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Sunday, 3 November 2019

मधेपुरा:उदीयमान ऊर्जा के देवता भगवान भास्कर को अर्घ्य के साथ छठ पर्व सम्पन्न

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मधेपुरा: जिला मुख्यालय घैलाढ मुख्यालय पिपराही  भान-टेकठी, मठाही सहित पूरे देश भर में भक्तिमय माहौल बना रहा, उगते सूरज की पूजा' तो संसार का विधान है, पर सिर्फ और सिर्फ हम बिहारी समाज ही अस्ताचलगामी सूर्य की भी अराधना करते हैं, और वो भी, उगते सूर्य से पहले। लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा पर कल शाम व्रती ने पानी में खड़े हो कर डूबते हुए सूर्यदेव की आराधना की साथ ही सुख, समृध्दि, शान्ति एवं सभ्य समाज निर्माण कामना की और आज रोज  रविवार सुबह उदयमान भगवान भास्कर सूर्यदेव को अर्घ्य देकर छठ व्रत पूर हुआ। इस मौके पर जगह-जगह घाट का निर्माण किया गया, पिपराही भान-टेकठी स्थित सोनाय अनूप उच्च विद्यालय के मैदान में बनाये गये छठ घाट एवं पिठाई चौक स्थित नारियल छठ घाट का नज़ारा देखने लायक रहा, हालांकि एन एच 107 पथरीली होने के कारण श्रद्धालुओ को खाली पैर चलने में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। फिर भी श्रद्धालुओ ने उत्त्साह के साथ अहले सुबह से ही पूरब दिशा की ओर पानी  में खड़े हो कर सूर्य देव के उगने का आवाहन उगा हो सुरुजदेव भिन भिनसरवा
अरघ केर-बेरवा , पूजन केर-बेरवा हो ॰॰॰॰ के साथ अनेक गीत गाकर कर रहे थे। पूर्व दिशा में जैसे ही लालिमय भगवान भास्कर का दर्शन हुआ तो खुशी और बढ़ गया । सभी श्रद्धालुओं ने व्रती के हाथ में प्रसाद से भरे सूप देकर भगवान भास्कर सूर्य को अर्घ्य देते हुए सुख, समृध्दि, शान्ति और सौभाग्य की कामना की। बच्चों एवं युवाओं ने तरह-तरह के पटाखे फुलझड़ियों जला कर खूब मस्ती मनोरंजन करतें देखा गया।  यह पर्व पूरे साल में दो बार आता है। पहली बार चैत्र और दूसरी बार कार्तिक में किया जाता है, लेकिन कार्तिक में की जाने वाली छठ पूजा का खास महत्व होता है। छठ पर्व मूलतः सूर्य की आराधना का पर्व है, जिसे हिन्दू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। हिन्दू धर्म के देवताओं में सूर्य ऐसे देवता हैं जिन्हें मूर्त रूप में देखा जा सकता है।
सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।

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