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Saturday, March 13, 2021

मधेपुरा:थानाध्यक्ष के कार्यशैली के खिलाफ गोलबंद हुए पत्रकार।

MADHEPURA NEWS:
थानाध्यक्ष के कार्यशैली के खिलाफ गोलबंद हुए पत्रकार।

उदाकिशुनगंज में पत्रकारों ने निकाला आक्रोश मार्च।

पत्रकार के घर बेवजह पुलिस छापेमारी करने का जताया विरोध

फोटो - udakishunganj arun 01
परिचय :- आक्रोश मार्च में शामिल पत्रकार

उदाकिशुनगंज

उदाकिशुनगंज के एक पत्रकार के घर मंगलवार की रात बेवजह पुलिस के छापेमारी करने से आक्रोश व्याप्त है। इससे नाराज पत्रकारों ने शनिवार को अनुमंडल मुख्यालय में आक्रोश मार्च निकाला। जिसमें अनुमंडल क्षेत्र के पत्रकारों ने भाग लिए। पत्रकारों ने आक्रोश जताते हुए थानाध्यक्ष शशि भूषण सिंह के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में चरणबद्ध तरीक़े से आंदोलन चलाने का निर्णय लिया। इससे पहले बुधवार को पत्रकारों ने पुलिस छापेमारी के विरोध में थाना गेट के सामने धरना दिया था। जहाँ एसडीएम राजीव रंजन कुमार सिन्हा और एसडीपीओ सतीश कुमार के पहल पर धरना समाप्त हुआ था। जहां अनुमंडल के वरीय अधिकारियों ने पत्रकारों को भरोसा दिलाया था कि अबके बाद पत्रकार के मामले में थानाध्यक्ष सीधी कार्रवाई नहीं करेंगे। वहीं जांच कर दो दिनों मेँ कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। अनुमंडल के वरीय अधिकारियों के कार्रवाई करने की दो दिन का तय समय बीत जाने के बाद शनिवार को पत्रकारों ने आक्रोश मार्च निकाला। पत्रकार भ्रष्ट थानेदार का निलंबन अथवा तबादले की मांग कर रहे हैं। पत्रकारों ने बताया कि थानाध्यक्ष पर कार्रवाई नहीं होने तक आंदोलन जारी रखेंगे। इस बीच एसडीपीओ सतीश कुमार ने 15 मार्च को पत्रकारों को अपनी बात रखने का समय तय किया है। पत्रकारों ने कहा कि 15 मार्च के बाद अगली रणनीति तय करेंगे। आक्रोश मार्च में पत्रकारों को जाप कार्यकर्ताओं का साथ मिला। जाप कार्यकर्ताओं ने भी थानाध्यक्ष के कार्यशैली का विरोध जताया है। जाप नेता दुर्गा यादव और नीतीश राणा ने कहा कि उदाकिशुनगंज के पत्रकार इन दिनों बेवजह पुलिस के निशाने पर हैं। पुलिस पत्रकारों पर कार्रवाई करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं। थानाध्यक्ष मौके की तलाश में रहते हैं कि कोई गड़बड़ी मिल जाए। ताकि तुरंत कार्रवाई कर बैठे। वजह कि थानाध्यक्ष शशिभूषण सिंह को उनके कार्यशैली के विरुद्ध खबर छपने की बात सहन नहीं हो पाता है। थानाध्यक्ष को लगता है कि विरुद्ध में खबर छपने पर वरीय अधिकारियों और समाज की नजर में किरकिरी होती हैं। इस बात को वह सहन नहीं कर पाते है। पत्रकारों को उलझाने का बस मौके की तलाश में रहते हैं। तभी तो पिछले दिनों पत्रकार अरूण कुशवाहा के मधुबन गांव स्थित घर पर पुलिस ने छापेमारी की। यह बात दिगर हैं कि छापेमारी में पुलिस को कुछ भी हाथ नहीं लगा। हलांकि छापेमारी की रात पत्रकार घर पर नहीं थे। छापेमारी मंगलवार की देर रात करीब 12 बजे की गई। वैसे पुलिस छापेमारी की बात से साफ इंकार करते है।

एसडीपीओ सतीश कुमार का कहना है कि थानाध्यक्ष हमें सूचना दी थी कि पत्रकार शराब पिए हुए हैं और उसके घर मे शराब है बरिय पदाधिकारी होने के नाते मुझे जानकारी देकर थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ छापेमारी में गए थे। पुलिस ने कोई अभद्रता नहीं की चौकीदार को भेजकर पत्रकार का खोज करवाया गया पर वह घर पर नहीं मिले तो पुलिस लौट कर चली आई। वहीं थानाध्यक्ष शशि भूषण सिंह का कहना है कि पत्रकार अरूण से मिलने के ख्याल से उनके घर पर गए थे। लेकिन सवाल उठता है कि पुलिस आधी रात को पत्रकार से मिलने उनके घर क्यों जाएंगे। कुछ तो बात है, जिसे पुलिस छिपा रही हैं। उल्लेखनीय हो कि पिछले साल खबर प्रकाशन करने के कारण तीन पत्रकारों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। जबकि पत्रकार के पास खबर छापने के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। प्राथमिकी दर्ज के बाद भी पुलिस के कार्यशैली के विरुद्ध पत्रकारों के कलम बंद नहीं हुए। लगातार खबर प्राकाशित होने से पुलिस को गुस्सा हुआ और पत्रकार पर कार्रवाई करने की सोच बैठे। पत्रकार अरूण कुशवाहा ने थानाध्यक्ष के कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर व्यक्तिगत रंजिश मिटाने थानाध्यक्ष शशिभूषण सिंह अपने गाङी मे शराब लेकर उनको झुठे मुकदमे मे फंसाकर जेल भेजने कि मंशा से उनके घर रित के बारह बजे गए थे। संयोग था कि वे घर पर नही मिले। उन्होंने कहा कि थानाध्यक्ष शशि भूषण सिंह के कार्यकाल में कई संगीन वारदात हुए। पुलिस अपराध और शराब कारोबार पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। उन्होंने थानाध्यक्ष पर शराब कारोबारी से मिले होने का आरोप लगाया। कहा कि शराब माफिया के खिलाफ खबर छापने पर ही तीन पत्रकारों पर प्राथमिकी दर्ज की गई। जबकि शराब कारोबारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। शराब कारोबारी पर कार्रवाई नहीं किए जाने की वजह से शराब माफिया के मनोबल बढें हैं। क्षेत्र में उत्पाद विभाग की टीम कार्रवाई करतीं है तो शराब पकराया जाता है। जबकि पुलिस को धंधेबाज नजर नहीं आता है। बुधवार को उत्पाद विभाग की टीम ने मुख्यालय के वार्ड सात और करौती में छापेमारी कर शराब और कारोबारी को पकड़ा। पर पुलिस के नाक के नीचे वर्षों से हो रहे कारोबार नजर नहीं आया। इतना ही नहीं थाना क्षेत्र में लगातार हो रहे अपराधिक घटनाओं पर विराम नहीं लग रहा है। चारों तरफ अशांति का वातावरण है। फिर भी पुलिस खुद की वाहवाही में लगे हुए हैं। जब गलत कारनामे की खबर छपती है तो थानाध्यक्ष को मिर्ची लगती हैं। पुलिस को चाहिए कि खबर गलत छपी है तो पत्रकार के खिलाफ सक्षम न्यायालय में मुकादमा दायर करें। उन्होंने वरीय पुलिस अधिकारी से थानाध्यक्ष के क्रियाकलाप की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। मौके पर नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सदस्य पत्रकार गौरव कबीर, रजनीकांत ठाकुर, धर्मेंद्र कुमार मिश्रा, अभिषेक आचार्य, इमदाद अली, राजीव रंजन गांधी, राहुल कुमार, प्रिंस कुमार मिठ्ठू, साजन कुमार, सीके झा, संजय कुमार,. गुलजार आलम, रमन रत्न, तरूण कुमार, मिरजान, सौरभ कुमार, अभिमन्यु कुमार, राहुल कुमार, जापान नेता दुर्गा यादव, नीतीश राणा, अधिवक्ता डा. धीरेंद्र यादव, सोनु कुमार, प्रेमजीत कुमार, आलोक यादव, समरदीप कुमार उर्फ सानू आदि मौजूद थे।

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