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Friday, October 25, 2019

सुपौल:दो करोड़ 81 लाख के छात्रवृत्ति गबन व अनियमितता में चार डीईओ पर कार्रवाई

कोशी लाइव_नई सोच नई खबर।
अक्की।
सुपौल: वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2012-13 तक अल्पसंख्यक प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति वितरण में दो करोड़ 81 लाख 13 हजार 625 रुपये के वित्तीय अनियमितता एवं गबन के मामले में जांच में दोषी पाए गए सुपौल के चार तत्कालीन डीईओ के विरुद्ध जिलाधिकारी ने प्रपत्र क में आरोप गठित कर कार्रवाई हेतु शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव से अनुरोध किया है। भ्रष्टाचारमुक्त जागरूकता अभियान के अनिल कुमार सिंह ने मामले को लेकर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर दोषी पदाधिकारियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई का अनुरोध किया था। अपर मुख्य सचिव के निर्देश के आलोक में जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी सुपौल ने सुनवाई करते हुए अंतिम निर्णय पारित किया। जिला पदाधिकारी सुपौल ने अल्पसंख्यक प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितता बरतने में दोषी सुपौल के तत्कालीन चार डीईओ रतीश कुमार झा,वशिष्ट नारायण झा, कौशल किशोर प्रसाद एवं सुल्तान अहमद के विरुद्ध कार्रवाई हेतु शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव से अनुरोध किया है।
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क्या है अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का आदेश
सरकार के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने अपने कार्यालय पत्रांक 1301 दिनांक 20 अप्रैल 2016 को जिलाधिकारी सुपौल को पत्र लिखकर कहा है कि वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2012-13 के मध्य जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा शिक्षण संस्थान का सत्यापन नहीं किया गया। जिसके कारण 3 करोड़ 25 लाख रुपये का गलत वितरण हुआ है। जिला लेखा पदाधिकारी सहित वरीय पदाधिकारियों की जांच टीम गठित कर वर्णित तथ्यों की विस्तृत जांच कराकर प्राथमिकी हेतु आदेश जिला पदाधिकारी को दिया। जांच प्रतिवेदन के आलोक में विशेष सचिव सह निदेशक ने अपने कार्यालय पत्रांक 3980 दिनांक 2 जनवरी 2018 के द्वारा जिला पदाधिकारी सुपौल को पत्र लिखकर दोषी सरकारी पदाधिकारी के विरुद्ध राशि वापसी हेतु कानूनी कार्रवाई, अनुशासनिक कार्रवाई एवं प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया।
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आरोप का विवरण
सुपौल के तत्कालीन चार डीईओ के विरुद्ध जिला पदाधिकारी सुपौल ने प्रपत्र क में आरोप गठित कर कार्रवाई हेतु अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग को अनुरोध किया है। प्री मैट्रिक छात्रवृति राशि से संबंधित प्राप्त सूची के बिना मान्यता प्राप्त मदरसा एवं निजी विद्यालय को राशि उपलब्ध कराई गई। प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति की राशि वैसे शिक्षण संस्थान को भी विमुक्त की गई जो धरातल पर नहीं था अथवा फर्जी था। प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति राशि के वितरण से संबंधित सूची के शिक्षण संस्थान एवं अध्ययनरत छात्रों के सत्यापन के बिना ही उन्हें राशि विमुक्त कर दी गई। साथ ही छात्रों को दी जाने वाली राशि भी शिक्षण संस्थान को ही विमुक्त कर दी गई।

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