लोकसभा चुनाव 2019 / मधेपुरा गोप का ही रहा, लेकिन शरद को न मिल सकी संसद की सीट - कोशी लाइव

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Thursday, May 23, 2019

लोकसभा चुनाव 2019 / मधेपुरा गोप का ही रहा, लेकिन शरद को न मिल सकी संसद की सीट

कोशी लाइव:अक्की

  • यह वही सीट है जहां से शरद यादव ने 1999 में लालू यादव को हरा दिया था
  • विरोधी वोट के बिखराव का फायदा दिनेशचंद्र को हुआ

  •  मधेपुरा के बारे में प्रचलित कहावत है- रोम पोप का तो मधेपुरा गोप का। मधेपुरा इस बार भी गोप का ही रहा, लेकिन राजद उम्मीदवार शरद यादव को संसद की सीट न मिली। त्रिकोणीय लड़ाई में जदयू प्रत्याशी दिनेशचंद्र यादव ने पप्पू यादव और शरद यादव को मात देकर जीत हासिल कर ली। पप्पू यादव तीसरे स्थान पर रहे।
  • एनडीए विरोधी वोट का हुआ बिखराव
  • मधेपुरा में पप्पू यादव की अच्छी पकड़ मानी जाती है। 2014 के चुनाव में पप्पू ने यहां राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत पाई। राजद से नाता टूटने पर पप्पू ने अपनी पार्टी जन अधिकार पार्टी (जाप) बनाई और चुनाव मैदान में उतर गए। बगावत कर जदयू से अलग हुए शरद यादव को राजद ने टिकट दिया। एनडीए विरोधी वोट के लिए पप्पू यादव और शरद यादव लड़ते रहे। विरोधी वोट के बिखराव का फायदा दिनेशचंद्र को हुआ।
  • स्थानीय चेहरे को मिली तरजीह
  • शरद यादव दिल्ली में रहकर राष्ट्रीय राजनीति करते रहे हैं। मौजूदा चुनाव से पहले तक दिनेशचंद्र यादव शरद यादव के चुनावी अभियान की कमान संभालते थे। इस बार जदयू ने शरद की काट में दिनेशचंद्र यादव को मैदान में उतारा। यह रणनीति शरद के हार का कारण बनी। चुनावी अभियान संभालने के लिए शरद के पास मजबूत लोग नहीं थे। एक तरह से पूरा चुनाव तेजस्वी यादव के बूते लड़ा गया, लेकिन क्षेत्र के यादव मतदाताओं ने शरद के राष्ट्रीय कद की बजाए दिनेशचंद्र यादव के रूप में स्थानीय चेहरे को ज्यादा तरजीह दी।
  •  दिनेशचंद्र का यादव मतदाताओं पर असर तो है ही, इसके अलावा जदयू और बीजेपी का बेस वोट जुड़ जाने से वह पहले दिन से ही पप्पू और शरद से आगे निकल गए थे। मधेपुरा सीट की एक और सच्चाई यह भी है कि जब भी यहां से पप्पू यादव और शरद यादव का सामना हुआ शरद हमेशा हारे।

SAFTY ZONE[मधेपुरा]

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सावित्रीनंदा पब्लिक स्कूल

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