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Wednesday, January 6, 2021

MADHEPURA/ब्रेथ एनलाइजर से शराब की पुष्टि; पीएचसी के डाॅक्टर ने बिना जांच नो अल्कोहलिक की दी रिपोर्ट, जिसपर थानाध्यक्ष ने संदिग्धों को छोड़ा



  • गम्हरिया थाने की पुलिस ने 30 दिसंबर की रात को शराब पीने के संदेह में तीन लोगों को पकड़ा था, पैसा लेकर छोड़ने की चर्चा
  • शराब का खेल कोई पास -कोई फेल ओडी ऑफिसर : शराब पीने वालों को पूर्व में मैनुअल जांच कराकर थानाध्यक्ष ने छोड़ा था, इसलिए गुपचुप किया तकनीकी जांच
  • थानाध्यक्ष : ब्रेथ एनलाइजर जांच रिपोर्ट की जानकारी मुझे नहीं थी, अस्पताल की रिपोर्ट के आधार पर छोड़ा गया

अक्सर बड़े राजनीतिज्ञ पुलिस पर आरोप लगाते हैं कि शराब पीए होने के बावजूद पैसे वाले थाने से छूट जाते हैं और गरीब को जेल भेजकर पुलिस अपने आंकड़े को दुरुस्त कर लेती है। ऐसी ही एक घटना जिले के गम्हरिया थाने में 30-31 दिसंबर को हुई। 30 दिसंबर की रात को पुलिस ने शराब पीए होने के संदेह में अशोक कुमार सिंह, अमरदीप सिंह और सोनू साह को पकड़ा। उन्हें गम्हरिया पीएचसी ले जाया गया। जहां इमरजेंसी में पुर्जा कटाकर तीनों को जांच के लिए डॉक्टर के पास ले जाया गया। डॉक्टर ने बिना कोई तकनीकी जांच के रिपोर्ट दे दिया कि वे लोग शराब नहीं पीए हैं। फिर उन तीनों को थाने लाया गया। वहां भी उनकी हरकत शराब पीए जैसी थी। बावजूद इस बात की चर्चा होने लगी कि अब तो अन्य शराबियों की तरह इन लोगों को भी रुपए लेकर छोड़ ही दिया जाएगा। इसके बाद उस रात ड्यूटी पर रहे ओडी ऑफिसर जयंत कुमार ने थाने में रखे ब्रेथ एनलाइजर मशीन से जांच की तो अशोक कुमार सिंह और अमरदीप सिंह के शराब पीने की पुष्टि हुई। बावजूद सुबह में पीआर बांड पर थानाध्यक्ष ने तीनों को छोड़ दिया। चर्चा है कि इसके एवज में 40 हजार रुपए लिए गए। थानाध्यक्ष ने जब तीनों को छोड़ दिया, तो ओडी ऑफिसर ने इसकी शिकायत सदर एसडीपीओ से कर दी गई। इसके बाद बात एसपी तक पहुंच गई। एसपी के आदेश से सदर इंस्पेक्टर ने मामले की जांच की।

थाने में बना मांस-भात कुत्ता को खिलाना पड़ गया
एसपी योगेंद्र कुमार से आदेश मिलने के बाद सदर इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार एक जनवरी की रात लगभग आठ बजे अचानक जांच करने गम्हरिया थाना पहुंच गए। उस दिन थाने में सभी स्टाफ के लिए मांस और चावल बना था। लेकिन तीन घंटे तक इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार के द्वारा थाने के सभी स्टाफ समेत पीआर बांड लिखने वाले एक चौकीदार के बेटे तक को घर से बुलवाकर पूछताछ की गई। पूछताछ के क्रम में ओडी ऑफिसर जयंत कुमार से ब्रेथ एनलाइजर मशीन की रिपोर्ट ली गई। उसके बाद कंप्यूटर से उसके मेमोरी को चेक किया गया। जांच को लेकर माहौल गमगीन होने के साथ-साथ तनावपूर्ण हो गया। किसी ने खाना नहीं खाया। बाद में कुत्तों को मांस-चावल खिला दिया गया।

हमारा क्या? सरकार की बदनामी हो रही है

Q: क्या मामला है सर? सुन रहे हैं शराब पीए लोगों को छोड़ दिया गया। पुलिस विभाग की तो बदनामी हो रही है?
जवाब: जयंत सिंह (ओडी पदाधिकारी) : हमारा क्या? सरकार की बदनामी हो रही है।

हम तो मामले को उजागर किए, सहयोग किए, अब लोग कहते हैं कि हम पर भी गाज गिरेगी।
Q: आप पर क्यों गाज गिरेगी? आप तो सही काम किए थे?
जवाब : असल में गम्हरिया पीएचसी के डाॅक्टर से मैनुअली जांच कराकर कई बार शराब पीए लोगों को पहले भी छोड़ दिया गया था। इस बार भी डॉक्टर ने नो अल्कोहल लिख दिया था। इस कारण से हमको शक हो गया था कि जो आदमी थाने पर गाली-गलौज कर रहा है। होश में रहता तो गाली देता क्या? उसकी रिपोर्ट नो अल्कोहल कैसे कर दिया। इसलिए हम थाने के ब्रेथ एनलाइजर मशीन से जांच कराए। पर्चा में 213 आया। बावजूद उसे थानाध्यक्ष मनोज बच्चन ने छोड़ दिया।
Q: अस्पताल में कैसे जांच की गई कि नो अल्कोहल कर दिया गया?
जवाब : वहां (गम्हरिया पीएचसी)खानापूर्ति की
जाती है। उसी आधार पर क ई बार शराब पीए हुए लोगों को छोड़ा गया।
Q: इंस्पेक्टर साहब की जांच में क्या हुआ?
जवाब : हां, आए थे। जांच किए थे। हमसे भी पूछताछ किए हैं। आगे का पता नहीं।

हम गलती नहीं किए हैं फिर भी अफसरों के आदेश का होगा पालन

Q: दो शराबी को छोड़ने वाले मामले में क्या हुआ है सर?
जवाब : हम पकड़ कर लाए थे। डॉक्टर ने उसे नो अल्कोहलिक रिपोर्ट दिया, तो पीआर बांड पर छोड़े थे।
Q: थाने के ब्रेथ एनलाइजर से तो शराब पीने की पुष्टि हुई थी।
जवाब : कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अभी इससे जांच करना मना है। यह उसको (जयंत कुमार) को पता होना चाहिए था। अगर उसने ऐसा किया भी तो हमको तो बताना चाहिए था। हमको इसकी सूचना नहीं दिया था। जब हम उसे छोड़ दिए तो उसने मामले को तूल दिया।
Q: इंस्पेक्टर की जांच का क्या हुआ?
जवाब : इंस्पेक्टर साहब रिपोर्ट कर दिए हैं। उससे (जयंत कुमार) भी पूछे थे कि क्या तुम ब्रेथ एनलाइजर से जांच किया था, तो उसने बताया नहीं। किसी ने इस बात की पुष्टि नहीं की। हम गलती नहीं किए हैं। फिर भी अधिकारी का जो आदेश होगा, उसका पालन होगा।

डाॅक्टर की मौखिक रिपोर्ट: हाव-भाव पूछताछ से शराब पीए जैसा नहीं लगा
30 दिसंबर की रात को पुलिस कुछ लोगों की जांच कराने आई थी। यहां जांच की कोई तकनीक नहीं है। संबंधित व्यक्ति के हाव-भाव और सामान्य पूछताछ में शराब पीए जैसा नहीं लगा। इसलिए नो अल्कोहलिक का रिपोर्ट दिए।
-डॉक्टर अन्नु आनंद, पीएचसी, गम्हरिया

इंस्पेक्टर कर रहे हैं मामले की जांच संबंधित पक्षों को किया शो-कॉज
शराब पीए हुए लोगों को गम्हरिया थानाध्यक्ष के द्वारा छोड़े जाने के मामले की जांच सदर इंस्पेक्टर ने की है। संबंधित पक्षों को शो-कॉज किया गया है। जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-योगेंद्र कुमार, एसपी, मधेपुरा


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