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Thursday, 27 September 2018

मधेपुरा:हिंदी किसी धर्म की भाषा नहीं : इकबाल राजा

कोशी लाइव,संवाददाता:कुमारखंड /इकबाल राजा
हिंदी भाषा का जन्म उत्तर भारत मे हुआ, पर उसका नामकरण ईरानियों और भारत के मुसलमानों ने किया। यह बात कुछ ऐसा ही है कि बच्चा हमारे घर जनमे और उसका नामकरण हमारे पङोसी करे। वस्तुत: हिन्दी किसी धर्म सम्प्रदाय की भाषा नहीं है, इस पर सबका समान अधिकार है। हिन्दी नामकरण की एक बङी ही दिलचस्प कथा है। उसको विवरण इए प्रकार है। आठवीं सदा से आजतक हिन्दी को तीन अर्थों में ग्रहण किया गया है।(1) व्यापक अर्थ में,(2)सामान्य अर्थ में और (3)विशिष्ट अर्थ में जबतक मुसलमान भारत नहीं आये, तबतक हिन्दी शब्द का प्रयोग व्यापक अर्थ में होता रहा। व्यापक अर्थ में हिन्दी , हिन्द या भारत से सम्बन्ध किसी भी व्यक्ति , वस्तु तथा हिन्द या भारत में बोली जानेवाली किसी भी आर्य, द्रविङ या अन्य भारतीय भाषाओं के लिए प्रयुक्त होती थी। ईरानियों की प्राचीनतम धर्म पुस्तक(अवेस्ता) में हिन्दी , हिन्द आदि मिलते हैं । मध्यकालीन ईरान में हिन्द में ईक् विशेषण-प्रत्यय लगाकर हिन्दीक् भर हिन्दी ग् शब्द बुना। कालान्तर में अन्तिम व्यंजन लुप्त हो गया और हिन्दी शब्द हिन्द के विशेषणरूप में प्रचिलत हुआ। प्रारम्भ में हिन्दी शब्द देशबोधक था। कुछ लोग हिन्दी का सम्बन्ध सिन्धी से जोङते हैं। क्योंकि ईरानियों लोग स का उच्चारण ह की तरह करते थे। आथवीं सदा तक ईरानियों दूारा हिन्दी शब्द का प्रयोग ऐसा ही होता था। ईरान से ही हिन्द और हिन्दी शब्द अरब , मिस्त्र, सीरिया तथा अन्य देशों को प्राप्त हुए। किन्तु इस प्राचीन व्यापक अर्थ में हिन्दी शब्द का प्रयोग अब नहीं होता। भारतीय संविधान ने इस शब्द का ग्रहण भारतीय संघ की राज्यभाषा के रूप में किया है। भारत के प्राचीन ग्रन्थों मे हिन्दी , हिन्द और हिन्दू शब्दों का प्रयोग नहीं मिलता । जबान -ए-हिन्द शब्द का प्रयोग मध्यकालीन फारसी और अरबी साहित्य में मिलता है।

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