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Sunday, May 17, 2020

Lockdown 4.0: सुशील मोदी बोले- अभी 'लॉकडाउन' हटाने के पक्ष में नहीं बिहार सरकार

हाइलाइट्स:

  • सुशील मोदी ने कहा- हम 30 मई तक रियायतों के साथ लॉकडाउन जारी रखने के पक्ष में
  • केंद्र का जो फैसला होगा, उसी के तहत उठाएंगे कदम: सुशील मोदी
  • सुशील मोदी बोले- प्रवासी श्रमिक कानून की समीक्षा करने की जरूरत
  • 'कानून सही तरीके से काम करता तो प्रवासी मजदूरों को लेकर इतनी समस्या नहीं होती'
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नई दिल्ली
बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी (Sushil Kumar Modi) ने कहा है कि कोरोना संकट (Covid-19 cases in Bihar) को देखते हुए सरकार फिलहाल कम-से-कम 30 मई तक रियायतों के साथ 'लॉकडाउन' (Lockdown 4.0) जारी रखने के पक्ष में हैं। उन्होंने ये भी कहा कि प्रवासी श्रमिक कानून की समीक्षा करने की भी जरूरत है। सुशील मोदी ने कहा कि हम राज्य में ट्रेनों को भी अभी चलाने की अनुमति देने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, इस बारे में जो भी केंद्र का फैसला होगा, बिहार सरकार उसका पालन करेगी।

'प्रवासी श्रमिक कानून की समीक्षा की जरूरत'
सुशील मोदी ने प्रवासी मजदूरों की मजदूरी, कल्याण, बेहतर रहन-सहन और दूसरी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, '1978 के अंतरराज्यीय-प्रवासी श्रमिक (रोजगार नियमन और सेवा शर्त) कानून की तुरंत समीक्षा होनी चाहिए और इसे प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है। अगर कानून सही तरीके से काम करता तो प्रवासी मजदूरों को लेकर इतनी समस्या नहीं होती।' सुशील मोदी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार उद्योग जगत समेत अलग-अलग विभागों के साथ मिलकर प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है।

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30 मई तक 'लॉकडाउन' जारी रखने के पक्ष में: सुशील मोदी
लॉकडाउन के बारे में पूछे जाने पर डिप्टी सीएम ने कहा, 'इस बारे में हमने केंद्र को प्रस्ताव भेज दिया है। केंद्र का जो फैसला होगा, उसके हिसाब से कदम उठाया जाएगा। लेकिन हम लोग अभी छूट के साथ कम-से-कम 30 मई तक 'लॉकडाउन' जारी रखने के पक्ष में हैं। हम राज्य में ट्रेनों को भी फिलहाल अनुमति देने के पक्ष में नहीं हैं।' कोरोना संकट और 'लॉकडाउन' के अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव के बारे में उन्होंने कहा, 'राज्य के अपने राजस्व संग्रह पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इस साल यह अप्रैल में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 84 फीसदी कम रहा है। बंद के मोर्चे पर मई में कुछ ढील और आने वाले समय में रियायतें बढ़ने के बावजूद चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीने अप्रैल-जून में राजस्व संग्रह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 25 फीसदी के करीब रहने की आशंका है।'

'करीब 5,000 करोड़ रुपये का खर्च होने का अनुमान'
सुशील मोदी ने कहा, 'दूसरी तरफ कोरोना संकट के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय के अलावा इसकी रोकथाम के उपायों और गरीबों को राहत देने में करीब 5,000 करोड़ रुपये का खर्च होने का अनुमान है।' उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने लगभग 1.68 करोड़ राशनकार्ड धारकों के साथ दूसरे राज्यों में फंसे करीब 20 लाख प्रवासी मजदूरों को 1,000-1,000 रुपये दिया है। साथ ही विधवा, दिव्यांगों और बुजुर्गों को तीन महीने की पेंशन अग्रिम दी गई है। इसके अलावा क्वारंटीन सेंटर में रहने वालों को 1,000 रुपये नकद और जरूरी सामान के साथ मेडिकलकर्मियों को एक महीने का वेतन प्रोत्साहन स्वरूप दिया जा रहा है।


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आर्थिक समस्या से निपटने को लेकर ये बोले डिप्टी सीएम
आर्थिक समस्या से निपटने के उपायों के बारे में पूछे जाने पर सुशील मोदी ने कहा, 'बिहार समेत सभी राज्यों ने केंद्र से एफआरबीएम कानून के तहत कर्ज सीमा मौजूदा 3 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी (राज्य जीडीपी का) करने का आग्रह किया है। इस बारे में केंद्र की तरफ से जल्दी फैसला किए जाने की उम्मीद है।' एफआरबीएम कानून के तहत राज्यों को अपना राजकोषीय घाटा राज्य जीडीपी का 3 फीसदी के दायरे में रखने की जरूरत है। बिहार के वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में राज्य का जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 6,85,797 करोड़ रुपये अनुमानित है। इस लिहाज से कर्ज लेने में 2 फीसदी की छूट से राज्य को लगभग 13,500 करोड़ रुपये मिल सकता है।

'कोरोना मरीजों के ठीक होने की दर 40 फीसदी से ऊपर'
प्रवासी मजदूरों को राज्य में आने की अनुमति के साथ कोरोना वायरस संक्रमित मामलों की बढ़ती संख्या के बारे में पूछे जाने पर सुशील मोदी ने कहा, 'यह सही है। फिलहाल जो भी 'एक्टिव' मामले हैं, उनमें बड़ी संख्या प्रवासी मजदूरों की है। यह कोई अप्रत्याशित नहीं है। यह बढ़ेगा लेकिन अच्छी बात यह है कि ठीक होने की दर 40 फीसदी से ऊपर है। मृत्यु दर बहुत कम है। यहां के लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत है।'

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