चैत्र नवरात्र 6 अप्रैल से, शनि, गुरु और केतु का खास संयोग - कोशी लाइव

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Friday, April 5, 2019

चैत्र नवरात्र 6 अप्रैल से, शनि, गुरु और केतु का खास संयोग

कोशी लाइव: अक्की

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि... नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:... । सनातन धर्मावलंबियों का अति महत्वपूर्ण वासंती नवरात्र चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शनिवार 6 अप्रैल से शुरू होगा। 
नौ दिनों तक पूरे विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाएगी। इसी तिथि से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2076 भी शुरू होगा। ब्रह्म पुराण के मुताबिक ब्रह्मा ने इसी संवत में सृष्टि के निर्माण की शुरुआत की थी। विक्रम संवत में प्रकृति की खूबसूरती दिखती है। प्रकृति कई तरह का सृजन करती है। पतझड़ में मुरझाए पौधों में नई जान आ जाती है। पौधे पुष्पित व पल्लवित होते हैं। हर तरफ हरियाली नजर आने लगती है। इससे एक अलग तरह का खुशहालीपूर्ण माहौल बन जाता है।
शनि, केतु, गुरु का संयोग, राजनीति में अप्रत्याशित परिणाम के आसार 
ज्योतिषाचार्य पूनम वैश्य ने बताया कि चैत्र नवरात्र पर शनि, केतु और गुरु का विशेष संयोग बन रहा है। शनिवार से ही नवरात्र शुरू हो रहा है। इस समय गुरु धनु राशि में केतु के संग विराजमान हैं। इस तरह शनि, केतु और गुरु की युति बन रही है। इसके आम लोगों का रुझान अध्यात्म की ओर दिखेगा। इस युति से लोकतंत्र पर भी प्रभावि दिख रहा है। लोकतंत्र के लिए शनि प्रभाव देने वाला ग्रह है। शनि के केतु का साथ मिलने से राजनीति  में अप्रत्याशित परिणाम देखने को मिल सकते हैं। सामाजिक वातावरण भी अस्थिर दिख रहा है। हिंसा की घटनाएं हो सकती हैं।
चैत्र नवरात्रि पर पांच सर्वार्थ सिद्धियोग 
ज्योतिषाचार्य प्रियेंदू प्रियदर्शी के अनुसार रेवती नक्षत्र में नवरात्रि शुरू होगी। चैत्र नवरात्रि इस बार कई शुभ संयोगों को लेकर आ रही है। नौ दिनों में पांच बार सर्वार्थ सिद्धि योग और दो बार रवि योग है। द्वितिया तिथि को सर्वार्थ सिद्धियोग, 11 अप्रैल को षष्ठी तिथि पर रवियोग, सप्तमी 12 अप्रैल और रविवार नवमी को सर्वार्थ  सिद्धि योग है। इन संयोगों के बनने से देवी आराधना विशेष फलदायी रहेगी। यह नवरात्र धन और धर्म के लिए खास रहेगा। 
नवरात्र में हर ग्रह की शांति की पूजा होगी 
ज्योतिषाचार्य पूनम ने बताया कि मां दुर्गा की पूजा में हर ग्रह की शांति की पूजा की जा सकती है। प्रतिपदा पर शैलपुत्री की आराधना से सूर्य ग्रह की शांति की जा सकती है। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा से राहू ग्रह की शांति, तृतीय तिथि पर चंद्रघंटा की पूजा से चंद्रमा की शांति, चतुर्थ कूष्मांडा की पूजा से केतु ग्रह की शांति, पंचम स्कंदमाता की पूजा से मंगल की शांति, कात्यायनी की पूजा से वृष की शांति, अष्टम कालरात्रि की पूजा से शनि ग्रह की शांति,अष्टम महागौरी की पूजा से बृहस्पति की और नवम सिद्धिदात्री की पूजा से शुक्र ग्रह की शांति की जा सकती है।
चैत्र में दुर्गा पूजन से ऋतु परिवर्तन का कुप्रभाव नहीं 
ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा के अनुसार चैत्र प्रतिपदा से हिंदू कैलेंडर के नये वर्ष विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इसके साथ ही ऋतु परिवर्तन होता है। इससे गर्मी बढ़ती है। चैती नवरात्र पूजन से लोग नियम, संयम, शुद्ध आहार, विचार रखते हैं। बीमारी से बचाव के लिए व्रत करना सेहत के लिए लाभकारी होता है। इससे मौसमी परिवर्तन का कुप्रभाव नहीं पड़ता है। इस मास से ही दलहन,गेहूं, तिलहन आदि के साथ सर्राफा व्यापार भी प्रभावित होता है। प्रतिपदा पर ही राम और युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था। मनु और सतरूपा ने सृष्टि के निर्माण की शुरुआत की थी। 
महाष्टमी और महानवमी पूजन 13 को 
ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा के मुताबिक नवरात्रि की पूजा इस बार नौ दिनों की होगी। दशमी तिथि की क्षय है। महाष्टमी और महानवमी की पूजा एक ही दिन शनिवार 13 अप्रैल को होगी। चैत्र नवरात्रि में भगवान विष्णु के दो -दो अवतार मत्स्यावतार और रामावतार होता है। साथ ही सूर्योपासना का पर्व चैती छठ, हनुमानजी का पूजन भी होता है। ज्योतिषाचार्य पीके युग ने बताया कि नवरात्रि पर पंच महापुरुष योग मां दुर्गा की पूजा होगी। चंद्रमा से गुरु के दशम भाव में अपनी राशि धनु में रहने से बहुत फलदायी स्थिति रहेगी। 
घोड़े पर आगमन, भैंसे पर विदाई
मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर जबकि विदाई भैंसे पर होगी। घोड़े पर आगमन से श्रद्धालुओं को मनचाहा वरदान और सिद्धि की प्राप्ति होगी। राजनीति में उथल-पुथल देखी जाएगी।
कलशस्थापना का शुभ मुहूर्त
छह अप्रैल प्रात : 6.09 बजे से 10.19 बजे तक
रेमंत पूजा-7 अप्रैल,गौरी तृतीया-8 अप्रैल, श्रीपंचमी पूजन-9 अप्रैल,11 अप्रैल-विल्वाभिमंत्रण,12-पत्रिका प्रवेश और निशापूजा, 13 महाष्टमी,महानवमी, ,14 -विजयादशमी।
चैत्र नवरात्रि कैसा रहेगा विभिन्न राशियों के लिए 
मेष : धनलाभ, रुके काम शुरू होंगे
वृष : सावधानी से रहें, लड़ाई-झगड़े से बचें
मिथुन : पद व पैसा,विवेक से कार्य करें,
कर्क : आय में वृद्धि, सम्मान मिलेगा, स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें
सिंह : कार्य क्षेत्र में लाभ, संतान की शिक्षा में परेशानी
कन्या : भूमि, संपत्ति के लिए कर्ज लेना होगा, संतान-स्त्री के स्वास्थ्य में परेशानी
तुला : घर, संतान से लाभ, कठिन परिश्रम
वृश्चिक : व्यय, जीवनसाथी से सहयोग, संतान का पराक्रम
धनु : तीर्थयात्रा, सहयोग, मनोबल बढ़ेगा
मकर : धन व्यय, विदेशयात्रा
कुंभ : सुख, ऐश्वर्य, आय में वृद्धि,पैतृक संपत्ति मिलेगी
मीन : यश, प्रतिष्ठा, पारिवारिक सुख, कार्यक्षेत्र में लाभ
तंत्र साधना फलदायी होगी
ज्योतिषाचायोंर् के मुताबिक इन विशेष दिनों में मां दुर्गा की पूजा होने से अघौड़ी और तांत्रिकों को तंत्र सिद्धि में सफलता मिलती है। पटना के बांसघाट में तंत्र साधना की जाती है। 

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