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Sunday, January 10, 2021

POLITICS:बिहार की राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप की एंट्री ! जानें- क्या है पूरा मामला?


सुशील मोदी ने कहा कि नया साल मनाकर बिहार लौटे राजद के राजकुमार को न जनादेश पर विश्वास है, न चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर. वे विपक्ष में बैठने को तैयार नहीं इसलिए बार-बार मध्यावधि चुनाव का हौव्वा खड़ा कर रहे हैं.

पटना: अमेरिकी संसद के बाहर गुरुवार को जो घटना हुई उसकी चर्चा विश्व भर में हो रही है. कथित तौर अमेरिका के पूर्व प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थकों द्वारा जिस प्रकार की हिंसा संसद के बाहर और अंदर की गई ऐसा अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था. अब अमेरिकी संसद के बाहर हुई घटना का बिहार में उदाहरण दिया जा रहा है.

शनिवार को राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने ट्वीट कर कहा कि राजद के राजकुमार का यदि वश चलता तो लाठी में तेल पिलाने वाले अपने समर्थकों को उकसा कर ट्रंप के समान विधानमंडल भवन पर उत्पात मचा सकते थे.


बेनामी सम्पत्तियां बनाने वालों के इरादों पर फिर गया पानी


उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के परिणाम को गलत ढंग से प्रभावित करने के लिए कांग्रेस-राजद ने मीडिया के एक वर्ग से एक्जिट पोल के नाम पर पहले महागठबंधन की जीत का परसेप्शन बनवाया. लेकिन जब वास्तविक परिणाम उनके मनोनुकूल नहीं आए और स्पष्ट बहुमत के साथ एनडीए की सरकार लौटी, तब सत्ता के जरिये बेनामी सम्पत्तियां बनाने वालों के इरादों पर पानी फिर गया.






समर्थकों को उकसा कर मचा सकते थे उत्पात


उन्होंने कहा कि मुख्य विपक्षी दल ने नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार लोकतंत्र में अपनी अनास्था ही प्रकट की थी. यदि उनका वश चलता, तो ईवीएम से "लालू का जिन्न" न निकलने पर वे लाठी में तेल पिलाने वाले अपने समर्थकों को उकसा कर ट्रम्प के समान विधानमंडल भवन पर उत्पात मचा सकते थे.


विपक्ष में बैठने को तैयार नहीं हैं तेजस्वी


सुशील मोदी ने कहा कि नया साल मनाकर बिहार लौटे राजद के राजकुमार को न जनादेश पर विश्वास है, न चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर. वे विपक्ष में बैठने को तैयार नहीं इसलिए बार-बार मध्यावधि चुनाव का हौव्वा खड़ा कर रहे हैं. वे अपने दुराग्रहपूर्ण अनुमान से ज्यादा सीट पाने वाले दल की उपलब्धि को " चुनाव आयोग की कृपा " बता कर एक संवैधानिक संस्था की छवि बिगाड़ रहे हैं.


अपना घर बचाने की करनी चाहिए चिंता


उन्होंने बता कि जब लालू प्रसाद विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में जोड़तोड़ नहीं करा पाए और नीतीश कुमार को पैकेज आफर देने की चाल भी विफल हो गई, तब पार्टी ने जदयू से दोस्ती की गुंजाइश खत्म करने का एलान ऐसे किया, मानो अंगूर खट्टे हैं. महागठबंधन को दूसरों को तोड़ने के बजाय अपना घर बचाने की चिंता करनी चाहिए.


तेजस्वी ने कही थी ये बात


गौरतलब है कि कई दिनों बाद शुक्रवार को बिहार लौटे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव फिर एक बार एक्टिव हो गए हैं. कल पटना लौटते ही उन्होंने बिहार की मौजूदा सियासी स्थिति पर कहा कि वे नीतीश कुमार को अपने साथ नहीं लेंगे. महागठबंधन मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार है.


तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में 16 साल से नीतीश कुमार की सरकार चल रही है. यह बिहार के लिए पूरी तरह से अभिशाप बन कर रह गयी है. छात्र, किसान, मजदूर, जिविका दीदी, सरकारी कर्मचारी सभी लोग नीतीश सरकार से त्रस्त हैं. उन्होंने कहा कि पूर्णिया में पूरे गांव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश कुमार मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं. यह सरकार सत्ता की लोभी है और सत्ता के लोभ में बिहार को बर्बाद कर दिया है.

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