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Saturday, December 12, 2020

ब्रेकिंग न्यूज़/Ex. DGP गुप्‍तेश्‍वर पांडेय के करीबी RTI कार्यकर्ता ने फांसी लगा दी जान, नशा मुक्ति अभियान में बटोरी थी तारीफ


पटना/बक्सर। बक्‍सर (Buxar) जिले से एक बड़ी खबर आ रही है। जिले के एक आरटीआई कार्यकर्ता (RTI Activist) अमित राय (Amit Roy) ने शुक्रवार की रात फांसी लगाकर आत्‍महत्‍या (Sucide) कर ली। अमित का बिहार का पूर्व डीजीपी गुप्‍तेश्‍वर पांडेय (Ex DGP of Bihar Gupteshwar Pandey) से काफी नजदीकी संबंध था। गुप्‍तेश्‍वर पांडेय के शुरू किए गए नशा मुक्ति अभियान (Nasha Mukti Abhiyan) में अमित की काफी सक्रियता रही। यह दुखद घटना आरटीआई कार्यकर्ता के पैतृक गांव (Native Village) में हुई।

बेडशीट को फंदा बनाकर पंखे की कुंडी में लगाया

मिली जानकारी के मुताबिक बक्‍सर औद्योगिक थाना क्षेत्र (Buxar Industrial Police Station) के उमरपुर गांव (Umarpur Village) में बरमेश्वर राय (Barmeshwar Roy) के पुत्र अमित राय (26 वर्ष) ने शुक्रवार की देर रात अपनी जिंदगी खत्‍म कर ली।

बताया जा रहा है कि देर शाम करीब 9:00 बजे जब घर के सभी लोग भोजन आदि करने के लिए गए हुए थे, तभी अमित ने पंखे की कुंडी में बिस्तर की बेडशीट से फंदा लगाकर फांसी लगा ली। बाद में घरवाले जब भोजन आदि से निवृत होकर लौटे तो उन्होंने अमित को फंदे से झूलता पाया। आनन-फानन में उसे सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। वह पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के नशा मुक्ति अभियान के लीडर थे।

मानसिक तनाव के कारण लिया कड़ा फैसला

घटना की पुष्टि करते हुए अमित के चाचा तथा उमरपुर के मुखिया ललक राय (Mukhia Lalak Roy) ने बताया कि संभवतः मानसिक तनाव (Depression) के कारण अमित ने इस तरह का कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया है। हालांकि, घटना के कारणों के बारे में अभी स्पष्ट रूप से कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। घटना की सूचना मिलने के बाद औद्योगिक थाने की पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमाॅर्टम (Postmartem) के लिए भेज दिया है। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद आरटीआई कार्यकर्ता के घर उनके जानने वालों का तांता लगा हुआ है। हर कोई इस दुखद घटना को सुनकर हैरान है।

सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय थे अमित

अमित बक्‍सर जिले के लिए जाने-पहचाने थे। महज तीन दिन पहले ही उन्होंने पटना में होने की तस्वीर अपने फेसबुक पर साझा की है। तब वे बेहद खुश नजर आ रहे थे। अमित नशा मुक्ति अभियान में सक्रियता से भाग लेते थे, लेकिन पुलिस ने नशे में होने का दावा करते हुए खुद इन्हें ही दो बार गिरफ्तार किया था। हालांकि, अपनी गिरफ्तारी को उन्होंने जिले में शराब का धंधा करने वालों की साजिश बताया था। सोशल मीडिया पर इनके मोटिवेशनल मैसेज भरे पड़े हैं। अपने संदेशों से दूसरों को प्रेरित करने वाले अमित के साथ ऐसा क्या हुआ और अचानक क्यों वह अवसाद में चले गए, यह भी जांच का विषय है।

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