बिहार/अररिया:जिला अस्पताल को कोविड 19 के चिकित्सीय प्रबंधन के लिए मिलेंगे चार वेंटिलेटर मशीन - कोशी लाइव

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Monday, July 27, 2020

बिहार/अररिया:जिला अस्पताल को कोविड 19 के चिकित्सीय प्रबंधन के लिए मिलेंगे चार वेंटिलेटर मशीन



- बीएमएसआईसीएल के माध्यम से उपलब्ध कराया जायेगा वेंटिलेटर मशीन 
- राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जारी किया है निर्देश 

अररिया /27 जुलाई : 

कोविड-19 की रोकथाम को लेकर सरकार गंभीर है. लोगों को अस्पताल में बेहतर से बेहतर सुविधा मिले, इसको लेकर नई-नई योजना बना रही है. इसी कड़ी में कोराना संक्रमण में हो रही बेहताशा वृद्धि के कारण मरीजों को सहायता मुहैया कराने के मद्देनजर राज्य के सभी अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेज में प्रर्याप्त वेंटीलेटर लगाने का निर्णय लिया गया है. इससे कोरोना मरीजों को अस्पताल में इलाज के दौरान परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने इसको लेकर पत्र जारी किया है एवं इसे सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी बीएमएसआईसीएल के निदेशक को सौंपी है. पत्र के मुताबिक भारत सरकार से प्राप्त 264 वेंटिलेटर्स को आवश्यकता अनुसार राज्य के सभी अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेज में वितरण कराने को कहा गया है. इनमें जिला को 4 वेंटीलेटेर मशीनों की आपूर्ति करना है.

वेंटिलेटर साँस संबंधित मरीजों के लिए बेहद जरूरी है. इसके सहारे गंभीर से गंभीर साँस से संबंधित मरीजों को बचाया जा सकता है. इस संबंध में बीएमएसआईसीएल से जल्द समन्वय स्थापित कर जिला अस्पताल में वेंटिलेटर मशीनों को लगाये जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जायेगी. कोरोना के संक्रमितों के लिए यह काफी उपयोगी सिद्ध हो सकेगा. 

वेंटिलेटर है क्या:

बहुत सरल भाषा में कहें तो यह एक मशीन है जो ऐसे मरीजों की जिंदगी बचाती है जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है या खुद सांस नहीं ले पा रहे हैं. यदि बीमारी की वजह से फेफड़े अपना काम नहीं कर पाते हैं तो वेंटिलेटर सांस लेने की प्रक्रिया को संभालते हैं. इस बीच डॉक्टर इलाज के जरिए फेफड़ों को दोबारा काम करने लायक बनाते हैं.

कितने तरह के होते हैं वेंटिलेटर:

वेंटिलेटर मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं. पहला मेकेनिकल वेंटिलेशन और दूसरा नॉन इनवेसिव वेंटिलेशन. मेकेनिकल वेंटिलेटर के ट्यूब को मरीज के सांस नली से जोड़ दिया जाता है, जो फेफड़े तक ऑक्सीजन ले जाता है. वेंटिलेटर मरीज के शरीर से कार्बन डाइ ऑक्साइड को बाहर खींचता है और ऑक्सीजन को अंदर भेजता है. दूसरे प्रकार के वेंटिलेटर को सांस नली से नहीं जोड़ा जाता है, बल्कि मुंह और नाक को कवर करते हुए एक मास्क लागाया जाता है जिसके जरिए इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है. 

कोरोना मरीजों के लिए क्यों जरूरी है वेंटिलेटर:

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक,कोविड-19 से संक्रमित 80% मरीज अस्पताल गए बिना ठीक हो जाते हैं. लेकिन छह में से एक मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है और उसे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है. ऐसे मरीजों में वायरस फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है. फेफड़ों में पानी भर जाता है, जिससे सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है. शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है. इसलिए वेंटिलेटर्स की आवश्यकता होती है. इसके जरिए मरीज के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को समान्य बनाया जाता है.

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