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Saturday, 1 December 2018

#WorldAIDSDay: बिहार में चौंकाने वाले मामले, 44 बच्चों और 27 गर्भवती महिलाओं को HIV AIDS


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बेगूसराय: आज विश्व एड्स दिवस है. इस लाइलाज बीमारी से बचाव की जागरूकता के लिए 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है. वहीं, जिले में इस बीमारी का एक कड़वा सच सामने आया है. यहां एक नहीं 44 बच्चों को एड्स की बीमारी से ग्रसित पाया गया है.


बेहद चौंकाने वाले इस मामले में पीड़ित बच्चों को यह बीमारी मां की कोख से मिली है. मां की ममता की छांव में बच्चे इस बीमारी का दंश झेल रहे हैं. यह कोई कहानी नहीं बल्कि सरकारी आंकड़ें हैं , जो एक ही जिले के हैं.

बेगूसराय की धरती का काला कंलक

बिहार की औद्योगिक नगरी, राष्ट्र कवि दिनकर की जन्मस्थली और सूबे के पहले सीएम श्री कृष्ण सिंह की कर्मभूमि का यह काला कंलक आज कई सवाल खड़े कर रहा है. बता दें कि भारत में 2017 तक करीब 1 लाख 20 हजार बच्चे एचआइवी संक्रमित थे. और यह संख्या दक्षिण एशियाई देशों में टॉप पर थी.

चिंता का विषय

हर साल मनाए जाने वाले एड्स जागरूकता दिवस पर जागरूकता फैलाई जाती है. बताते चले कि एड्स जैसी बिमारी से जूझ रहे लोगो में वैसे महिला और पुरूष शामिल है जो माईग्रेट है. इन माईग्रेट लोगों में मजदूर, छात्र और बिजनेस मैन शामिल हैं. जिले के सदर अस्पताल में सरकार की ओर से एचआईवी जांच के लिए विशेष व्यवस्था है.


जिले में नए मामले

जिले में एचआईवी पॉजिटिव 43 बच्चों में 24 लड़के, जबकि 19 लड़कियां हैं. वहीं, 27 गर्भवती महिलाएं ऐसी है, जो इस घातक बीमारी से पीड़ित हैं. बच्चों को जन्म देने वाली हैं. हांलाकि पिछले वर्ष की तुलना मे इस वर्ष एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या में कमी आई है.


इस वजह से यहां ज्यादा है एड्स 

बेगूसराय मे तेजी से फैला एड्स चिंता का विषय है. इसके लिए समय समय पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाता रहा है. इतना ही नही सरकार की ओर पीड़ित लोगों को प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया गया है. इस संबध में अधिकारियों का मानना है कि जिले में एनएच और बिजनेस हब होने की वजह से यहां बाहरी लोग आते-जाते हैं. बडी संख्या मे ट्रकों का आवागमन होता है. वहीं, यह बीमारी बाहरी लोगों द्वारा जिले में प्रवेश होती है. इसके अलावा जगह-जगह संचालित वेश्यालयों ने भी इस बीमारी को बढ़ावा दिया है.




गर्भ में ही होगा बीमारी का अंत

पर इन सब के बीच एक अच्छी बात यह है कि आने वाले दिनों में एड्स से पीड़ित गर्भवति महिलाएं अपने बच्चे को सुरक्षित जन्म दे पाएंगी. इसके लिए दवा देकर बीमारी का अंत किया जाएगा. इसके चलते 45 दिनों बाद और छह महीने के अंदर बच्चे को गर्भ में ही दवा देकर इस भंयकर बीमारी से निजात मिल जाएगी. इसके लिए सरकार पूरी व्यवस्था के साथ दावा कर रही है.

इस वर्ष के आंकड़े

भारत सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार भारत में एचआईवी के रोगियों की संख्या लगभग 2.1 मिलियन है.
बिहार के इस जिले में एड्स रोगियों की कुल संख्या 3754 पाई गई है.
इन रोगियों में 3185 अंडर ट्रीटमेंट हैं.
यूनिसेफ की ‘चिल्ड्रन, एचआइवी और एड्स: द वर्ल्ड इन 2030’ की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में 5800, नेपाल में 1600, और बांग्लादेश 1000 से कम लोग एचआईवी संक्रमित हैं.
पूरी दुनिया में 2030 तक हर दिन तकरीबन 80 लोग रोजाना एड्स की वजह से अपने प्राण गंवा देंगे.
इन वजहों से होता है एड्स

आसुरक्षित यौन संबंधों से
संक्रमित खून चढ़ाने से.
एचआईवी पॉजिटिव महिला के बच्चे में.
एक बार इस्तेमाल की जानी वाली सुई को दूसरी बार यूज करने से.एचआईवी के लक्षण

एड्स होने पर निम्‍न प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं
बुखार, पसीना आना
ठंड लगना, थकान
भूख कम लगना, वजन घटा
उल्टी आना, गले में खराश रहना
दस्त होना, खांसी होना
सांस लेने में समस्‍या, शरीर पर चकत्ते होना, स्किन प्रॉब्‍लम

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