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Thursday, February 11, 2021

बिहारः चार बच्चों की मां ने झोले के बगल बैठ किया बड़ा जुर्म, भूख से तड़प रहे मासूम कैसे लेंगे जमानत


बक्सर: कानून बनते ही हैं लोगों की हिफाजत के लिए पर, कई दफा कानून के पालन में ऐसी विसंगतियां सामने आ जाती हैं जो अंतरात्मा तक झिंझोड़ देती हैं। ऐसा ही एक मामला मुफ्फसिल थाना में सामने आया है, जहां चार मासूम बच्चों की देखभाल करने वाली अकेली मां को पुलिस ने शराब के जुर्म में लॉकअप में बन्द कर दिया है। बुधवार शाम से ही पूरी तरह बेसहारा चारों मासूम बच्चे बगैर कुछ खाए पिए थाना के सामने बैठ बस सिर्फ मां को निहारे जा रहे हैं।

वाहन जांच के दौरान ऑटो से मिली थी शराब

घटना बुधवार शाम की है, तब इटाढ़ी गुमटी पोस्ट पर तैनात पुलिस शराब के लिए वाहनों की जांच करने में लगी थी।

तभी एक ऑटो से पुलिस कर्मियों को एक झोले में रखा 21 टेट्रा पैक शराब मिली। बस फिर क्या था, झोला के नजदीक बैठी महिला को पुलिस ने शराब के जुर्म में हिरासत में ले लिया। इस दौरान जरिगावां निवासी स्व. सरोज चौधरी की पत्नी संगीता देवी बार-बार पुलिस से गुहार लगाती रही कि झोला उसका नहीं है, बल्कि उसीके साथ बैठी दूसरी महिला का था जो पुलिस को जांच करते देख पहले ही ऑटो से उतरकर खिसक गई। पुलिस ने उसकी एक नहीं सुनी और महिला को थाना ले जाकर लॉकअप में बन्द कर दिया।

सूचना मिलते ही थाने पहुंच गए मासूम

इसकी जानकारी मिलते ही महिला के चार छोटे-छोटे मासूम बच्चे किसी तरह मां से मिलने चौसा स्थित मुफ्फसिल थाना पहुंच गए, पर, कानून के आगे विवश पुलिस ने उन मासूमों को मां से मिलने तक नहीं दिया। इसके बाद चारों मासूम बच्चे वहीं थाना के सामने ही बगैर कुछ खाए पिए सारी रात बैठे लॉकअप में बन्द मां को बस चुपचाप निहारते रहे, और बेसहारा बच्चों को इस ठंड में बाहर बैठे देख मां का दिल रोता रहा। महिला संगीता का कहना है कि डेढ़ साल पहले घर के एकमात्र कमाने वाले उसके पति की मौत हो गई थी। जीविका का कोई अन्य साधन नहीं होने और चार-चार बच्चों का पेट पालने के लिए किसी तरह कभी फसल की कटाई तो कभी दूसरों की मजदूरी कर पाल पोश रही थी। घटना के समय वह सब्जी लेने शहर आई थी और गांव जा रही थी। ऑटो में उसके साथ एक दूसरी महिला भी थी जो झोला लेकर बैठी थी। ऑटो रुकवा कर जैसे ही पुलिस ने जांच शुरू की, वह महिला धीरे से उतर गई। जिसके बाद वह लाख कहती रही पर झोले में शराब मिलते ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पुलिस तो निस्संदेह कानून का पालन कर रही है पर, कानून भी लोगों की सुरक्षा और सुविधा के लिए ही बनाए गए हैं।

आखिर क्या होगा मासूम बच्चों का?

सवाल गंभीर है कि चार-चार मासूम बच्चों की मां को जेल भेज देने के बाद आखिर उन मासूमों का क्या होगा जो अभी खुद के कपड़े भी बदलने लायक नहीं हैं, और कौन उनकी परवरिश करेगा। दूसरी और यदि किसी तरह इन बच्चों की जिंदगी बच भी जाती है तो मार्गदर्शन के आभाव में यह मासूम इसी उम्र से पेट पालने के लिए अपराध जगत में कदम रखने को विवश हो जाएंगे और आनेवाले कल में एक अपराधी बनकर उभरेंगे।

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