 15 क्विंटल तक लकड़ी निकलती है। हर वर्ष 40 से 50 पेड़ों की बली होलिका दहन के रूप में दी जाती है। कहीं-कहीं तो हरे-भरे पेड़ को भी होलिका दहन के नाम पर काट दिए जाते हैं। पर्यावरणविद् का मानना है कि अगर लकड़ी की जगह गोबर की बनी सामग्री का उपयोग किया जाए तो 40 से 50 पेड़ों को बचाया जा सकता है। हालांकि कुछ चौक-चौराहों पर हाल के वर्षों में लकड़ी व गोयठे को मिलाकर होलिका दहन की जा रही है।


 

पेड़ तैयार होने में बीत जाते हैं कई वर्ष

एक पेड़ को तैयार होने में वर्षों लग जाते हैं। एक पेड़ के कटने से ऑक्सीजन के स्रोत को खत्म होते ही हैं, लकड़ी जलने पर कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डायऑक्साइड, सल्फर नाइट्रेट व नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैस निकलती है जो शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाता है। एक स्थान पर होलिका जलाने पर पांच से सात सौ रुपये के एक क्विंटल गोयठे की जरूरत पड़ती है। कम नमी की वजह से धुआं कम निकलता है। कम मात्रा में कार्बन डायऑक्साइड और नाइट्रेट निकलती है, जो देसी घी, लौंग, कपूर के प्रभाव से खत्म हो जाती है।

 


अब कम काटे जा रहे पेड़

मंदार नेचर क्लब के संस्थापक व पर्यावरणविद् अरविंद मिश्रा का कहना है कि होलिका दहन को लेकर लोगों की सोच बदली है। लोग अब पेड़ काटकर होलिका दहन नहीं कर रहे हैं। टूटे-फूटे फर्नीचर, घर में रखी सूखी लकड़ी, ताड़ व खजूर के सूखे पेड़ आदि का उपयोग होलिका दहन में कर रहे हैं। हरे-भरे पेड़ को ग्रामीण इलाकों में भी होलिका दहन को लेकर नहीं काटा जा रहा है।

 
होलिका दहन के लिए पेड़ काटे तो पकड़े जाएंगे

होलिका दहन के लिए अगर पेड़ काटे तो पकड़े जाएंगे। वन विभाग की टीम रविवार को पूरे दिन व रात पेट्रोलिंग करेगी। जिला वन पदाधिकारी भरत चिंतपल्लि ने कहा है कि वन विभाग की टीम पेड़ काटने से रोकने के लिए लगातार भ्रमणशील रहेगी। अलग-अलग क्षेत्रों में पेट्रोलिंग के लिए टीम का गठन किया गया है। वे खुद पेट्रोलिंग में रहेंगे।

 

हिरण्यकश्यपु की बहन थी होलिका

हिरण्यकश्यपु अपने पुत्र प्रहलाद की हरिभक्ति से बहुत अप्रसन्न था। उसने उसे भक्ति से विमुख करने का बहुत प्रयास किया। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका तो उसने होलिका का सहारा लिया। होलिका को वरदान स्वरूप ब्रह्माजी से एक चादर मिली थी, जिसे ओढ़कर वह किसी भी विपत्ति से बच सकती थी। इसलिए जलती हुई आग में प्रहलाद को गोदी में लेकर वह बैठ गई। उसी समय कुछ ऐसा हुआ कि प्रहलाद बच गया और होलिका का दहन हो गया। लोग जयजय कार करने लगे भक्त प्रहलाद की जय।  

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