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Tuesday, April 2, 2019

लोकसभा चुनाव 2019: कोसी की दो संसदीय सीटों पर दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर

कोशी लाइव:

कोसी की दो संसदीय सीटें सुपौल और मधेपुरा में इस बार का लोकसभा चुनाव रोचक और दोनों महागठबंधनों के लिए चुनौती भरा भी है। चुनावी दंगल में भाग्य आजमा रहे कई दिग्गजों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई होगी तो पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण रोल अदा करने वाले अन्य कई राजनीतिक दिग्गजों की भी अग्नि परीक्षा होने वाली है।
यह चुनाव सांसद दंपति पप्पू यादव और रंजीत रंजन के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। जानकारों के अनुसार इस बार का चुनाव सांसद दंपति के अलावा मधेपुरा लोकसभा सीट से महागठबंधन के उम्मीदवार शरद यादव के राजनीतिक सफर की दशा और दिशा तय करने वाला होगा। 
मधेपुरा में कांटों भरी राह 
महागठबंधन से राजद के टिकट पर मधेपुरा संसदीय सीट से प्रत्याशी बने शरद यादव की राह भी कांटों भरी है। पिछले लगभग 28-30 सालों से कोसी के दिग्गज नेता के रूप में माने जाने वाले शरद यादव चार बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। मजे की बात है कि अब तक अधिकांश बार राजद के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले शरद इस बार राजद के चुनाव चिन्ह् पर ही अपनी किस्मत आजमाने मैदान में उतरे हैं। शरद यादव के पक्ष में सबसे मजबूत पहलू यह है कि मधेपुरा में राजद के समर्पित कार्यकर्ता एकजुट होकर उनके साथ हैं।
मधेपुरा में जदयू और भाजपा इस बार एकजुट
एनडीए के उम्मीदवार और वर्तमान में सूबे के आपदा मंत्री दिनेश चन्द्र यादव भी चुनावी दंगल में हैं। कभी शरद यादव के सबसे करीबी में माने वाले दिनेश चन्द्र यादव भी पहले सांसद रह चुके हैं। हालांकि उनका कार्यस्थल अभी तक सहरसा और खगड़िया जिलों में ही रहा लेकिन मधेपुरा में भी उनकी जबर्दस्त पकड़ है। 2014 के लोकसभा चुनाव में अलग-अलग लड़ने वाली जदयू और भाजपा इस बार एकजुट है और वोटों का अंकगणित उनके पलड़े को भारी कर रहा है। 
त्रिकोणीय मुकाबला बनाने के प्रयास में पप्पू यादव
मधेपुरा में एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर को जाप संरक्षक और वर्तमान सांसद पप्पू यादव त्रिकोणीय बनाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। पप्पू यादव 2014 में राजद के टिकट पर चुनाव जीते थे लेकिन बाद में वे राजद से अलग हो गये। वैसे तो मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में हर वर्ग में उनके समर्थक हैं। लेकिन समर्थकों को वोट बैंक में तब्दील करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगी। 
सुपौल में दोनों गठबंधन में होगी सीधी टक्कर
सुपौल लोकसभा सीट में महागठबंधन और एनडीए के बीच सीधी टक्कर है। यहां से महागठबंधन की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी सह सांसद रंजीत रंजन तीसरी बार चुनावी मैदान में हैं। कोसी इलाके में अब तक सांसद के रूप में पहली बार महिला रही हैं जो दो बार लोकसभा पहुंच चुकी हैं।  सुपौल लोकसभा सीट से एनडीए उम्मीदवार जदयू के दिलेश्वर कामैत पहले पूर्व विधायक रह चुके हैं और इनकी छवि सहज और सरल है। 2014 के चुनाव में वह दूसरे नम्बर पर रहे थे। 
ऊर्जा मंत्री की रहेगी महत्वपूर्ण भूमिका
चुनावी दंगल में उतरे प्रत्याशियों से इतर कोसी के विश्वकर्मा के माने जाने वाले सूबे के ऊर्जा, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव पर भी लोगों की नजरें टिकी है। साल 1990 से लगातार विधायक और मंत्री बन रहे विजेन्द्र प्रसाद यादव को लोगों ने लोकसभा चुनाव लड़ने का आग्रह किया लेकिन उन्होंने अब तक किंगमेकर की भूमिका ही निभायी है। हालांकि कभी शरद यादव के काफी करीब रहे और उनके हर चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ऊर्जा मंत्री श्री यादव इस बार उनके प्रतिद्वन्दी खेमे में हैं।

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