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Thursday, 16 January 2020

सहरसा।जिन्हें बचाने में उत्पाद निरीक्षक गये जेल, बन सकते हैं आरोपित

कोशी लाइव_नई सोच नई खबर।

सहरसा। जिन शराब तस्करों को बचाने में उत्पाद निरीक्षक को जेल जाना पड़ा अब वो भी लपेटे में आ सकते हैं। पुलिस ने मामले का अनुसंधान शुरू कर दिया है और उन्हें आरोपित बनाया जा सकता है।
शराब तस्करों से मिलीभगत को लेकर जांच के बाद आइजी उत्पाद के निर्देश पर सदर थाना में उत्पाद अधीक्षक जमाल अशरफ, उत्पाद निरीक्षक फैयाज आलम, एसएसआई पर नामजद प्राथमिकी सदर थानाध्यक्ष के बयान पर दर्ज कराई गई है। इस मामले में जहां उत्पाद अधीक्षक फरार हैं वहीं उत्पाद निरीक्षक व एएसआइ पुलिस के हत्थे चढ़ गये और न्यायालय ने दोनों को जेल भेज दिया है। मामले की हुई जांच में यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि 13 अक्टूबर 2019 को एक ट्रक से शराब की बरामदगी की गई थी। जिसके बाद उत्पाद विभाग ने कई शराब तस्करों के नामों का खुलासा मीडिया के समक्ष किया था। लेकिन जब प्राथमिकी दर्ज की गई तो चार लोगों को आरोपित नहीं किया गया। यही नहीं ट्रक का नंबर भी बदल गया और तो और जिसकी मामले में गिरफ्तारी की गई उसे 16 अक्टूबर को न्यायालय में पेश किया गया। इसके अलावा जांच में अन्य कई बातें सामने आने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। वैसे, थानाध्यक्ष राजमणि कहते हैं कि मामले का अनुसंधान किया जा रहा है। अगर उत्पाद विभाग द्वारा बचाए गये लोगों की भूमिका सामने आती है तो वो भी आरोपित बन सकते हैं। कारनामों को लेकर चर्चा में रहा है उत्पाद विभाग सहरसा: अपनी कारगुजारियों को लेकर हमेशा उत्पाद विभाग के निरीक्षक व अधीक्षक चर्चा में रहते थे। चर्चाओं की मानें तो कुछ माह पहले महिषी थाना क्षेत्र से दो लोगों को उत्पाद विभाग ने गिरफ्तार किया। दोनों के पास से गांजा की बरामदगी हुई थी। जिस कारण मामला एनडीपीएस एक्ट का दर्ज हो सकता था। गिरफ्तार आरोपितों ने सेटिग-गेटिग की फिर दोनों की गिरफ्तारी गांजा की जगह शराब के साथ पकड़े जाने को दिखा दिया गया। हाल में बनगांव थाना क्षेत्र में शराब की बरामदगी एक कार से उत्पाद विभाग ने की थी। चर्चा यह हुई कि कार में दो देशी पिस्तौल भी था। परंतु मामले को रफादफा कर दिया गया और सिर्फ शराब दिखाई गई। इससे पहले उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर का ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें यह कह रहे थे कि गांजा बेचे के लाइसेंस दिए हैं बेचो। हालांकि इस ऑडियो या अन्य चर्चाओं पर पुलिस निरीक्षक सीधे मुकर गये थे। वरीय अधिकारी भी जांच की जहमत नहीं उठाई जिस कारण मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। अब जब प्राथमिकी व गिरफ्तारी हो गई है तो कई अन्य खुलासे हो सकते हैं। एक व्यक्ति पर भी पुलिस की नजर उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर के करीबी माने जाने वाले एक व्यक्ति पर पुलिस विभाग की नजर है। सूत्रों की मानें से वह व्यक्ति कहने को तो प्राइवेट चालक था। परंतु उसकी विभाग में काफी पैठ थी। जिस कारण उसी के माध्यम से लेनदेन होता था। इसकी ऐसी पकड़ थी कि बड़ा से बड़ा काम सेटिग होने पर तुरंत करा देता था। हालांकि पुलिस उसके संबंध में भी छानबीन कर रही है।




लीड.. पुलिस के डर से फरार हुए उत्पाद अधीक्षक।

सहरसा। शराब तस्करों की मदद करने के मामले में बुरी तरह उत्पाद विभाग फंस गया है। उत्पाद अधीक्षक सहित इंस्पेक्टर मो. फैयाज अहमद, एएसआई वीरेन्द्र कुमार पाठक के विरूद्ध सदर थाना में थानाध्यक्ष राजमणि के आवेदन पर नामजद प्राथमिकी दर्ज किया गया है।
मंगलवार की मध्य रात्रि ही एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी के नेतृत्व में सदर थानाध्यक्ष राजमणि सहित आरक्षी मिथिलेश सिंह आदि ने उसके घर पर छापा मारकर इंस्पेक्टर व एएसआई को गिरफ्तार किया। दोनों गिरफ्तार अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। लेकिन इस कांड के मुख्य सूत्रधार उत्पाद अधीक्षक मो. अशरफ जमाल अब तक फरार बताए जाते हैं।

एसपी राकेश कुमार ने पत्रकारों को बताया कि 13 अक्टूबर 19 को गुप्त सूचना के आधार पर डुमरैल चौक के पास से चाहरदीवारी के अंदर ट्रक संख्या यूपी-78 एटी-9177 से भारी मात्रा में हरियाणा निर्मित विदेशी शराब 5572 बोतल बरामद हुआ था। जिस संदर्भ में उत्पाद विभाग के सहायक अवर निरीक्षक वीरेन्द्र कुमार पाठक के लिखित आवेदन पर उत्पाद विभाग में वाद संख्या 506/19 दर्ज किया गया था।
जिसमें प्राथमिकी अभियुक्त 1. अभिनव आनंद उर्फ गोविन्द सिंह पिता- नथेन्द्र प्रसाद सिंह, विद्यापति नगर वार्ड नंबर 19 सहरसा, 2.रमेश साह पिता रामविलास साह उर्फ विलास साह, सिमराहा, वार्ड नंबर 35, भवीसाह चौक जिला सहरसा,3.वाहन मालिक रामेश्वर पिता भूदेव सिंह,गृह नंबर 50, जेबडा नवाबगंज, जिला कानपुर उत्तर प्रदेश, 4. विभीषण मेहता पिता शत्रुध्न मेहता, कमलपुर वार्डनंबर 2, घैलाढ, जिला मधेपुरा एवं अन्य के विरूद्ध दर्ज किया। इसी मामले में बरामद किए गए विदेशी शराब को लेकर उत्पाद अधीक्षक मो. अशरफ जमाल एवं उत्पाद निरीक्षक मो. फैयाज अहमद के विरूद्ध शराब कारोबार में संलिप्त व्यक्तियों को बचाने हेतु रिश्वत लेने आदि का आरोप लगाते हुए पांच बिन्दुओं पर विभाग ने ही इसकी जांच शुरू की थी। विभागीय जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि दर्ज कांड में जब्त किए गए वाहन के चालक को प्राथमिकी अभियुक्त नहीं बनाया गया है। वहीं शराब के साथ बरामद ट्रक का निबंधन संख्या यूपी-78 एटी-9175 को जब्त दिखाया गया है। जांच के दौरान इस मामले में उत्पाद अधीक्षक ने जांच अधिकारी को बताया कि ट्रक का नंबर प्लेट हिन्दी में अंकित रहने की वजह से प्रेस विज्ञप्ति के समय निबंधन संख्या- यूपी 78 एटी- 9175 के स्थान पर गलती से ट्रक संख्या- यूपी-78 एटी-9177-9172 होने की बात बतायी गयी। वहीं तीसरे बिन्दु में छापामारी 13 अक्टूबर 19 को की गयी। 14 अक्टूबर 19 को सीजर लिस्ट बनाया गया और प्राथमिकी तीन दिन बाद 16 अक्टूबर 19 को दर्ज की गयी। जबकि नियमानुसार जब्ती के 24 घंटे के अंदर ही प्राथमिकी दर्ज करनी थी। विलंब से प्राथमिकी दर्ज करने पर न्यायिक हिरासत में भेजने पर अभियुक्तों को विलंब से भेजने पर छोड़ दिया गया। इस मामले में लापरवाही उजागर हुई। वहीं चौथे बिन्दु में नामजद अभियुक्त विभीषण मेहता को 14 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया और उसे 16 अक्टूबर को न्यायालय में उपस्थापन किया गया। पांचवे बिन्दु की जांच में शराब बरामदगी के पश्चात आरके सिंह के बाउंड्रीयुक्त परिसर जो जांच के क्रम में आरके सिंह द्वारा डा. आईडी सिंह को केवाला कर दिए जाने की बात सामने आ रही है को सीलबंद किया गया था। जांच के क्रम में यह बात प्रकाश में आयी कि उत्पाद अधीक्षक मो. अशरफ जमाल की अनुशंसा उपरांत जिलाधिकारी के आदेशानुसार घटना के कुछ दिन बाद ही उक्त स्थान को सीलबंद से मुक्त कर दिया गया है। इसी पांच बिन्दुओं पर की गयी जांच पड़ताल में यह बात सामने आयी कि उत्पाद अधीक्षक सहित उत्पाद निरीक्षक व एएसआई व अन्य कई उत्पादकर्मियों की संलिप्तता शराब तस्करों की मदद कर अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। शराब तस्करों को लाभ पहुंचाने में संलिप्तता सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार के निर्देश पर उत्पाद अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई शुरू कर दी गयी है। जिसमें दो की गिरफ्तारी हुई और उसे जेल भेजा गया है। वहीं उत्पाद अधीक्षक मो. अशरफ जमाल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस उसकी तलाश शुरू कर दी है।

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