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Tuesday, October 1, 2019

SAHARSA:शहर की सबसे पुरानी है बड़ी दुर्गा मंदिर

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AKKY:
सहरसा। शहर का सबसे पुरानी बड़ी दुर्गा स्थान मंदिर है। इसका इतिहास करीब छह दशक से अधिक प्राचीन है। कहते है कि वर्ष 1955 में ही स्टेशन के समीप सब्जी बाजार स्थित बड़ी दुर्गा मंदिर की स्थापना शिवालक बाबा ने की थी। शिवालक बाबा की स्मृति में आज भी मंदिर से सटे आश्रम को शिवालक आश्रम का नाम दिया गया है। मंदिर की खासियत यह है कि यहां वैष्णवी दुर्गा की पूजा आराधना की जाती है।
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इतिहास :
शिवालक बाबा ने दुर्गा पूजा की शुरूआत की थी। यहां टीन के शेड में मां दुर्गा की तस्वीर रखकर नवरात्रा पूजन किया जाता था। लेकिन धीरे धीरे यहां पर मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजन होने लगा। इसके बाद पंडित जटाशंकर चौधरी के प्रयास से तत्कालीन मंत्री रमेश झा के सहयोग से वर्ष 1985 में मां दुर्गा की संगमरमर की प्रतिमा स्थापित की गई। वहीं मंदिर का भव्य निर्माण कार्य भी पूरा हुआ। दुर्गा मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा की सुंदर अनुपम व अनूठी छटा है। यहां भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है इसीलिए सर्वाधिक भक्तों की भीड़ मां के दरबार में लगी रहती है। मंदिर कमेटी के वर्तमान अध्यक्ष शंभू टेकरीवाल, कार्यकारी अध्यक्ष हरिहर प्रसाद गुप्ता, सचिव श्याम साह, कोषाध्यक्ष केदारनाथ गुप्ता सहित 11 सदस्यीय कमेटी गठित है। मंदिर के पुजारी फूल झा, सत्यनारायण शर्मा सहित अन्य है
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विशेषता
बड़ी दुर्गा स्थान मंदिर का धार्मिक महत्व अधिक है। लोगों की आस्था इतनी अधिक है कि बड़ी दुर्गा स्थान में माता का खोइछा भरने श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। दुर्गा पूजा को लेकर चार दिनों का मेला लगा रहता है। वहीं निशा पूजा के दिन छप्पन भोग लगता है। छप्पन भोग का प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच वितरण किया जाता है। बडी दुर्गा स्थान में सांध्यकालीन आरती में पूरा परिसर भक्तों से भर जाता है।
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फोटो- 1 एसएआर-62
सबसे पुरानी दुर्गा मंदिर होने के कारण यहां श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रहती है। दुर्गा पूजा को लेकर अष्टमी से यहां मेला लगा रहता है। श्रद्धालुओं की सुविधा का यहां पूरा ख्याल रखा जाता है। मंदिर कमिटी के लोग पूरी तन्मयता व निष्ठापूर्वक दस दिनों के इस नवरात्रा को भक्तिपूर्ण माहौल में संपन्न कराते है। मां दुर्गा की आराधना से सब कष्ट दूर हो जाते है। छप्पन भोग के दिन रात भर श्रद्धालु जगकर मां की आराधना व पूजा करते है। इसके बाद मां का महाप्रसाद ग्रहण करते है।
श्याम साह, सचिव, बड़ी दुर्गा मंदिर
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फोटो-1 एसएआर-63
इस मंदिर में सच्चे मन से मनोकामना मांगने वालों की हर मुरादें मां दुर्गा की पूरी करती है। आदिशक्ति मां दुर्गा की विशेष कृपा भक्तों पर रहती है। कलश स्थापन से ही यहां दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रारंभ हो जाता है। सांध्यकालीन मां की आरती तो देखने लायक रहती है। श्रद्धालुओं की भीड़ मां दुर्गा के जयकारा के बीच आरती संपन्न होती है। वैष्णवी दुर्गा की यहां पूजन किया जाता है।
फूल झा, पुजारी

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