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Wednesday, 11 July 2018

मधेपुरा:VIDEO: 6 लाख की नौकरी छोड़ देश को जागरूक करने निकले इंजीनियर, पढ़ें क्यों

@स्टालिन_अमर_अक्की #_कोशी क्षेत्रिये समाचार
पदयात्रा पर इंजीनियर का बयान।

लगभग हर प्रदेश में भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए सरकारी स्‍तर पर विभाग भी हैं और योजनाएं भी। इतना ही नहीं ज्‍यादातर शहरों में भिक्षुक गृह भी बने हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर खाली ही हैं। ऐसे में दिल्‍ली के युवा इंजीनियर आशीष शर्मा ने बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए एक अनोखे अभियान की शुरुआत की है। आशीष पूरे देश में 17 हजार किलोमीटर की पदयात्रा कर इसे रोकने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

 युवा पीढ़ी को जोड़ना है लक्ष्‍य
आशीष के मुताबिक, वह कक्षा छह से ही वृद्धाश्रम जा रहे हैं। जल्‍द ही उन्हें अहसास हो गया कि इस समस्‍या की जड़ बच्‍चों में ही है। अगर बच्‍चे ही खुश नहीं होंगे तो बुजुर्ग कैसे सुखी रह सकेंगे। सड़कों पर हजारों बच्‍चे भीख मांगते दिख जाते हैं, लेकिन कोई उनके लिए कुछ नहीं करता है। आशीष बच्चों के लिए कुछ करना चाहते थे, लेकिन पता था कि व्यक्तिगत रूप से 50 से 100 बच्‍चों से कैसे मिल सकते थे। इसलिए अपने लक्ष्‍य को पाने के लिए पूरी युवा पीढ़ी को जोड़ने की शुरुआत की है।

लोगों की भावनाओं को जगाना है
मैकेनिकल इंजीनियर आशीष ने देश को बाल भिक्षावृति से मुक्त करने के लिए जॉब भी छोड़ दी और बीते 22 अगस्‍त 2017 से ही इसे पूरा करने के लिए पदयात्रा पर निकले हुए हैं। दुआएं फाउंडेशन के तहत 17 हजार किलोमीटर की पदयात्रा को आशीष ने उनमुक्‍त इण्डिया का नाम दिया है। इस अभियान के तहत देश के 29 राज्‍यों व 7 केंद्र शासित राज्‍यों के 4900 गांवों में बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए जागरूक किया जाएगा। उनका कहना है कि मैं लोगों को यह बताना चाहता हूं कि भीख मांगते बच्‍चों को गाली न दें और न भीख। साथ ही, शोषण करने के बजाय उन्‍हें समाज की मुख्‍यधारा में शामिल करने में मदद करें।
 

'68 % अपराध बच्चे करते हैं'
आशीष कहते हैं कि 68 % अपराध यही बच्चे करते हैं। यही कारण है पुलिस की ड्यूटी मुश्किल होती जा रही है। मैं लोगों की भावनाओं को जगाना चाहता हूं। मुझे लगता है कि जब उनको पता चलेगा कि कोई 17 हजार किलोमीटर सिर्फ बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए पैदल चल रहा है, तो उसका असर जरूर होगा और असर हो भी रहा है। देश भर से आज युवा साथ खड़े हैं।

टीचर्स व अधिकारियों से भी ले रहे सहयोग
अपने इस अभियान के तहत आशीष स्‍कूल-कॉलेजों के प्रिंसिपल और अधिकारियों से भी मिलकर जागरूकता फैलाने के लिए सहयोग मांग रहे हैं। बाल  भिक्षुकों को समाज में शामिल कर एक बेहतर भविष्‍य देने की कवायद में उनको  सहयोग भी मिल रहा है। वह आगामी 14 जून 2019 को उनमुक्‍त दिवस मनाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें10 लाख लोगों को एक साथ जोड़ने की कोशिश है। वह चाहते हैं कि इस आयोजन में लोग भीख मांगने वाले बच्‍चों की बेहतर शिक्षा दिलाने व एक आदर्श समाज बनाने की शपथ लें।
 

7302 किमी की पदयात्रा
आशीष एक मोबाइल एप भी डेवलप कर रहे हैं। इसकी मदद से पांच किलोमीटर के दायरे में किसी भी बाल भिक्षुक दिखने पर उसकी जानकारी अपलोड की जाए। जिससे आसपास के पुलिस अधिकारी व अनाथाश्रम उस बच्‍चे की मदद कर सकें।। आशीष देश के कई राज्यों में यात्रा करने के बाद 7302 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए बक्सर, आरा, पटना, गया, नालंदा, बिहार शरीफ, लखीसराय, बेगूसराय, सहरसा और अब मधेपुरा पहुंचे हैं।

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