बिहार के तीन युवाओं ने कर दिखाया कमाल, चीनी एप UC ब्राउज़र को टक्कर देने के लिए बनाया खुद का 'मैगटैप' एप - कोशी लाइव

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Tuesday, June 23, 2020

बिहार के तीन युवाओं ने कर दिखाया कमाल, चीनी एप UC ब्राउज़र को टक्कर देने के लिए बनाया खुद का 'मैगटैप' एप


भारत और चीन के बीच अब हर मामले में झड़प हो रही है. चाहे वो बॉर्डर पर जवान हो या चीनी एप्स. भारतीय यूजर्स हर जगह चीनी चीजों का बहिष्कार कर रहे हैं. पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन और भारत की सेना के आमने-सामने के संघर्ष में भारतीय सेना के एक अधिकारी समेत 20 सैनिकों की मौत हो गई थी जिसके बाद पूरे देश में चीन के खिलाफ गुस्से का माहौल है. ऐसे में बिहार के तीन युवाओं ने अपनी मेहनत से कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसे देख अब सभी भारतीय इन युवाओं को सलाम कर रहे हैं.


क्या है मैगटैप?


दरअसल बिहार के तीन युवाओं ने 'मैगटैप' (MagTapp) नामक वेब ब्राउज़र बनाया है जो चीनी एप यूसी ब्राउजर को सीधे टक्कर देगा. ये ब्राउज़र कई मायनों में चीनी एप से बेहतर साबित हो रहा है.

इस ब्राइज़र की सबसे खास बात इसका विजुअल डिक्शनरी फीचर है जिसकी मदद से आप किसी भी शब्द का अर्थ चित्र के साथ अपनी भाषा में देख सकते हैं.


बता दें कि इस एप को जैसे ही गूगल प्ले स्टोर पर लॉन्च किया गया तो तब से लेकर अब तक इसे 8 लाख लोगों ने डाउनलोड किया है. इस एप की रेटिंग स्टोर पर 4.5 है और इससे अब तक 10 लाख यूजर्स जुड़ चुके हैं.


कैसे किया बिहार के तीनों युवाओं ने कमाल


एप से जुड़े सत्यपाल चंद्रा ने बताया है कि ये पूरी तरह मेड इन इंडिया है तो वहीं इसमें आपको विजुअल ब्राउज़र से लेकर डॉक्यूमेंट रीडर, ट्रांसलेशन और ई लर्निंग जैसे तमाम फीचर्स मिलते हैं. इस एप को हिंदीभाषी छात्रों के लिए बनाया गया है. जो भी कुछ इंग्लिश में होता है आप इस एप की मदद से उसे हिंदी में कर पढ़ सकते हैं. इस एप को सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले बच्चे खासतौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं जहां उन्हें उनके परीक्षा से जुड़ी कई अहम जानकारी प्राप्त हो सकती है.


मैगटैप को डेवलप करने वाले रोहन कुमार फिलहाल 19 साल के हैं और 12वीं की पढ़ाई के बाद सत्यापल से मिलें जहां दोनों ने मिलकर एप को डेवलप किया. रोहन ने बताया है कि, हमने एप को अपडेट कर दिया है जहां यूजर्स को नए फीचर्स मिलेंगे. उन्होंने बताया कि उन्हें पूरा भरोसा है कि ये एप चीनी ब्राउज़र यानी की यूसी और गूगल क्रोम, ओपेरा सबसे बेहतर साबित होगा. भारत के 12 भाषाओं के साथ इसमें आप 29 विदेशी भाषाओं का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. मैगटैप' को रोहन ने डिजाईन किया है और इसके टेक्निकल पक्षों को संभालने में उनके 18 वर्षीय भाई अभिषेक सिंह मदद करते हैं.


एप की फाउंडर्स की अगर बात करें तो सत्यपाल चंद्रा, रोहन सिंह और अभिषेक बिहार के गया और समस्तीपुर के रहने वाले हैं. बता दें कि सत्यपाल नक्सल प्रभावित इलाके से आते हैं. शुरू में गरीबी के कारण उन्हें दिल्ली जाना पड़ा. जहां इंग्लिश न आने के कारण उनकी लड़ाई वेटर से हो गई. इसके बाद सत्यपाल ने 6 महीनें खूब मेहनत की और अंत में अंग्रेजी में उपन्यास ही लिख डाला. उन्होंने मोस्ट इलिजिबल बैचलर' और 'व्हेन हेवेन्स फॉल डाउन' जैसी किताबें भी लिखी हैं.

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