मधेपुरा:छात्रों की पढ़ाई का दुश्मन बना टिक-टॉक - कोशी लाइव

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Sunday, August 18, 2019

मधेपुरा:छात्रों की पढ़ाई का दुश्मन बना टिक-टॉक

कोशी लाइव:अक्की

मधेपुरा। आधुनिकता के इस युग में दिनोंदिन हाईटेक होने की ललक ने विश्व के कई देशों के बीच होड़ पैदा कर दी है बल्कि फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, लाइक, बिगो एवं टिक-टॉक जैसे कई नए तकनीकी सुविधाओं ने यूजर्स को आकर्षित करने का काम भी कर रहा है। हालांकि इसके चक्कर में अब छात्राओं की पढ़ाई में टिक-टॉक बाधक बन गया है। दरअसल टिक टॉक अपने यूजर्स को वीडियो एडीटिग की सुविधा प्रदान कर रहा है। इसके चलते अब यह एप छात्रों की आदत में शुमार हो गया है। सिर्फ मधेपुरा में हजारों युवक-युवतियां इस एप के गिरफ्त में हैं।
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क्या है टिक-टॉक

टिक-टॉक एक सोशल मीडिया एप्लीकेशन है। इस एप के माध्यम से स्मार्टफोन यूजर 15 सेकेंड के छोटे-छोटे वीडियो बनाते हैं और वीडियो एडीटिग के जरिए बैकग्राउंड में किसी फिल्म या स्टंट सीन के जरिए इसे रोचक बनाने में लगे हैं। इससे उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। देश में कुछ समय के लिए इसे बैन कर दिया गया। परंतु बैन हटने के बाद इस एप में वीडियो बनाने के दौरान स्पेशल इफेक्ट, फिल्टर, ब्यूटी इफेक्ट, म•ोदार इमोजी स्टिकर एवं म्यूजिक के साथ एक नया रंग देने के लिए सैकड़ों ऑप्सन देकर लोगों के बीच फिर लोकप्रिय हो गया।
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टिक-टॉक क्यों है छात्रों के लिए खतरनाक
टिक-टॉक एप छात्रों के बीच काफी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। हाईटेक हो रहे जमाने में सभी छात्रों के पास मोबाइल होने के कारण काफी तदाद में छात्र इस एप में अपना वीडियो बना रहे हैं। लगातार इस एप का प्रयोग छात्रों के लिए खतरनाक है। चिकित्सक डॉ. आरके पप्पू ने बताया कि वर्तमान समय लोगों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा टिक-टॉक का ज्यादा प्रयोग छात्रों के लिए काफी खतरनाक है। इस एप में एक महज कुछ सेकेंड का वीडियो बनाने में छात्र पांच-से-छह घंटे तक लगा देते हैं। इससे एक ही स्थिति में लगातार बैठे रहना शरीर को दुर्बल, आंखों की रौशनी को कम सहित दर्जनों बीमारी को आमंत्रित करता है। साथ ही इस प्रकार के कार्य करने से छात्र मानसिक रूप से विकृत होते हैं। जो उनके लिए आगे चलकर काफी समस्या उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने कहा कि एक बार किसी भी कार्य के आदत लगने के बाद उसे छात्र जीवन में छुड़ाना काफी मुश्किल है। इसके लिए उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे इस एप का प्रयोग कम करने से ही इस आदत से जिले के छात्र मुक्त हो पाएंगे।

SAFTY ZONE[मधेपुरा]

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सावित्रीनंदा पब्लिक स्कूल

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