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Tuesday, January 12, 2021

मधेपुरा:विभिन्न प्रकार के मुद्दों के लेकर छात्र ABVP ने कुलपति महोदय व सिंडिकेट और सीनेट सदस्य को सौंपा ज्ञापन

मधेपुरा:विभिन्न प्रकार के मुद्दों के लेकर छात्र ABVP ने कुलपति महोदय व सिंडिकेट और सीनेट सदस्य को सौंपा ज्ञापन 
भूपेंद्र नारायण मण्डल विश्वविद्यालय मधेपुरा
विषय: पूर्व के सिंडिकेट द्वारा बी0 एड0 नियुक्ति घोटाला के जांच ,स्नातकोत्तर की लंबित परीक्षा परिणाम ,एवं अन्य शैक्षणिक मुद्दों को लेकर...

उपरोक्त विषय के संबंध में कहना है कि भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में पूर्व के दोनों सिंडिकेट के बैठकों में निर्णय होने के बावजूद भी विश्वविद्यालय अंतर्गत जिन भी महाविद्यालय में बीएड संकाय की पढ़ाई होती है वहां नियुक्ति घोटाले को लेकर किसी प्रकार का कोई जांच नहीं किया गया है ।जबकि उक्त प्रकरण में 2-2 कुलपतियों के द्वारा जांच कमेटी बनाकर उस हेतु आदेश भी जारी कर दिया गया है। बावजूद इसके आज तक यह जांच नहीं हो पाई है जिस कारण आज बीएड संकाय में बहुत सारे लोग फर्जी तरीके से नियुक्ति पाकर नौकरियां कर रहे हैं। साथ ही साथ रोस्टर सिस्टम का जम का उल्लंघन किया गया है इस जांच कमेटी में माननीय कुलपति महोदय सदस्य के रूप में है लेकिन जिन जिन विभाग अध्यक्षों को जांच प्रक्रिया को पूरी करने हेतु जिम्मेवारी दी गई थी उन सब ने विश्वविद्यालय के इस अधिसूचना का उल्लंघन किया है अतः उन सभी विभाग अध्यक्षों पर कृत कार्रवाई करते हुए इस जांच को अविलंब पूरी की जाए।
2. पूर्व के सिंडिकेट एवं सीनेट में सुपौल की बी एस एस कॉलेज में स्नातकोत्तर की पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू करने को लेकर निर्णय लिया जा चुका है तथा सरकार के पास भी इस प्रक्रिया को भेज दिया गया है ।बावजूद इसके इस पर आज तक कोई पहल नहीं की गई है ।अतः अविलंब स्नातकोत्तर की पढ़ाई सुचारू ढंग से शुरू हो इसके लिए ठोस निर्णय लिए जाएं।
3. स्नातकोत्तर के कुछ विषय जैसे भूगोल ,वाणिज्य ,होम साइंस ,जूलॉजी इन सब में कम सीट होने के करण बहुत सारे छात्र छात्राओं नामांकन से वंचित रह जाते हैं ।अतः इन विषयों में सीटों की संख्या बढ़ाई जाए।
4. विश्वविद्यालय केंद्र पर पूर्व में सिंडिकेट की बैठक में पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई शुरू करने को लेकर निर्णय लिया गया था जो अभी तक लंबित है ।अब तो उसे आगे बढ़ाते हुए पत्रकारिता एवं जनसंचार के साथ-साथ एमसीए वह LLM की पढ़ाई विश्वविद्यालय केंद्र पर अविलंब शुरू किए जाएं ताकि कोसी जैसे पिछड़े इलाके के छात्र छात्राओं को वोकेशनल कोर्सेज करने के लिए भटकना न पड़े।
5. स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर की एवं M.Ed के अंतिम सेमेस्टर के कई परीक्षा परिणाम अब तक लंबित है जिन्हें परीक्षा विभाग के द्वारा यह कह कर रोक दिया गया है कि इन सभी छात्र छात्राओं ने रेगुलेशन के खिलाफ जाकर परीक्षाएं दिया है ।ऐसे में परीक्षा विभाग की घोर लापरवाही सामने नजर आती है कि जब यह छात्र रेगुलेशन का उल्लंघन कर रहे थे तो इन्हें क्यों नहीं रोका गया? क्यों इन्हें परीक्षा में शामिल करने दिया गया? क्यों उनका नामांकन लेकर अगले सेमेस्टर में तक में भेजा गया ।अतः उक्त मामले में 70 बच्चे का भविष्य अधर में लटक गया है जिसका कोई ठोस पहल नहीं हो पाया है ।अतएव इसे यथाशीघ्र समाधान करते हुए उनका परीक्षा परिणाम जारी किया जाए।
6. राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वह सभी वर्गों के छात्राओं के लिए स्नातक में नामांकन के लिए निशुल्क प्रावधान है। इस संदर्भ में राज्य सरकार के द्वारा विश्वविद्यालय को पूर्व में ही निर्देशित किया जा चुका है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा घोर लापरवाही बरती जा रही है और 2015 से लेकर अब तक अनुसूचित जाति जनजाति छात्रों एवं सभी वर्ग की छात्राओं से स्नातक में नामांकन शुल्क लिया जाता है। अतः पुनः सभी महाविद्यालयों को निर्देशित करते हुए राज्य सरकार के द्वारा जारी किए गए निर्देशों का अनुपालन किया जाए।
7. टीपी कॉलेज मधेपुरा में बीएड संकाय के लिए भवन निर्माण कार्य में अराजकता और भ्रष्टाचार जमकर हो रहा है ।भवन निर्माण की प्रक्रिया को काफी लंबे समय तक जानबूझकर टाल दिया गया है और हर बार भवन हेतु जितनी राशि आवंटित की गई थी उसे बढ़ाया जा रहा है अब प्रश्न उठता है कि अगर इस प्रकार से राशि हमेशा बढ़ाये जाने के बावजूद भी भवन निर्माण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है ।सिर्फ राशि ही बढ़ा कर लूट खसौट किया जा रहा है अतएवअविलंब इस पर निर्णय लेते हुए एक जांच कमेटी बनाई जाए।
8. विश्वविद्यालय में छात्र छात्राओं के समस्याओं के लिए सिंगल विंडो प्रणाली के तहत एक कार्य प्रणाली खड़ी करने की नितांत आवश्यकता है जिससे आम छात्र छात्राओं एवं शिक्षक कर्मचारियों को विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों का चक्कर लगाना न पड़े।।

9.UMIS विवाद में विश्वविद्यालय के तरफ से उच्च न्यायालय में रखे गए पक्ष की समीक्षा की जानी चाहिए कि आखिर किस प्रकार बहस किया गया? ,या किस प्रकार तथ्य रखा गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन मुकदमा हार गई,,इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।
10.विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सभी महाविद्यालय में हर प्रकार के काम ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से शुरू किया जाय,,छात्र छात्राओं को परीक्षा फॉर्म भरने से लेकर परीक्षा परिणाम और नामांकन की प्रक्रिया भी ऑनलाइन किया जाय ताकि छात्र छात्राओं से काउंटर पर अवैध उगाही बन्द किये जा सके।।
11.विश्वविद्यालय में खेल कूद एवं कला की गतिविधि बढ़े इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन सभी महाविद्यालय में इसकी समीक्षा के लिए एक जांच कमिटी का गठन कर समय समय पर समीक्षा करते रहे।।ताकि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधि हमेशा चलते रहे।
अभाविप के प्रतिनिधि मंडल के द्वारा ज्ञापन देने के बाद कुलपति महोदय डॉ आरकेपी रमन सर का कहना है अभाविप का जो भी शैक्षणिक मांगे हैं वह सभी के सभी जायज है और इस पर जब तक सीनेट और सिंडिकेट में विचार-विमर्श करके निष्कर्ष नहीं होगी तब तक कुछ कहा नहीं जा सकता है !
जो होगा सकारात्मक होगा सबके लिए होगा ।
मौके पर उपस्थित प्रदेश सहमंत्री अभिषेक यादव ,जिला संयोजक अमोद आनंद , जिला संगठन मंत्री उपेंद्र कुमार,पूर्व विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष मनीष कुमार, नीतीश कुमार,

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