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Tuesday, December 8, 2020

बड़ी खबर/बिहार:ग्रामीण कार्य विभाग की कार्रवाई, ऑनलाइन जानकारी नहीं देने वाले डेढ़ हजार ठेकेदार सस्पेंड


सरकारी सिस्टम में ऑनलाइन नहीं होने वाले लगभग डेढ़ हजार ठेकेदार को निलंबित कर दिया गया है। वे फिलहाल सरकारी योजनाओं में भाग नहीं ले सकेंगे। ठेकेदारों पर यह कार्रवाई ग्रामीण कार्य विभाग ने की है।

बिहार ठेकेदार नियमावली के तहत ग्रामीण कार्य विभाग ने ठेकेदारों को पूरी जानकारी ऑनलाइन देने को कहा था। खासकर वैसे ठेकेदार जिन्होंने 12 जून 2018 के पहले अपना निबंधन कराया था, उन्हें अनिवार्य तौर पर ऑनलाइन अपनी जानकारी देनी थी। ठेकेदारों को पिछले साल 15 मार्च 2019 को ही यह काम कर लेना था। लेकिन उनकी सुस्ती के बाद विभाग ने कई और मौके दिए। तिथि बढ़ाते हुए पहले 31 मई 2019 किया गया। इसके बाद 30 जून, 31 जुलाई, 31 अगस्त, 30 सितम्बर, 31 अक्टूबर और फिर अंतिम तिथि 10 नवम्बर 2019 की गई। अंतिम तिथि तक विभाग से जुड़े 2250 ठेकेदारों ने ऑनलाइन जानकारी नहीं दी थी। 28 नवम्बर 2019 को जारी आदेश में विभाग ने सभी 2250 ठेकेदारों को निलंबित कर दिया।

इसी क्रम में 788 ठेकेदारों ने अपनी पूरी जानकारी ऑनलाइन दे दी। इतनी संख्या में ठेकेदारों के ऑनलाइन आने के बाद इनका निलंबन रद्द कर दिया गया। बीते 26 नवम्बर 2020 को जारी आदेश में विभाग ने 788 संवेदकों को बहाल कर दिया लेकिन 1462 ठेकेदारों को निलंबन का आदेश बहाल रखा। विभाग के अभियंता प्रमुख प्रवीण कुमार ठाकुर की ओर से जारी आदेश में साफ किया गया है कि जो ठेकेदार ऑनलाइन प्रणाली में शिफ्ट कर चुके हैं, उनका ही निलंबन रद्द किया गया है। जिनका निलंबन रद्द हुआ है, उसकी सूची सार्वजनिक कर दी गई है। बाकी अभी भी निलंबित ही रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार ऑनलाइन प्रणाली का मकसद यह है कि विभाग में काम करने वाले ठेकेदारों की पूरी जानकारी ऑनलाइन रहे।

मसलन, उनका रजिस्ट्रेशन कब का है और वे अभी विभाग की किन-किन योजनाओं पर काम कर रहे हैं। जिन योजनाओं का वे काम कर रहे हैं, उसकी प्रगति क्या है। अगर विभाग की ओर से कभी काली सूची में डाले गए हैं या जुर्माना लगाया गया है, तो ऑनलाइन वह भी जानकारी देनी है। विभाग की मंशा है कि ऑनलाइन प्रणाली में एजेंसियों के बीच पारदर्शिता कायम रखी जा सके, ताकि विभागीय कार्य भी सुचारू व गुणवत्तापूर्ण हो सके।

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