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Tuesday, 18 December 2018

कोशी क्षेत्र में ठंड का दिखने लगा है असर, लोगों ने निकाला टोपी मफलर

कोशी लाइव:अक्की


सहरसा।देर शाम हुई बूंदा बंदी से तापमान लुढ़का, कनकनी बढ़ी।
मौसम में अचानक हुए बदलाव के बाद ठंड और कनकनी बढ़ गयी। सोमवार की सुबह सूर्य निकलते ही काले बादलों की ओट में छिप गया। आकाश में छाए बादल से लगा कि बारिश होगी। हालांकि देर शाम शुरू हुई बूंदाबांदी के बाद ठंड में और इजाफा हो गया।
सोमवार को अधिकतम और न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गयी। अधिकतम तापमान जहां 21 डिग्री रहा वहीं न्यूनतम 9 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। ठंड को बढ़ते देख लोग गर्म कपड़े पहनकर बाहर निकले। आज का दिन इस वर्ष का सबसे ठंडा दिन माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आंध्रप्रदेश में चक्रवाती तूफान फेथई का भी असर पड़ रहा है। फेथई के असर के कारण ठंड बढ़ी है। उत्तरी पश्चिमी हवा चलने से कनकनी बढ़ने व हल्की बारिश होने की भी संभावना है। उधर, महिषी में भी दिन भर आसमान में बादल छाये रहे। रविवार तक धूप की गर्मी से जाड़े के मौसम में भी लोग गर्मी का अहसास कर रहे थे लेकिन सोमवार को लोग गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे थे।

मधेपुरा में कनकनी बढ़ने से बढ़ी दुश्वारियां

मधेपुरा में पूरे दिन धुंध छाए रहने सोमवार को कनकनी काफी बढ़ गयी है। सुबह चंद मिनट सूरज निकलने के बाद बादलों में ढक रहा। ठंड बढ़ने से कामगारों की मुश्किलें काफी बढ़ गयी हैं। सड़कों पर आते- जाते लोग भी ठंड से परेशान दिखायी दी। चिकित्सकों के अनुसार बीमार होने से बचने के लिए एहतियात बरतने की है जरूरत।

सुपौल : दिसंबर का महीना आधा बीत चुका है, ठंड का बढ़ना तो लाजिमी है। लेकिन हिमालय की तराई में बसे कोसी के इलाके में भी अब तक लोग गुलाबी ठंड का ही आनंद ले रहे थे। दिन में धूप तेज होती थी और रात ढलने पर और सुबह में ठंड का अहसास होता था। लेकिन सोमवार को अचानक मौसम का मिजाज बदला। पूरे दिन बादलों में छिपे रहे सूर्यदेव। दोपहर में एकबारगी सूर्य की किरण दिखी लेकिन कुछ ही क्षण में फिर बादलों ने ढक लिया। नतीजा रहा दिनभर अच्छी खासी ठंड रही। अब तक गुलाबी ठंड का आनंद लेने वाले को लगने लगा कि शायद यह शीतलहर की अलार्म है। लोगों ने दिन में ही टोपी और मफलर निकाल लिया।


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कहीं शीतलहर का अलार्म तो नहीं दिसंबर के मध्य से ही कोसी के इस इलाके में अमूमन शीतलहर का प्रकोप हर वर्ष हुआ करता है। जो जनवरी के मध्य तक अपना प्रकोप रखता है। लोगों का मानना है कि मकर संक्रांति के बाद ही ठंड में कमी आनी शुरू होती है। इस बीच कुहासे की चादर और सर्द हवा जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है। बस एक ही बात सामने होती है ठंड से बचाव।
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गर्म कपड़ों की दुकान पर जमने लगी भीड़
मौसम का मिजाज देखते ही गर्म कपड़ों की दुकानों पर भीड़ दिखाई देने लगी। खासकर फूल जैकेट और टोपी मफलर की डिमांड अधिक दिखाई दे रही थी। मौजे और दस्ताने की डिमांड भी लोग कर रहे थे। ठंड नहीं पड़ता देख आज तक उदास दिख रहे व्यापारियों को जैसे भरोसा हो गया कि अब उनका कोई माल फंसने वाला नहीं।

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