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Friday, 20 July 2018

सहरसा :फिर एक बार दियारा में गरजेगी बंदूकें, बदमाशों ने कुख्यात को पहुंचाया है भारी नुक़सान

@स्टालिन_अमर_अक्की #_कोशी क्षेत्रिये समाचार

स्व. रामपुकार यादव के पिता है युगेश्वर यादव, वर्तमान में विपीन यादव जेल में हैं बंद
रमेश व छबीलाल यादव की मौत के बाद यह परिवार समाजिक मुख्य धारा में लौट गया था
दस लाख से अधिक की सम्पत्ति का नुक़सान बुधवार की रात कर गया बदमाश
कोशी दियारा से लौट कर ब्रजेश भारती की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट :-
बुधवार को सहरसा जिले के पूर्व कोशी तटबंध के कछार पर अवस्थित पहलवान घाट पर एक दर्जन बदमाशों के द्वारा जो नाव जलाने एवं डुबाोने की घटना को अंजाम दिया गया है उससे भविष्य में दियारा क्षेत्र अशांत हो खूनी खेल की संभावना प्रबल कर दिया है।
चुंकि यहां यह जानना जरूरी है कि बुधवार की घटना उस परिवार के साथ हुआ है जो कलांतर में कोशी दियारा में अपनी एक अलग सरकार चलाती थी।
युगेश्वर यादव के छः पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र रामपुकार यादव अपना एक गिरोह चलाया करता था एक दशक तक दियारा क्षेत्र में गिरोह संचालन करने के दौरान ही पूर्णिया जिले के बनमनखी स्थित जानकीनगर में गैंगवार मारा गया था हालांकि पुलिस उसे मुठभेड़ में मारे जाने की बात कह रही थी।
उसके बाद गिरोह की कमान रमेश यादव ने संभाल इसको आगे बढा़या उसके बनमा- ईटहरी चमरारही बहियार में कुख्यात जाहिद उर्फ कमांडो के द्वारा गैंगवार में ढे़र कर दिया गया।
तदउपरांत गिरोह की कमान छठे पुत्र छबीला यादव ने संभाल परिवारिक पृष्ठ भूमि को आगे बढ़ाने का काम किया। छबीला यादव के खगड़िया जिले के कैंजरी मोड़ के समीप पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद यह परिवार समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का प्रयास कर शांति जीवन जीने की ओर जुड़ गया।
करीब दो वर्षों से समाज के मुख्य धारा में जुड़ व्यवसाय की ओर मुड़ गया। नाव परिचालन से लेकर बड़े पैमाने पर खेती बाड़ी को अपना लिया।
बुधवार की घटना से उस परिवार को करीब दस लाख से अधिक की संपत्ति का नुक़सान हुआ है ऐसे में ये परिवार चुप बैठा रहेगा यह संभव नहीं लगता है।
पहलवान है जेल में –
जिस घाट पर बुधवार की रात घटना को अंजाम दिया गया है उस घाट का नाम पहलवान घाट है यह युगेश्वर यादव के पुत्र बिपीन यादव के द्वारा संचालित किया जाता है फिलहाल बिपीन पहलवान सहरसा जेल में एक केश के मामले में बंद हैं।
नाव ही दियारा में आवागमन का एक मात्र सहारा –
कोशी दियारा आजादी के सत्तर दशक बाद में मुलभूत सुविधाओं से बंचित है यहां कोशी नदी में नाव ही परिचालन का सहारा है सभी लोगों को अपना नाव रखना संभव नहीं है क्योंकि नाव की लागत लाखों में होती है। जलाए गए नाव की किमत करीब सात लाख रुपए बताई जा रही है शीशम की लकड़ी से निर्मित इस प्रकार के नाव दस हार्श पावर डीजल इंजन से लेकर दो सेलेन्डर पंप चालित से चलता है।
सरकारी नाव का नही होता संचालन –
कोशी दियारा के विभिन्न घाटों पर रोजाना सैकड़ों लोग इस पार से उस नदी पार करते हैं लेकिन सरकारी नाव का परिचालन नहीं होता है। बाढ़ के समय सरकारी स्तर पर इन्ही नाव मालिकों से करार कर सरकारी स्तर पर नाव का परिचालन करवाता है। जो बाढ़ के बाद खत्म हो जाता है।

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