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Wednesday, May 13, 2020

BNMU में गड़बड़ घोटाला:पिता-पुत्र, पति-पत्नी, चाचा भतीजा, साला बहनोई और तीन सगे भाइयों को एक साथ विवि ने बांटा नियुक्ति पत्र

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मधेपुरा। 10 जनवरी, 1992 को स्थापित भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय लगातार किसी न किसी विवादों से घिरा रहा है। ताजा विवाद 66 की जगह 86 लोगों की नियुक्ति से जुड़ा है। नियुक्ति में यहां केवल पांच परिवार के 15 लोगों को एक साथ थोक भाव में बहाल करने का मामला सामने आया है। बहाली में गड़बड़ी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विवि ने एक ही दिन पिता-पुत्र के साथ पति-पत्नी, चाचा भतीजा, साला बहनोई और तीन सगे भाइयों को एक साथ नियुक्त पत्र बांटा। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब शिक्षा विभाग, बिहार सरकार ने बीएनएमयू में नियुक्ति मामले की जांच शुरू की। मामले में उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक ने बीएनएमयू के कुलसचिव से जवाब-तलब किया है। साथ ही विवि को निर्देशित किया है कि सात दिनों के अंदर बिदुवार ससाक्ष्य प्रतिवेदन समर्पित करें। मामले में अपनी गर्दन फंसता देख विवि प्रशासन भी हरकत में आ गया है। विवि प्रशासन अग्रतर कार्रवाई करते हुए 86 कर्मियों की बहाली के सत्यापन करने में जुट गया है।

इस संबंध में कुलपति डॉ. अवध किशोर राय के निर्देश पर छह सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी के संयोजक विवि के वित्तीय सलाहकार सुरेश चंद्र दास बनाए गए हैं। साथ ही कमेटी में कुलसचिव डॉ. कपिलदेव प्रसाद, सीसीडीसी, बीएओ डॉ. एमएस पाठक के अलावा सामान्य शाखा और विधि शाखा के प्रशाखा पदाधिकारी शामिल हैं।

- उपनिदेशक ने कुलसचिव से मांगा ससाक्ष्य जवाब उच्च शिक्षा विभाग बिहार सरकार के उपनिदेशक ने विवि के कुलसचिव को पत्र भेज कर कहा है कि विभाग को प्राप्त परिवादवाद में वहां 66 की जगह 86 लोगों की नियुक्ति में अनियमितता बरतने का आरोप लगा है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इसकी विभागीय जांच के लिए जांच कमेटी का गठन किया गया है। साथ ही जांच होने तक कर्मियों के वेतन को स्थगित करने का निर्देश दिया गया है। जांच कमेटी को यथाशीघ्र रिपोर्ट समर्पित करना है। परिवादवाद में संलग्न कागजातों में उल्लेखित आरोपों की बिदुबार जवाब देने का निर्देश कुलसचिव को दिया गया है। अब सरकार का शिकंजा कसता देख विवि ने मामले की जांच होने तक 86 कर्मियों के मार्च और अप्रैल माह का वेतन रोक दिया है।

- 86 में 42 कर्मियों की नियुक्ति के वैधानिकता का प्रमाण नहीं 86 कर्मियों की नियुक्ति के मामले में विवि प्रशासन ने अब तक सरकार को संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। इससे पहले सरकार के उप सचिव ने पत्र के माध्यम से कहा है कि राजेश्वर राय बनाम बिहार सरकार व अन्य के मामले में पारित न्यायदेश के आलोक में 68 पदों के विरूद्ध 44 कर्मियों की नियुक्ति की सहमति सशर्त दी जाती है। किसी शर्त का पालन नहीं होने पर वह वैधानिक नहीं माना जाएगा। साथ ही कहा गया कि इसमें 42 कर्मियों की नियुक्ति का वैधानिकता का प्रमाण नहीं है। इसके अलावा उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि बीएनएमयू में थर्ड ग्रेड व फोर्थ ग्रेफ कर्मियों के साथ पदाधिकारियों के 68 पदों पर विज्ञापन प्रकाशित की गई तो क्या केवल थर्ड ग्रेड व फोर्थ ग्रेड कर्मियों की नियुक्ति कर दी गई है। इन सवालों का जवाब विवि को देना है।

- 2015 में 66 पदों के लिए निकाला गया था विज्ञापन बीएनएमयू प्रशासन ने वर्ष 2015 में विज्ञापन में 68 पदों पर बहाली निकाली थी। यह विज्ञापन सरकार के संयुक्त सचिव शिक्षा विभाग के ने दो दिसंबर 2014 के आलोक में व उच्च न्यायालय पटना द्वारा तीन जुलाई 2014 की पारित आदेश के तहत विवि ने निकाली थी। इसमें भूपेंद्र नारायण मंडल विवि मुख्यालय के लिए राज्य सरकार के पदाधिकारी के उपकुलसचिव सहायक कुलसचिव, सहायक वित्त पदाधिकारी, पुस्तकाल अध्यक्ष और अन्य कर्मी प्रशाखा पदाधिकारी, उच्च वर्गीय लिपिक, निम्न वर्गीय लिपिक, आशुलिपिक, सहायक, पुस्तकाध्यक्ष, उपपुस्तकालय अध्यक्ष, कैटलगर, क्लासीफाइयर, पुस्तकालय लिपिक, कंप्यूटर तकनीशीयन, प्रोग्रामर, कंप्यूटर ऑपरेटर, ऑडिटर ग्रेड एवं ऑडिटर के विभिन्न पदों के स्वीकृत किए गए पद के विरुद्ध कुल 68 पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन पत्र दिनांक 24 जुलाई 2015 तक आमंत्रित किए गए थे। इसके आलोक में करीब आठ हजार आवेदकों द्वारा आवेदन किया गया था। कोट उच्च शिक्षा विभाग के पत्र के आलोक में कमेटी का गठन किया गया है। विभागीय पत्र के साथ संलग्न आरोप पत्र में इस बात का उल्लेख है कि विवि में पिता-पुत्र, पति-पत्नी, साला- बहनोई और तीन सगे भाइयों की नियुक्ति एक साथ की गई है। बिदुबार आरोपों का सत्यापन कर कमेटी दो दिनों के भीतर प्रतिवेदन विभाग को समर्पित कर देगी। तत्काल 86 कर्मियों के वेतन को रोक दिया गया है। -डॉ. कपिलदेव प्रसाद, कुलसचिव

बीएनएमयू, मधेपुरा

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