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Saturday, January 23, 2021

सहरसा:नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती भाजयुमो ने पराक्रम दिवस के रूप में मनाया


भारतीय जनता युवा मोर्चा सहरसा।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती भाजयुमो जिला जिलाध्यक्ष मनीष कुमार के निर्देश पर जिला मीडिया प्रभारी अमित आनंद के नेतृत्व और शक्ति गुप्ता के संचालन में शंकर चौक सहरसा पर श्रद्धाजंलि सभा आयोजित किया गया /
देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती से पहले सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. भारत सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन (23 जनवरी) को 'पराक्रम दिवस' के तौर पर मनाने का फैसला किया है. इस साल सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती वर्ष की शुरुआत 23 जनवरी को उनके जन्मदिन से होगी. भारत सरकार ने इसके लिए आज एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया है. 23 जनवरी को नेताजी की जयंती है.
इसमें कहा गया है कि नेताजी की अदम्य भावना और राष्ट्र के लिए उनके नि:स्वार्थ सेवा के सम्मान में और उनको याद रखने के लिए सरकार ने हर साल 23 जनवरी पर उनके जन्मदिन को "पराक्रम दिवस" के रूप में मनाने का फैसला किया है. इससे देश के लोगों, विशेषकर युवाओं को विपत्ति का सामना करने के लिए नेताजी के जीवन से प्रेरणा मिलेगी और उनमें देशभक्ति और साहस की भावना समाहित होगी.
भाजयुमो जिला मीडिया प्रभारी अमित आनंद ने कहा सुभाष चन्द्र बोसे के नारे तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। बिना जोश के आज तक कभी भी महान कार्य नहीं हुए। ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। आज हमारे अंदर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके। इन विचारों से पूरे देश को नई ऊर्जा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों में शुमार होते हैं जिनसे आज के दौर का युवा वर्ग प्रेरणा लेता है। उनके द्वारा दिया गया जय हिन्द का नारा पूरे देश का राष्ट्रीय नारा बन गया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपने विचारों से लाखों लोगों को प्रेरित किया।
भाजयुमो प्रवक्ता शक्ति गुप्ता ने कहा उन्होंने भारत के लिए पूर्ण स्वराज का सपना देखा। जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद वह भारत की आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। नेताजी का मानना था कि अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने के लिए सशक्त क्रांति की आवश्यकता है। आजाद हिंद फौज का गठन कर उन्होंने अंग्रेजी सेना को खुली चुनौती दी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने जापान के सहयोग से आजाद हिन्द फौज का गठन किया। उन्होंने आजाद हिंद फौज को संबोधित करते हुए दिल्ली चलो का नारा दिया।
सिंकू सिन्हा ने कहा गांधीजी को राष्ट्रपिता कहकर सुभाष चंद्र बोस ने ही संबोधित किया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में एक रेडियो संदेश प्रसारित करते हुए महात्मा गांधी को पहली बार 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित किया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पोर्ट ब्लेयर की सेल्युलर जेल में पहली बार तिरंगा फहराया था। नेताजी बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने आजादी की जंग में शामिल होने के लिए भारतीय सिविल सेवा की नौकरी ठुकरा दी।
कुश मोदी ने कहा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 125वें जयंती वर्ष के समारोहों के शुभारंभ के अवसर पर उनको सादर नमन. उनके अदम्य साहस और वीरता के सम्मान में पूरा राष्ट्र उनकी जयंती को "पराक्रम दिवस" के रूप में मना रहा है. नेताजी ने अपने अनगिनत अनुयायियों में राष्ट्रवाद की भावना का का संचार किया /
इस मौके पर कार्यकर्ताओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के चित्र का तिलक करके एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया।इस मोके पर भाजयुमो के सिंकू सिन्हा ,संतोष गुप्ता ,शक्ति गुप्ता ,अमित आनंद ,कुश मोदी ,विशाल कश्यप ,बजरंग तुलसियन, पिंटू यादव , आदि मोजूद रहे /

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