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Saturday, February 6, 2021

अभी अभी/बिहार DGP ने सरकार के आदेश को किया स्पष्ट, सिर्फ धरना-प्रदर्शन अपराध नहीं; ये करना पड़ेगा महंगा

Koshi Live DESK:
राज्य ब्यूरो, पटना: गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि सरकार की कभी भी व्यक्तिगत अभिव्यक्ति व लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन की मंशा नहीं रही है। ऐसा न हुआ है और ऐसा होगा भी नहीं। पटेल भवन स्थित पुलिस मुख्यालय में डीजीपी एसके सिंघल के साथ प्रेस वार्ता में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कहा कि लोकतंत्र में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों का बहुत महत्व है। सरकार और उनके अधिकारी इसके दायरे में रहकर ही काम करते हैं कि किसी के भी लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन न हो। संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है। शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और धरना-प्रदर्शन की भी स्वतंत्रता है। इसकी अनुमति सरकार देती है और नियम-कानून भी बनाए गए हैं।


पुलिस या कोर्ट से होती है पुष्टि, तो समस्या

डीजीपी एसके सिंघल ने पूर्व के आदेश को स्पष्ट तरीके से समझाते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन और जाम में शामिल होने पर ही किसी को नौकरी या ठीकेदारी से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदेश में इसका स्पष्ट उल्लेख है कि अगर कोई प्रदर्शन या जाम के नाम पर आपराधिक कृत्य करता है और कोर्ट या पुलिस की जांच में इसकी पुष्टि होती है, तभी पुलिस रिपोर्ट में इसका जिक्र किया जाना है।

एडीजी मुख्यालय जितेंद्र कुमार ने कहा कि यह कोई नया आदेश नहीं है। चरित्र प्रमाण पत्र की अनिवार्यता पहले से रही है। वर्ष 2006 में भी सामान्य प्रशासन विभाग ने इससे जुड़ा आदेश निकाला था। चरित्र प्रमाण पत्र को लेकर थानास्तर पर मनमानी न हो, इसलिए मॉनीटरिंग की भी व्यवस्था की गई है।

रूपेश हत्याकांड पर बोले, स्वजनों को करेंगे संतुष्ट

पत्रकारों के द्वारा रूपेश हत्याकांड में स्वजनों के असंतुष्ट होने के सवाल पर अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कहा कि पुलिस स्वजनों को संतुष्ट करेगी और अपराधी को कोर्ट में सजा भी दिलाएगी। सीबीआइ जांच की मांग पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई मांग सरकार तक नहीं आई है। यह बहुत प्री-मैच्योर प्रश्न है।

आते रहते हैं ऐसे अप्रत्याशित मामले

रूपेश हत्याकांड को लेकर डीजीपी ने पूर्व में पेशेवर अपराधी और पार्किंग विवाद का एंगल बताया था। जब प्रेस वार्ता में उनसे इस बाबत सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा कि हत्या के मामले में कई बिंदुओं पर पड़ताल होती है। उस समय जांच के बाद जो बिंदु सामने आए थे, उस समय वह बात कही गई। महज रोडरेज की घटना पर इतने दिनों बाद हत्या किए जाने के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि पुलिस की नौकरी में इस तरह के अप्रत्याशित मामले समय-समय पर आते रहे हैं।

समस्तीपुर के अपहृत की रिहाई को अरुणाचल के डीजीपी से बात

अरुणाचल प्रदेश के किप्पो आयल एंड गैस इंफ्रास्ट्रक्चर में काम करने वाले समस्तीपुर के रेडियो ऑपरेटर राम कुमार के उल्फा उग्रवादी संगठन द्वारा अपहरण किए जाने के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि इस मामले में गुरुवार को ही अरुणाचल प्रदेश के डीजीपी से विस्तृत बात हुई है। उनका अपहरण अरुणाचल में ही हुआ है। वहां की पुलिस ड्रोन कैमरे और हेलीकॉप्टर आदि की मदद से उनकी रिहाई का प्रयास कर रही है। आमिर सुबहानी ने कहा कि बिहार के उच्चाधिकारी इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं।

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