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Saturday, December 5, 2020

BIHAR:कुर्सी पर तेजस्वी और जमीन पर जगदानंद सिंह, JDU ने उठाया 'औकात' व 'मंशा' पर सवाल! कही यह बात


पटना. किसान आंदोलन (Kisaan Andolan) के समर्थन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) की अगुवाई में पटना के गांधी मैदान के बाहर महागठबंधन (Mahagathbandhan) के धरने के दौरान कांग्रेस, राजद व वाम दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं का भारी जमावड़ा रहा. इसी बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिस पर सियासी बवाल मच गया. दरअसल इसमें तेजस्वी यादव भारी भीड़ के बीच कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं और वहीं आस-पास बड़ी संख्या में नेता जमीन पर बैठे हुए हैं. इन्हीं नेताओं में राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) भी मौजूद हैं. 74 वर्षीय वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह के तेजस्वी यादव की कुर्सी के पीछे जमीन पर बैठने की इसी तस्वीर के सामने आने के बाद जदयू ने नेता प्रतिपक्ष के संस्कार और मंशा पर सवाल उठा दिए हैं.
जदयू नेता व विधान पार्षद नीरज कुमार (Neeraj Kumar) ने तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा, तेजस्वी यादव बताएंगे कि पितातुल्य जगदा बाबू को अपने कदमों के नीचे बैठा कर उन्हें क्यों औकात बता रहे हैं. जगदाबाबू तो प्रतीक हैं, आपकी मंशा तो सामाजिक समूह के सीने को रौंदना है. जवाब दीजिए जंगलराज के युवराज आपकी मंशा पूरी हुई.



बता दें कि किसान आंदोलन के समर्थन के लिए तेजश्वी यादव (Tejaswi Yadav) के पटना के गांधी मैदान (Patna Gandhi Maidan) में होने वाले धरने पर रोक लगा दी गई है. प्रशासन द्वारा साफ तौर पर कह दिया गया है कि गांधी मैदान धरनास्थल नहीं है, इसलिए यह कार्रवाई की गई है. हालांकि रोक के बावजूद बाहर ही चार नंबर गेट पर राजद, कांग्रेस व वाम दलों के कई नेता धरने पर बैठ गए हैं.इस बीच तेजस्वी यादव ने भी वहां जाने का ऐलान कर करते हुए सीधे सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को चुनौती दे दी. अपने फेसबुक पर उन्होंने लिखा, गोडसे को पूजने वाले लोग पटना पधारे हैं. उनके स्वागत में अनुकंपाई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान में गांधी मूर्ति को कैद कर लिया ताकि गांधी को मानने वाले लोग किसानों के समर्थन में गांधीजी के समक्ष संकल्प ना ले सकें. नीतीश जी वहां पहुंच रहा हूं, रोक सको तो रोक लीजिए.

तेजस्वी अपने इस एलान के बाद खुद वहां पहुंच गए और गांधी मैदान के बाहर ही धरने पर बैठ गए. लेकिन सियासत तो सियासत है, सो एक तरफ जहां तेजस्वी ने गांधी के बहाने राजनीति शुरू की तो जदयू ने भी संस्कार और उनकी मानसिकता पर सवाल खड़े कर दिए. बहरहाल देखना दिलचस्प होगा कि इस सियासी तू तू मैं मैं के बीच किसान आंदोलन को लेकर क्या नतीजा निकलता है.

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