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Friday, 12 July 2019

सहरसा/बिहार:Super 30 Movie Review: सुपर हीरो ऋतिक ने 'सुपर 30 में 'आम आदमी' बनकर जीता दिल, पढ़ें कैसी है फिल्म

कोशी लाइव:अक्की
(सहरसा :MYVIEWS: super30 मूवी बहुत अच्छा मूवी है मैं अपनी तरफ से इसे फाइव स्टार देना चाहूंगा वह कहते हैं मतलब कि सबका अपना अपना व्यू होता है लेकिन मेरे से इस मूवी को रेटिंग में फाइव स्टार मिलना चाहिए यह मूवी बहुत ही प्रभावित करता है देखने के बाद और खासकर स्टूडेंट के लिए इसको देखने के बाद जरूर है कि वह प्रभावित होंगे और मेहनती बनेंगे।।
My Rating:5* By:-अक्की)
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पर्दे पर जब आनंद कुमार को लगी गोली तो फूट-फूट कर रोईं मां...

पटना [अक्षय पांडेय]। #Super30 : हर तरफ आनंद ही आनंद। जो सिनेमा हॉल में बैठ गया वो हिला नहीं। तालियों ने तो आनंद का हौसला बढ़ाया ही कई दृश्य तो दर्शकों को खड़े होने से भी नहीं रोक पाए। बेटे के रूप में  ऋत्विक रोशन को पर्दे पर देख मां की भी आंखें भी छलक आईं। फिल्म के कई दृश्यों ने आनंद के परिवार को भावुक कर दिया। पंकज त्रिपाठी की हंसी-ठिठोली के बीच खुशहाल कॅरियर को छोड़कर 30 छात्रों पर आनंद कुर्बान हो गए। वहीं पटना में बिहार के उपमुख्‍यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी फिल्‍म सुपर 30 को देखा। 

आखिरी सीन तक किसी ने कुर्सी नहीं छोड़ी
दरअसल शुक्रवार को पटना के सिनेमा हॉल में दर्शकों की तालियों ने सुपर-30 फिल्म के असली हीरो गणितज्ञ आनंद कुमार का हौसला बढ़ाया। फिल्म के कई सीन ने दर्शकों को खड़े होने को मजबूर कर दिया। फिल्म के आखिरी सीन तक कोई हिला नहीं। फिल्म में शिक्षा मंत्री की भूमिका निभा रहे बिहारी अभिनेता पंकज त्रिपाठी की हंसी-ठिठोली के बीच खुशहाल कॅरियर छोड़ 30 छात्रों पर आनंद कुर्बान हो गए। आज पूरे देश में विकास बहल की फिल्म सुपर-30 रिलीज हुई, मगर पटनावासियों को इसका खास इंतजार था। शहर के सिनेमा हाल हाउसफुल हो गए। कुल 22 शो में यह फिल्म दिखाई गई। बाहर निकल रहे लोगों की प्रतिक्रियाएं सुन फिल्म देखने के लिए शनिवार और रविवार के टिकट भी लोगों ने एडवांस बुक करा लिए। 
पापड़ बेचा पर नहीं मानी हार
स्पेशल स्क्रीनिंग में आनंद कुमार के परिवार ने भी एक साथ बैठकर फिल्म देखी। मां जयंती देवी ने कहा कि फिल्म ने आनंद के साथ न्याय किया। जैसा आनंद है, वैसा ही पर्दे पर दिखा। बेटे को गोली लगने वाला दृश्य दिल दहला देने वाला था। काफी कोशिश के बाद भी मैं अपने को संभाल नहीं पाई, आंसू छलक ही गए। मां ने कहा कि आनंद ने क्या नहीं किया। बच्चों के लिए मेरा बनाया पापड़ तक बेचा। ये शायद सबको न पता हो।
 आ गई उस दौर की याद
आनंद कुमार के भाई प्रणव ने कहा कि मूवी शुरू होने के चंद सेकेंड में ही हम पुराने दौर में पहुंच गए। किलकारी के बच्चों ने फिल्म में गुरु का सम्मान और विश्वास दिखाकर भावुक कर दिया। पहले बैच को पढ़ाने के दौरान आर्थिक तंगी से खानाबदोशी की जिंदगी को बच्चों ने बेहतर तरीके से निभाया।
ऋत्विक ने मेरे किरदार के साथ किया न्याय : आनंद 
फिल्म के असली हीरो आनंद कुमार ने मोना सिनेमा हॉल में दर्शकों के साथ फिल्म देखने के बाद कहा कि कहानी छात्र और शिक्षक के साथ पिता और बेटे के भावनात्मक रिश्ते को भी दिखाती है। रितिक रोशन ने मेरे किरदार के साथ न्याय किया है। उन्हें पर्दे पर देखकर ऐसा लग रहा था जैसे मैं ही बोल रहा हूं। परिजनों के साथ फिल्म देखने के दौरान कई बार मेरी आंखें छलक आईं।
और छा गए आनंद ...
फिल्म रिलीज होते ही शुक्रवार को हैशटैग सुपर-30, और सुपर-30 रिव्यू नाम से हजारों लोगों ने रितिक रोशन और आनंद कुमार पर फिल्म को लेकर प्रतिक्रियाएं दीं। मोना सिनेमा से फिल्म देखकर निकले रोशन ने कहा कि आनंद कुमार का संघर्ष हौसला देता है। विशाल ने कहा कि रितिक रोशन की बिहारी बोली सुनकर कहीं से भी ऐसा नहीं लगा कि उनका ताल्लुक इस राज्य से नहीं है। नवीन ने कहा कि पंकज त्रिपाठी की कॉमेडी ने फिल्म में चार चांद लगा दिया। दर्शकों ने सीएम नीतीश कुमार से फिल्म को टैक्स फ्री करने की अपील की। 
बिहार के जीनियस गणितज्ञ और शिक्षक आनंद कुमार की बायोपिक 'सुपर 30' रिलीज हो गई है। फिल्म में ऋतिक रोशन ने आनंद कुमार का किरदार निभाया है। तो अगर आप फिल्म देखने का प्लान बना रहे हैं तो पहले पढ़ें कैसी है फिल्म-
कहानी
रेटिंग 5* by:prince Raj


फिल्म की शुरूआत होती है फ्लैशबैक के साथ। एक होनहार स्टूडेंट आनंद का एडमिशन क्रैबिंज यूनिवर्सिटी में होता है लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते उसका एडमिशन नहीं हो पाता है। आनंद के पिता की मौत हो जाती है और उन्हें अपनी मां के हाथों के बने पापड़ बेचकर घर चलाना पड़ता है।
इसके बाद आनंद को लल्लन सिंह का साथ मिलता है। लल्लन सिंह का किरदार आदित्य श्रीवास्तव ने निभाया है। लल्लन आईआईटी की तैयारी कर रहे बच्चों के लिए एक कोचिंग सेंटर चलाता है और आनंद को बतौर टीचर अपॉइट कर लेता है। इसके बाद आनंद की लाइफ में बदलाव आ जाते हैं, लेकिन फिर उन्हें ये एहसास होता है कि उनके जैसे कई बच्चे हैं जो आर्थिक तंगी की वजह से अपना अच्छा भविष्य नहीं बना पाते। इसके बाद आनंद वो कोचिंग सेंटर छोड़कर गरीब बच्चों के लिए अलग से फ्री कोचिंग सेंटर खोलते हैं।
रिव्यू
विकास बहल ने आनंद कुमार की जिंदगी के हर हिस्से को बहुत ही खूबी से दिखाया गया है। फिल्म आपको जोड़कर रखेगी। हालांकि शुरुआत में ऋतिक का लहजा और उनका लुक आपको अजीब लगेगा। ऋतिक को ऐसे डीग्रैम लुक में पहली बार देखा गया है। मृणाल ठाकुर ने कम सीन होने के बावजूद अपना अच्छा काम दिखाया। फिल्म के कुछ डायलॉग्स को काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला। 'राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा, वो बनेगा जो हकदार होगा' डायलॉग पर तो खूब तालियां बजीं। 
रेटिंग: 3

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