Koshi Live-कोशी लाइव मधेपुरा: ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन ने सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले को दी शरद्धांजलि। - Koshi Live-कोशी लाइव

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Wednesday, March 10, 2021

मधेपुरा: ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन ने सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले को दी शरद्धांजलि।


MADHEPURA NEWS: ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन कार्यालय मधेपुरा में ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन के मधेपुरा जिला अध्यक्ष राहुल कुमार के अध्यक्षता में एक शृद्धाजंलि सभा आयोजित करके भारत के प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले को याद किया गया ।

यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ई० मुरारी ने कहा कि सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले (3 जनवरी 1831 – 10 मार्च 1897) भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवियत्री थीं। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्री अधिकारों एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। वे प्रथम महिला शिक्षिका थीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है। 1852 में उन्होंने बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की।
सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। महात्मा ज्योतिबा को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। ज्योतिराव, जो बाद में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। वे एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदिकवियत्री के रूप में भी जाना जाता था।
ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन के छात्र नेता ई० विकास विद्याकर उर्फ बिट्टू ने कहा कि सावित्रीबाई पूरे देश की महानायिका हैं। हर बिरादरी और धर्म के लिये उन्होंने काम किया। जब सावित्रीबाई कन्याओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में लोग उन पर गंदगी, कीचड़, गोबर, विष्ठा तक फेंका करते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साड़ी बदल लेती थीं। अपने पथ पर चलते रहने की प्रेरणा बहुत अच्छे से देती हैं।
छात्र नेता अजित कुमार ने कहा कि सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले जब वे स्कूल जाती थीं, तो विरोधी लोग उनपर पत्थर मारते थे। उन पर गंदगी फेंक देते थे। आज से 171 साल पहले बालिकाओं के लिये जब स्कूल खोलना पाप का काम माना जाता था तब ऐसा होता था।
कार्यक्रम में राजा कुमार, सन्नी कुमार, दर्शन कुमार, गोलू कुमारसोनू कुमार, बीरेंद्र कुमार, पंकज कुमार, आदि दर्जनों ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन के छात्र नेता मौजूद थे।।,

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