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Thursday, 2 May 2019

सुपौल:यहां एक ही कमरे में होती पढ़ाई और उसी में है शिक्षक आवास

कोशी लाइव:अक्की

सुपौल। सरकार एक तरफ विद्यालयों में अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान कर उसमें पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने में लगी है। तो वहीं दूसरी ओर सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड का प्राथमिक विद्यालय उपेंद्र मंडल टोला माकर में पढ़ने वाले छात्र-छात्रा पिछले 12 वर्षों से सुपौल उप शाखा नहर के किनारे फूस के एक छतरी में पढ़ने को विवश है। इस विद्यालय में फिलहाल 89 छात्र-छात्राओं का नामांकन है। विद्यालय का हाल यह है कि उसमें कार्यरत प्रभारी प्रधान एक छत्ती देकर ना सिर्फ उसमें बच्चे को पढ़ाते हैं बल्कि खुद भी उसी में रहा करते हैं। आधुनिक सुविधाओं से कोसों दूर इस विद्यालय के बच्चों को तब काफी कठिनाइयां झेलनी पड़ती है जब नहर से होकर कोई वाहन गुजरता है। मंगलवार को जागरण संवाददाता ने उक्त विद्यालय का मुआयना किया तो देखा कि एक ही कमरे में पढ़ाई तथा शिक्षक का आवास कहीं से भी बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है। विद्यालय के कई छात्र-छात्राओं ने बताया कि उन सबों को धूप, बरसात तथा जाड़े के सीजन में समस्याएं कम नहीं होती है। छात्र-छात्राओं का कहना था कि नहर के किनारे वह सभी अपने को उपेक्षित महसूस करते हैं।
माकर टोला के लोगों के बार-बार की मांग के आधार पर वर्ष 2006 में वहां विद्यालय का सृजन किया गया था। स्थापना काल से ही इस विद्यालय को नहर के किनारे चलाना शुरु किया गया जो आज तक चल रहा है। विद्यालय के शिक्षक ने बताया कि जिस समय विद्यालय की स्थापना की जा रही थी तब टोले के लोगों ने दान में जमीन देने का आश्वासन दिया था। जमीन दाता द्वारा बार-बार जमीन का निबंधन करने का प्रयास किया गया लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते जमीन निबंधित नहीं हुआ और इसी दौरान उस गांव में विद्यालय स्थापित होने के प्रखर व्यक्ति उपेंद्र मंडल की मौत हो गई।

प्रखंड का यह इकलौता विद्यालय है जो नहर के किनारे की जमीन में अवस्थित है और वहां व्याप्त समस्याओं को दूर करने के प्रति विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं है। पिछले वर्ष एक आदेश के तहत उक्त प्राथमिक विद्यालय को बगल के मध्य विद्यालय में समायोजित कर दिया गया था लेकिन फिर दूसरे आदेश में उसे मूल जगह पर भेज दिया गया। विद्यालय के इस चिताजनक हालत पर माकर गांव के कई अभिभावक कुछ भी बोलने से कतराते हैं। बच्चे इसी तरह नहर किनारे फूस के छप्पर के नीचे बैठकर पढ़ाई करते रहेंगे या फिर इसका कोई स्थाई समाधान होगा।

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