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Wednesday, 27 November 2019

सहरसा।आरक्षण को समाप्त करने की साजिश के खिलाफ जविपा ने किया राज्यव्यापी धरना-प्रदर्शन*

कोशी लाइव_नई सोच नई खबर।
रितेश हन्नी।
सहरसा - देश में एनडीए सरकार द्वारा ओबीसी के आरक्षण को समाप्‍त करने की साजिश के खिलाफ आज जनतांत्रिक विकास पार्टी का एकदिवसीय राज्‍यव्‍यापी धरना – प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस दौरान जविपा ने सरकार से बाबा साहब के संविधान सम्‍मत दलितों, कमजोरों, पिछड़ों, आदिवासियों को मिले आरक्षण के अधिकार से खिलवाड़ बंद करने की मांग की। सहरसा में स्टेडियम परिसर  धरना स्‍थल पर जविपा  के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रशांत प्रियदर्शी सह संगठन प्रभारी ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारें बराबर कहती रहती है कि पिछड़ों को मिल रहा आरक्षण समाप्त नहीं किया जाएगा। लेकिन वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है। यानी इन्हें मिल रहे आरक्षण को समाप्त किये जाने की गहरी साजिश हो रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंडल आंदोलन की ही उपज हैं। वे गला फाड़-फाड़ कर सबका साथ सबका विकास का दावा करते थकते नहीं हैं। कहते हैं - हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े -लिखे को फारसी क्या। मतलब प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती। पिछड़ों अति/पिछड़ों को मिल रहे आरक्षण को खत्म करने की साजिश का प्रमाण है- बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा ली गई परीक्षाओं के परिणाम। आयोग ने 63वीं संयुक्त परीक्षा की मेधा सूची बनाने में गड़बड़ी की। नियमतः आरक्षित वर्ग का कट  ऑफ मार्क्‍स अनारक्षित वर्ग से कम होता है। लेकिन आयोग ने ठीक इसका उल्टा किया। आरक्षित वर्ग का कट ऑफ मार्क्‍स अनारक्षित वर्ग से 7 अंक अधिक कर दिया। यह आरक्षित वर्ग के साथ घोर अन्याय है। इसके लिए राज्य सरकार पूरी तरह दोषी है, क्योंकि बिना उसके इशारे के आयोग इस प्रकार की धांधली नहीं कर सकता। ओबीसी को 54 प्रतिशत अधिकार से वंचित रखने वाले नीतीश कुमार अकेले सामान्‍य वर्ग को ही 80 प्रतिशत आरक्षण देने वाले मुख्यमंत्री बन चुके है। सवर्ण गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण देने के केंद्रीय प्रस्ताव को तुरंत लागू करने का काम किया है, लेकिन ओबीसी की मंडल कमीशन द्वारा मिल रहे आरक्षण के साथ हो रहे छेड़छाड़ पर अपनी मौन सहमति देते रह रहे है।  तमाम विपक्ष का भी नीतीश कुमार के साथ ओबीसी आरक्षण में हो रहे घोटाले में मिलीभगत है। अति पिछड़ा और महादलित समेत पसमांदा की राजनीति की बात करने वाले नीतीश कुमार इन्हीं समुदायों के सबसे बड़ा दुश्मन स्वयं को चरितार्थ कर रहे हैं। बिहार सरकार के राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा फार्मासिस्ट के 1311 पदों के लिए निकाले गये विज्ञापन में ओबीसी के पदों की संख्या शून्य है। विदित हो कि आरक्षण की जड़ में गरम पानी डालने का काम 1998 में वाजपेयी सरकार के कार्मिक विभाग के एक ऑफिस मेमोरंडम 3611/1-98 से शुरू होता है, जिसमें सरकार ने आदेश दिया कि जो लोग उम्र सीमा में आरक्षण का लाभ लेने वाले ओबीसी/अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कोटे के अभ्यर्थी अधिक अंक प्राप्त करने पर भी अनारक्षित कोटे में दावा नहीं कर सकते हैं। इसका प्रभाव वर्ष 2015 में हुआ। जब दीपा ईवी के केस में केरल हाई कोर्ट ने इस आदेश का हवाला देते हुए सरकार के ऑफिस मेमोरंडम 3611/1-98 को सही ठहराया। ऐसा लगता है कि ओबीसी समाज के लिए नेशनल बैकवर्ड कमीशन और अदालत खत्म हो चुकी है।  सूचना  के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में 2019 तक केंद्र सरकार के ग्रुप सी की नौकरियों में ओबीसी की भागीदारी 21 प्रतिशत ही है। ग्रुप ‘ए’ विश्वविद्यालयों में  प्रोफेसर इत्यादि पदों पर भागीदारी में ओबीसी की हालत  यहां भी बदतर है। ध्यान रहे कि 60 प्रतिशत ओबीसी को 21 प्रतिशत अधिकार दिया जा रहा है। वहीं लगभग 15 प्रतिशत सामान्य वर्ग को 60 प्रतिशत अधिकार दिया जा रहा है। आयोग ने अनारक्षित कोटि की सभी सीटें सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ही भर दी। इस प्रकार आरक्षण प्राप्त वर्ग के उम्मीदवारों का हक मारा गया। इसी प्रकार केंद्र सरकार से राष्ट्रीय स्तर न्यायिक आयोग गठन कर आरक्षण की मांग लंबे अरसे से की जा रही है। इसे भी अभी तक ठंडे बस्ते में डालकर केंद्र सरकार बैठी हुई है। जविपा मांग करती है कि न्यायिक आयोग का गठन जल्द से जल्द हो और बाबा साहेब ने जो संविधान में हम शोषित, दलित, पिछड़ों, अतिपिछड़ों को जो अधिकार दिया था उसके साथ जो डबल इंजन की सरकार जो छेड़ - छाड़ कर रही है अविलंब बंद हो।
इसलिए आज हमारी पार्टी धरना प्रदर्शन कर रही है और बाबा साहब के संविधान से छेड़खानी करने वालों के लिए यह आंदोलन चेतावनी मात्र है। अगर यह नहीं रुका तो दलित, ओबीसी, पछड़े, अतिपिछड़े वर्ग के लोग एक बड़े जनांदोलन को मजबूर होंगे। धरना - प्रदर्शन में जिला के वरीय नेता दीनानाथ पटेल, उपाध्यक्ष चमन झा, प्रवक्ता राजेश रमण, जिला महासचिव मिथलेश ताँती,  सचिव दिलखुश पासवान, महिला नेत्री रचना कुमारी, लालबहादुर साह, इंदल यादव, विनय कुमार यादव, हीरा मुखिया, विपिन यादव, रफीक आलम, छात्र नेता गुलशन कुमार , अदालत कुमार, सुरेश गुप्ता, इंद्रदेव कुमार, सबीना खातून, खेरून खातून,  मोफिदा खातून सहित कई महत्वपूर्ण साथी  मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री गोसाय मंडल एवं संचालन st / sc प्रमुख जयप्रकाश रजक ने किया।

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