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Tuesday, 1 October 2019

SAHARSA:अमृता के प्रयास से कई घरों में गूंज रही है किलकारी

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AKKY:
सहरसा। ये जीने की राह दिखाती है। गरीबों की सेवा करती है। उनका मुफ्त में इलाज करती ही नहीं करती बल्कि इनकी वजह से कई घरों में बच्चों की किलकारी गूंज रही है। हम बात कर रहे हैं शहर की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अमृता आनंद का। बचपन से ही आसमां को छूने का सपना देखने वाली डॉ. अमृता कहती है कि गरीबों व लाचारों की सेवा उनका धर्म है। इनकी सेवा में इनके चिकित्सक पति डॉ. वेणु गोपाल का भी अहम योगदान है।
मूल रूप से मधेपुरा की रहने वाली अमृता पढ़ाई के समय से ही लोगों को स्वस्थ्य रहने की टिप्स देती रही है। वो अपने क्लीनिक में सप्ताह में एक दिन गुरुवार को मरीजों को मुफ्त में देखती है और उन्हें दवा तक उपलब्ध कराती है। उनका मानना है कि कोसी के इलाके में बांझपन सबसे बड़ी समस्या है। इसकी मूल वजह अशिक्षा, साफ-सफाई की कमी और कम उम्र में शादी है। वो कहती है कि लोग सही जानकारी के अभाव में समय से इलाज नहीं करा पाते हैं जिस कारण कई महिलाएं मां नहीं बन पाती है। वैसे इनके प्रयास से कई दंपत्ति की जीवन में खुशी लौटी है। मधेपुरा जिला के सिहेंश्वर की रहने वाली बबीता की शादी को 20 वर्ष हो गये थे। परंतु वो मां नहीं बन पा रही थी। उम्र भी बढ़ता जा रहा था। इसी बीच वह डा. अमृता के संपर्क में आई। जांच में पता चला कि पति गुलाबचंद मंडल में कमजोरी है। इन्होंने काफी कम पैसे में उसका इलाज किया। बबीता गर्भवती हुई और नौ माह बाद एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बबीता व उनके पति की खुशी का ठिकाना नहीं है। बबीता ने बताया कि वो निराश हो गई थी। परंतु मां बनने की लालसा थी। किसी ने डा. अमृता के पास जाने का सुझाव दिया तो आई और मामूली रुपए जांच वगैरह में खर्च हुए और वो मां बन गई। इसके अलावा भी कई ऐसी महिलाएं हैं जो मां बन चुकी है।
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जीने की दिखाती है सही राह
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महिलाओं को डा. अमृता जीने की राह भी दिखाती है। वो कहती है कि इस इलाके में अब भी शादीशुदा महिला को बच्चा नहीं होता है तो लोग महिला को ही दोषी मानने लगते हैं। जिस कारण ऐसी महिलाएं जीने की तमन्ना छोड़ देती है। लेकिन जब इस तरह की महिलाएं उनके पास आती है तो उसका उचित काउंसलिग कर उन्हें जिदगी को किस तरह जीना है यह बताया जाता है।
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स्वच्छता का देती है संदेश
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वो स्चच्छ रहने दूसरे को भी स्वच्छ रहने की प्रेरणा देती है। कई ग्रामीण इलाकों में पति के साथ घूमकर लोगों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाती है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के बीच जाकर उनके झिझक को दूर करती है और उसे गंदे कपड़ों से दूर रहने और पैड का उपयोग करने की सलाह देती है।

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