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Thursday, 11 April 2019

पूर्णिया में चुनावी मुद्दे: 50 किमी रेल लाइन बिछाने की योजना 20 साल से अधर में

कोशी लाइव:

20 वर्षों में दो रेल मंत्रियों के हाथों दो बार शिलान्यास के बावजूद बिहारीगंज से रूपौली होते हुए कुरसेला तक 50 किमी रेल लाइन बिछाने की योजना डिरेल हो गयी। 
सीमांचल और कोसी के सात जिलों के लोगों के आवागमन को सस्ता और सुगम बनाने के उद्देश्य से पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र ने चार दशक पहले पूर्व मध्य रेलवे की बिहारीगंज-कुरसेला के बीच रेल लाइन का जाल बिछाने का सपना देखा था।
वर्ष 1999 में जब बिहार के रेल मंत्री रामविलास पासवान के द्वारा कुरसेला- बिहारीगंज रेल लाइन की आधारशिला कुरसेला में रखी गई थी तो ललित बाबू का सपना सच साबित होता दिखने लगा, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाया। इसके बाद कुरसेला -बिहारीगंज रेलखंड परियोजना के निर्माण के लिए सात फरवरी 2009 को तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद के द्वारा शिलान्यास कार्यक्रम का आयोजन उच्च माध्यमिक विद्यालय रूपौली में किया गया।
 
कुरसेला से बिहारीगंज तक सर्वे का काम हुआ, जगह-जगह लगभग सौ मीटर पर रेलवे लाइन के लिए पिलर भी लगाए गए। कुरसेला-बिहारीगंज नई रेल लाइन प्रस्तावित स्टेशन रूपौली का बोर्ड भी लगाया गया, मगर एक दशक में इस बोर्ड के रंग उतर गए। अब तो जनता भी निराश हो चुकी है। 
पूर्णिया को मिलती रिंग रेल, सीमांचल में आवागमन होता सुगम 
बिहारीगंज-कुर्सेला के बीच नई रेल लाइन बिछने से पूर्णिया जिला में रिंग रेल की उम्मीद पूरी हो जाएगी। ऐसा होने पर पूर्णिया से बनमनखी, बिहारीगंज, रूपौली, कुर्सेला, कटिहार होते हुए ट्रेनें वापस पूर्णिया पहुंचती। इससे पूर्णिया ही नहीं कटिहार, किशनगंज, अररिया, मधेपुरा, सुपौल और सहरसा तक के लोगों का आवागमन सुखद होता। अभी इन रास्तों पर बस माफिया का कब्जा है। दो घंटे की यात्रा में लोगों को हिचकोले खाते सड़कों पर चार घंटे लग रहे हैं। 
प्रोजेक्ट मंजूर, फंड नदारद, प्रोजेक्ट कॉस्ट दस गुना महंगा
दो दशक पुरानी यह योजना केंद्र सरकार की मंजूरी के बावजूद अभी तक पूरी नहीं हो पायी है। मंजूरी मिलने के बाद इस योजना पर सरकारों ने गौर नहीं फरमाया। जनप्रतिनिधियों ने भी ध्यान नहीं दिया। नतीजन, प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ गया। अब रिवाइज्ड डीपीआर बनानी होगी। इतने सालों में जमीन अधिग्रहण के नियम-कानून बदल गए। अलबत्ता जमीन भी दस गुणी महंगी हो गयी। 

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