मधेपुरा/बिहार में शिक्षक नियोजन: नौकरी का पता नहीं लेकिन दौड़ा-दौड़ा कर मार रही है पलटू चाचा - कोशी लाइव

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Saturday, October 19, 2019

मधेपुरा/बिहार में शिक्षक नियोजन: नौकरी का पता नहीं लेकिन दौड़ा-दौड़ा कर मार रही है पलटू चाचा

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अक्की।
बिहार में शिक्षक नियोजन: नौकरी का पता नहीं लेकिन दौड़ा-दौड़ा कर मार रही है पलटू चाचा (नीतीश)
देवाशीष कुमार/मधेपुरा
सुबह जल्दी उठता हूं. नहा-धोकर पहले से तैयार किए गए आवेदन पत्रों (फॉर्म) में से पांच-दस उठाता हूं. बाइक में किक मरता हूं और निकल पड़ता हूं. दिनभर एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक. एक पंचायत से दूसरे पंचायत डोलता रहता हूं. पिछले दस दिन से यही दिनचर्या है. अगले दस दिन दिनचर्या ऐसी ही रहेगी. दिन में कहीं खाने-पीने के लिए भी रुकना मुश्किल हो जाता है. रुको तो लगता है कि इतनी देर में तो एक जगह फ़ॉर्म जमा कर देते. मैं एक दिन में अपने घर से सौ-सौ किलोमीटर दूर तक गया हूं. मैं प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास कर चुका हूं और फ़िलहाल राज्य में शिक्षकों का जो नियोजन हो रहा है उसका एक अभ्यर्थी हूं. एक फ़ॉर्म को भरने में कम से कम 50 रुपए का ख़र्च आता है. मेरी कोशिश है कि 400 जगहों पर फ़ॉर्म  डाल सकूं.”

“पिछले काफ़ी दिनों से मैं इस वक़्त का इंतज़ार कर रहा था. सरकार ने आख़िरकार शिक्षकों का नियोजन शुरू कर दिया है. मैं अपने दोस्तों की मदद से फ़ॉर्म भर रहा हूं. मेरे एक दोस्त ने फ़ॉर्म भरने के लिए ज़रूरी काग़ज़ों का फ़ोटो स्टेट करवा दिया. मैं उसे बाद में ये पैसे लौटा दूंगा. मेरे घर की हालत सही नहीं है. पैसे की दिक्कत रहती है. मैं चाहता तो हूं सौ जगहों पर फ़ॉर्म  डालना लेकिन डाल नहीं सकूंगा. पंद्रह फ़ॉर्म भरने में ही तीन हज़ार रुपए ख़र्च हो चुके हैं. हम एक-दूसरे की मदद भी कर रहे हैं. बिना मदद के फ़ॉर्म  डालना संभव ही नहीं है. हम में से कोई एक तरफ़ जाता है तो वो बाक़ी कई लड़कों के फ़ॉर्म भी अपने साथ लेता जाता है. इसके बिना कोई रास्ता ही नहीं है. सरकार ने नौकरी के नाम पर अभ्यर्थियों का चक्करघिन्नी बना दिया है.’

ये कथन केवल दो लोगों के नहीं हैं. उन लाखों अभ्यर्थियों का यही हाल है जो बिहार सरकार द्वारा राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में करीब एक लाख पदों पर शिक्षकों के नियोजन की प्रक्रिया का हिस्सा हैं, अभ्यर्थी हैं.

इस प्रक्रिया के तहत राज्य के सभी पंचायत (कक्षा एक से पांच), प्रखंड (कक्षा छह से आठ), नगर निगम और नगर परिषदों को नियोजन इकाई बनाया गया है. पूरे राज्य में लगभग नौ हज़ार नियोजन इकाइयां हैं और कोई भी अभ्यर्थी किसी भी नियोजन इकाई पर आवेदन कर सकता है. अगर कोई अभ्यर्थी चाहे हो तो एक साथ राज्य के सभी नयोजन इकाइयों पर भी आवेदन कर सकता है. सरकार ने कोई बंदिश नहीं लगाई है. इसी वजह से अभ्यर्थी एक साथ कई-कई जगहों पर आवेदन कर रहे हैं. आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं है. इसलिए अभ्यर्थियों को ख़ुद नयोजन इकाई पर जाकर अपना आवेदन जमा करवाना पड़ता है या वो डाक से अपना आवेदन भेज सकते हैं.

लेकिन अभ्यर्थियों के एक बड़े वर्ग को लगता है कि डाक से भेजे गए आवेदनों को कोई देखता नहीं है इसलिए नियोजन इकाई तक जाकर आवेदन जमा करवाना ही बेहतर विकल्प है और इसके चक्कर में वो रोज़ कई-कई सौ किमी तक की यात्रा कर रहे हैं. हज़ारों रुपए ख़र्च कर रहे हैं. मानसिक और शारीरिक परेशानी उठानी पड़ रही है सो अलग.

SAFTY ZONE[मधेपुरा]

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सावित्रीनंदा पब्लिक स्कूल

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