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Thursday, 25 October 2018

मधेपुरा: पीएचडी डिग्री धारकों को पांच बिन्दुओं पर निर्गत किया जाएगा प्रमाणपत्र : कुलपति

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मधेपुरा। बीएन मंडल विश्वविद्यालय में गुरुवार को कुलपति डॉ. अवध किशोर राय की अध्यक्षता में बैठक की गई। बैठक में एजेंडा के विभिन्न ¨बदुओं पर चर्चा की गई। इसमें पीएचडी डिग्री धारकों को पांच ¨बदुओं पर आधारित योग्यता प्रमाण पत्र निर्गत करने के संबंध में विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए निर्णय लिया गया कि विवि अनुदान आयोग द्वारा निर्गत पीएचडी रेगुलेशन 2009 एवं चौथी बार संशोधित रेगुलेशन 2016 और इससे संबंधित राजभवन पटना द्वारा निर्गत की अवहेलना नहीं की जा सकती है। इन पत्रों में स्पष्ट यह निर्णय लिया गया कि उक्त प्रमाण पत्र उन्हीं पीएचडी धारकों को निर्गत किया जा सकता है। जिनका पंजीयन 11 जुलाई 2009 से पहले का है एवं जो निर्धारित पांच ¨बदुओं की आहर्ता पूरा करते हैं। उक्त तिथि के बाद पंजीकृत शोधार्थियों को योग्यता प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जा सकता है। सर्वसम्मति से बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इस संबंध मे विभागाध्यक्षों को भी जागरूक होना आवश्यक है। क्योंकि जानकारी के अभाव में समस्याएं पनपती चली जाती है। अत: सभी संकायोध्यक्षों को यह निर्देश दिया गया कि वह अपने संकाय के अंतर्गत विभागाध्यक्षकों की आपात बैठक बुलाकर सविस्तार उन्हें वस्तुस्थिति की जानकारी दें। साथ ही यह अनुरोध करें कि 11 जुलाई 2009 से पूर्व के पंजीकृत पीएचडी धारकों के आवेदक को संज्ञान में ले एवं पूरी तरह जांच पड़ताल कर और बिल्कुल संतुष्ट होकर ही वैसे आवेदनों का कार्रवाई के लिए अग्रसारित करें। जो आहर्ता पूरी नहीं करते हैं। उन्हें अपने स्तर से ही रद कर दें। सूची अंतर्गत दूसरे ¨बदु पर 20011 एवं 2012 के प्रीपीएचडी कोर्स वर्क को लेकर यह निर्णय लिया गया कि 2011 से संचालित विश्वविद्यालय द्वारा बनाए गए प्रीपीएचडी कोर्स के नियम परिनियम को निरस्त किया जाता है। ऐसी स्थिति में उक्त कोर्स वर्क के तहत जो शोधार्थी उत्तीर्ण होकर अपना शोध कार्य कर रहे हैं। वह रेगुलेशन 2009 के तहत सारी प्रक्रियाओं को पूरा कर अपना शोध ग्रंथ जमा करेंगे। लेकिन जो शोधार्थी पास होने के बावजूद भी अपना शोध सार उन्हें फिर से पीएचडी एडमीशन टेस्ट में बैठना अनिवार्य होगा। यदि वह शोध करने के लिए इच्छुक हो तो किसी भी तरह उक्त कोटियों के शोधार्थियों के पुन: विचार नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय स्नात्कोत्तर जन्तुविज्ञान द्वारा कुछ इस प्रकार के शोधार्थियों को डिपार्टमेंटल रिसर्च काउंसिल द्वार शोध सार पर विचार करने पर ¨चता जताई गई। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि ऐसी सभी मुद्दों को पीजीआरसी के लिए अग्रसारित कर दिया जाए ताकि एक ठोस निर्णय लिया जा सके।
बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा बीवॉक बैचलर ऑफ वोकेशनल कोर्स रहा। यूजीसी द्वारा विश्वविद्यालय अंतर्गत दो महाविद्यालयों गजेंद्र मिश्रा महाविद्यालय सहरसा एवं मधेपुरा महाविद्यालय मधेपुरा का चयन कर उन्हें क्रमश: हेल्थ केयर मेडिकल इमे¨जग टैक्नोलॉजी और डीटीपी एंड ¨प्र¨टग टैक्नोलॉजी एकाउं¨टग एंड टैक्ससेशन इनफार्मेशन टैक्नोलॉजी आदि कंप्यूटर हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग कोर्स कराने की अनुमति प्रदान की है। इस मामले में यह निर्णय लिया गया कि समिति का गठन किया जाए। सभी संकायाध्यक्ष संबंधित महाविद्यालय के प्राचार्य एवं नोडल ऑफिसर और उपकुलसचिव अकादमी सचिव सदस्य रहेंगे जो संबंधित कोर्स की वैद्यता एवं साधनों पर ठोस निर्णय लेकर प्रक्रिया को आगे बढाएंगे। बैठक का संचालन उपकुलसचिव आकदमी डॉ. एमआई रहमान ने किया एवं अकादमी के सहायक बिमल कुमार सफल संचालन में सहयोग दिया। मौके पर बैठक में प्रतिकुलपति डॉ. फारूक अली के साथ-साथ समाज विज्ञान के संकायाध्यक्ष डॉ. शिवमुनि यादव, मानविकी के संकायाध्यक्ष डॉ. ज्ञानंजय द्विवेदी, विज्ञान के डॉ. अरूण मिश्रा,शिक्षाशास्त्र के डॉ. राणा जेराम ¨सह उपस्थित थे।

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