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Friday, 9 March 2018

सहरसा. रिक्शा चलाकर पढ़ाई कर रहे हैं कई छात्र

:Fri, 09 Mar 2018 @अक्की )  कोशी क्षेत्रिये समाचार
सहरसा। मन में जुनून हो तो सफलता कदम चूमती है। ऐसे में गरीबी भी आड़े नहीं आती है। शहर के एक लॉज में रह रहे कई ऐसे छात्र हैं जो दिन में रिक्शा चलाते हैं और रात में मन लगाकर पढ़ाई करते हैं। इससे होने वाली कमाई से वो अपने परिवार का भी सहयोग करते हैं।

केस स्टडी
सौरबाजार थाना क्षेत्र के धनछोहा गांव निवासी मु. फिरोज के पुत्र मो. सरफराज सहरसा बस्ती के समीप एक लॉज में रहते हैं। ये राजेन्द्र मिश्र कॉलेज में स्नातक प्रथम खंड के छात्र हैं। बचपन से ही पढ़कर अच्छा इंसान बनने का जुनून इन्हें था। शुरुआती दौर में जैसे-तैसे पढ़ाई की। परंतु मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद पढ़ाई में गरीबी आड़े आने लगी। उसने इससे निजात का हल निकाला। दिन में मजदूरी या अन्य कार्य करने के बाद पढ़ाई करने लगा। इंटर की परीक्षा द्वितीय श्रेणी से पास करने के बाद एक लॉज में भाड़े का घर लिया। ई-रिक्शा का चलन बढ़ने के बाद अब वह भाड़े पर ई-रिक्शा लेकर दिन में चलाता है। शाम होते ही अपने कमरे पर पहुंचकर मन लगाकर पढ़ाई करते है। उन्होंने बताया कि महीने में चार से पांच हजार की कमाई से पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं होती है। परिवार के लोगों भी कभी-कभार सहयोग कर देते हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी नौकरी की चाहत शुरू से है। जिस कारण प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शिक्षकों के पास जाकर कर लेते हैं। सरकारी सहायता पर कहते हैं कि यह कभी नहीं मिला। लेकिन, रिक्शा चलाकर भी स्वाभिमान से समझौता नहीं किया। काम छोटा हो या बड़ा कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसी तरह डुमरैल वार्ड नंबर 33 के मु. जहुर के पुत्र मो. अरमान मनोहर हाईस्कूल सहरसा से इसी वर्ष मैट्रिक की परीक्षा दी है। लेकिन, परिवार में आर्थिक तंगी के कारण उसे पढ़ाई में बाधा आ रही थी। जिसके बाद उसने भाड़े पर ई-रिक्शा लेकर चलाना शुरू किया। उसकी तमन्ना इंजीनियर बनने की है। वह कहता है कि रिक्शा चलाकर घर पहुंचने के बाद पढ़ाई व परीक्षा की तैयारी करता है। रिजल्ट बेहतर आने के बाद इंटर में नामांकन कराउंगा। उन्होंने बताया कि मु. सरफराज को देखकर उन्होंने यह प्रयास किया और इसमें सफलता मिली। इसके अलावा रिक्शा चलाकर पढ़ाई कर रहे राहुल ने बताया कि उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है कि दूसरे क्या सोचते हैं। मुझे आने वाली ¨जदगी को बेहतर बनाना है इसलिए रिक्शा चलाकर कुछ कमाई करता हूं जिसे किताब व कॉपी पर खर्च करता हूं। इन छात्रों के प्रेरणा से करीब एक दर्जन छात्र इस तरीके से पढ़ाई कर रहे हैं। पूर्व वार्ड पार्षद मु. औवेश करनी कहते हैं कि इन छात्रों के जज्बे को सभी लोग सलाम करते हैं।
कोट
मंजिल पाने का जज्बा रखने वाले कभी पीछे मुड़कर नहीं देखते हैं। खुद की कमाई कर पढ़ाई करना समाज के लिए मिसाल है। इससे दूसरे को भी प्रेरणा मिलती है।
-डॉ. विनय कुमार चौधरी, समाजशास्त्री।

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