सुपौल। देर से ही सही लेकिन सिने गायक उदित नारायण को मातृभूमि की याद आ ही गई। 35 साल बाद जब वे राघोपुर प्रखंड के वायसी पंचायत के गोठ वायसी वार्ड नंबर 10 में सार्वजनिक पंचमुखी हनुमान मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व रूद्र यज्ञ में भाग लेने के लिए पहुंचे तो मातृभाषा का प्यार भी उनकी जुबान से छलक पड़ा। लोगों के आग्रह पर उन्होंने मैथिली लोक गीत एहेन सुंदर मिथिला धाम यौ गाकर जहां लोगों का मन मोह लिया वहीं देहाती गायक को गायिकी का सुपर स्टार बनाने वाला फिल्म से कयामत से कयामत का गाना पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा गाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने लोगों का संबोधित भी मैथिली में ही किया।
जन्मभूमि पर मिले प्यार से अभिभूत पा‌र्श्व गायक ने शुद्ध मैथिली में संबोधित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र की गरिमा व सम्मान बढ़ाने के लिए हर समय प्रयासरत हैं और रहेंगे। उदित नारायण ने कहा कि यहां आने के बाद जाने का मन नहीं कर रहा है। मीडिया से रूबरू होते हुए उदित नारायण ने कहा कि करीब तीस-पैंतीस वर्ष के बाद जन्मस्थली पर पहुंचने के बाद स्वर्ग जैसा महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि 2016 में राजगीर में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बातचीत के दौरान कहा कि वो बिहार के जिस गांव में बचपन के दिन गुजारे थे वहां आजादी के दशकों साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची है। इस बातचीत के एक सप्ताह बाद ही नीतीश कुमार ने बायसी गांव में बिजली पहुंचा दी। ज्ञ स्थल के नजदीक बने मंच पर आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र के वेद मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्जलित कर कार्यक्रम की शुरुआत होते ही उमड़े जनसैलाब ने उदित नारायण से अपनी आवाज में गीत सुनाने की मांग तेज कर दी। वे भी लोगों की मांग को नहीं ठुकरा सके और अपनी मधुर आवाज में संगीत की तान छेड़ दी। एहेन सुन्दर मिथिलाधाम यौ, पापा कहते हैं जैसे कई गीत गाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।