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Wednesday, October 2, 2019

पूर्णियाँ:छात्र जदयू ने बापू की जयंती मनाया

कोशी लाइव_नई सोच नई खबर।
अक्की।

 पूर्णिया  छात्र जदयू के कार्यकर्ता ने रामबाग सांसद कार्यालय एवं पूर्णिया काँलेज पूर्णिया मे महात्मा  गाँधी एवं लालबहादुर शास्त्री जी  के तस्वीर पर पुष्ष अर्पित  कर जयंती मनाया।  छात्र जदयू के पीयू  अध्यक्ष माणिक आलम ने कहा कि महात्मा गांधी को ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का नेता और 'राष्ट्रपिता' माना जाता है। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता का नाम करमचंद गांधी था। मोहनदास की माता का नाम पुतलीबाई था जो करमचंद गांधी जी की चौथी पत्नी थीं। मोहनदास अपने पिता की चौथी पत्नी की अंतिम संतान थे।

 छात्र जदयू जिलाअध्यक्ष राजू कुमार मंडल ने कहा कि महात्मा गांधी की मां पुतलीबाई अत्यधिक धार्मिक थीं। उनकी दिनचर्या घर और मन्दिर में बंटी हुई थी। वह नियमित रूप से उपवास रखती थीं और परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर उसकी सेवा सुश्रुषा में दिन-रात एक कर देती थीं।  राजू मंडल ने कहा कि मोहनदास  करम चंद गाँधी का लालन-पालन वैष्णव मत में रमे परिवार में हुआ और उन पर कठिन नीतियों वाले जैन धर्म का गहरा प्रभाव पड़ा।  राजू कुमार मंडल ने कहा कि महात्मा गाँधी जी मुख्य सिद्धांत, अहिंसा एवं विश्व की सभी वस्तुओं को शाश्वत माननते थे। इस प्रकार,उन्होंने स्वाभाविक रूप से अहिंसा, शाकाहार, आत्मशुद्धि के लिए उपवास और विभिन्न पंथों को मानने वालों के बीच परस्पर सहिष्णुता को अपनाया। इधर छात्र जदयू मीडिया प्रभारी सौरभ कुमार ने कहा कि  महात्मा
गांधीजी एक औसत विद्यार्थी थे,हालांकि उन्होंने यदा-कदा पुरस्कार और छात्रवृत्तियां भी जीतीं। वह पढ़ाई व खेल,दोनों में ही तेज नहीं थे।  महात्मा गांधी  जी के बीमार पिता की सेवा करना,घरेलू कामों में मां का हाथ बंटाना और समय मिलने पर दूर तक अकेले सैर पर निकलना, उन्हें पसंद था। सौरभ कुमार ने कहा कि  महात्मा गांधी जी 'बड़ों की आज्ञा का पालन करना सीखा, उनमें मीनमेख निकालना नहीं। सौरभ कुमार ने कहा कि
 गाँधी जी किशोरावस्था  आयु-वर्ग के अधिकांश बच्चों से अधिक हलचल भरी नहीं थी। हर ऐसी नादानी के बाद वह स्वयं वादा करते 'फिर कभी ऐसा नहीं करूंगा' और अपने वादे पर अटल रहते। उनमें आत्मसुधार की लौ जलती रहती थी, जिसके कारण उन्होंने सच्चाई और बलिदान के प्रतीक प्रह्लाद और हरिश्चंद्र जैसे पौराणिक हिन्दू नायकों को सजीव आदर्श के रूप में अपनाया।


छात्र जदयू के प्रवक्ता निसार आलम ने कहा कि गांधी जी यह सीखना चाहिए कि परिस्थिति चाहे कैसी भी हो सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए उन्होंने पूरे देश में को बताया कि हर लड़ाई खून खराबे  से पूरी नहीं होती लड़ाई अहिंसा का रास्ता अपनाकर भी लड़ी जा सकती है । जिला उपाध्यक्ष  सचिन कुमार मेहता उर्फ बम बम ने कहा कि
1887 में महात्मा गांधी जी ने जैसे-तैसे 'बंबई यूनिवर्सिटी' की मैट्रिक की परीक्षा पास की और भावनगर स्थित 'सामलदास कॉलेज' में दाखिल लिया। अचानक गुजराती से अंग्रेजी भाषा में जाने से उन्हें व्याख्यानों को समझने में कुछ दिक्कत होने लगी। इस बीच उनके परिवार में उनके भविष्य को लेकर चर्चा चल रही थी।  सचिन मेहता ने कहा कि  गाँधी जी  निर्णय उन पर छोड़ा जाता, तो वह डॉक्टर बनना चाहते थे। लेकिन वैष्णव परिवार में चीरफाड़ की इजाजत नहीं थी। साथ ही यह भी स्पष्ट था कि यदि उन्हें गुजरात के किसी राजघराने में उच्च पद प्राप्त करने की पारिवारिक परम्परा निभानी है तो उन्हें बैरिस्टर बनना पड़ेगा और ऐसे में गांधीजी को इंग्लैंड जाना पड़ा।

 इधर छात्र जदयू पीयू उपाध्यक्ष  पिंटू कुमार  मेहता ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में 'मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव' के यहां हुआ था। इनके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। ऐसे में सब उन्हें 'मुंशी जी' ही कहते थे। बाद में उन्होंने राजस्व विभाग में क्लर्क की नौकरी कर ली थी। लालबहादुर की मां का नाम 'रामदुलारी'   था।  जयंती मनाने में उपस्थित  छात्र  जदयू  जिला महासचिव शहवाज आलम आनंद कुमार झा, दीपेश कुमार झा ,सचिव  आशिष आनंद , मुकेश कुमार यादव छात्र जदयू नेता आशीष कुमार ,सागर कुमार जिला महासचिव  सोनू कुमार ,सचिन कुमार मेहता उर्फ बम बम अंकित सूरी ,बाबुल कुमार सिंह, मोहम्मद जुबेर आलम ,मंजूर आलम, विपुल कुमार  , सावन यादव, धनु यादव आदि छात्र नेता उपस्थित थे

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